शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से शनि देव की कृपा भी प्राप्त होती है। यह व्रत जीवन के कष्टों, आर्थिक परेशानियों, शनि दोष, रोग और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। साथ ही दांपत्य सुख, संतान सुख, मनोकामना पूर्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। यहां हम बात करने जा रहे हैं जून के शनि प्रदोष व्रत के बारे में, जो 27 जून को रखा जाएगा। आइए जानते हैं शनि प्रदोष व्रत की तिथि, मुहुर्त और महत्व के बारे में विस्तार से…
शनि प्रदोष व्रत तिथि 2026 (Kab Hai Shani Pradosh Vrat)
फ्यूचर पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 जून को रात 10 बजकर 21 मिनट पर होगी और इस तिथि का समापन 28 जून को देर रात 12 बजकर 42 मिनट पर होगी। उदया तिथि के आधार पर शनि प्रदोष व्रत 27 जून शनिवार के दिन रखा जाएगा।
व्रत के नियम
शनि प्रदोष व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करना, क्रोध, झूठ, निंदा और तामसिक भोजन से दूर रहना शुभ माना जाता है। वहीं व्रती को दिनभर सात्विक विचार रखने चाहिए साथ ही मौन या कम बोलने का प्रयास करना चाहिए। पूजा से पहले और बाद में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। प्रदोष काल में शिव पूजा अवश्य करें, क्योंकि यही समय इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। व्रत का पारण पूजा और आरती के बाद सात्विक भोजन से किया जा सकता है।
शनि प्रदोष पूजा-विधि
शनि प्रदोष व्रत के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक जीवन अपनाएं तथा यथासंभव उपवास रखें। प्रदोष काल (सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटे पहले और बाद का समय) में भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी महाराज की विधि-विधान से पूजा करें। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक, भस्म, चंदन, अक्षत, सफेद पुष्प और फल अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। साथ ही शिव चालीसा, शिव पंचाक्षर स्तोत्र या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। सबसे बाद में भगवान शिव की आरती कर प्रसाद वितरित करें।
शनि प्रदोष धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। यह व्रत विशेष रूप से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि से संबंधित समस्याओं से राहत दिलाने वाला माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक शिव पूजा करने से पापों का क्षय होता है, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है, धन-धान्य में वृद्धि हो सकती है और कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होने की मान्यता है।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
