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गुरुवार के दिन मनाई जाएगी शनि जयंती, जानें कैसे करें पूजा

गुरुवार के दिन देव पितृ कार्य अमावस्या भी है जिसे पितृों को खुश करने का दिन माना जाता है।

सांकेतिक फोटो।

शास्त्रों में शनि देवता को न्याय का देवता बताया गया है। कहा जाता है कि जो कोई शनिवार को शनिदेव की पूजा करता है उस पर शनि की कृपा बनी रहती है। ज्योतिषियों का कहना है कि भगवान शनि का जन्म ज्येष्ठ महिने की अमावस्या को हुआ था, जिसके कारण हर साल ज्येष्ठ महिने की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार 25 मई को शनि ज्यंती मनाई जाएगी और इस दिन गुरुवार है। शनि जयंती का गुरुवार के दिन होने से कई राशियों पर असर पड़ेगा।

गुरुवार के दिन शनि जयंती के होने के कारण अगर आप इस दिन शनि देव की पूजा करते हैं तो इसे शुभ माना जाता है। इस दिन शनि मंदिर में जाकर सरसों का तेल दान करें। ज्योतिषियों की माने तो इस दिन काले जूते, काले कपड़े, काला तिल, काला छाता, सरसों का तेल आदि दान करने से शनि देव खुश होते हैं। इस दान से कुंडली का शनि दोष भी दूर हो जाएगा।

गुरुवार के दिन देव पितृ कार्य अमावस्या भी है जिसे पितृों को खुश करने का दिन माना जाता है। ज्योतिषियों का कहना है जिसे पितृ दोष है उसे इस दिन जरुर पूजा करनी चाहिए।

ज्योतिषियों का मानना है कि गुरुवार को कृतिका नक्षत्र है। गुरुवार को कृतिका नक्षत्र होने के कारण यमघंटक योग है जो सुबह 5 बजकर 26 मिनट से शुरु हो जाएगा और रात्रि के 12.01 तक चलेगा। यह योग शुभ नही है। वहीं इसी दिन सिद्ध योग भी है जो सुबह 5.26 मिनट पर शुरु होकर रात्रि के 12.01 तक चलेगा। इस योग को शुभ माना जाता है।

गुरुवार के दिन सुबह छह बजे से 7.30 बजे तक शुभ चौघड़िया का मुहूर्त है। वहीं सुबह 10.30 बजे से लेकर शाम के तीन बजे तक चर, लाभ, अमृत के चौघड़िया में है। इस मुहूर्त को शुभ माना जाता है। शाम के 4.30 बजे से रात्रि के 9 बजे तक अमृत, चर के चौघड़िया का मुहूर्त है।

शनि जयंती का गुरुवार को होने के कारण इसका असर कई राशियों पर पड़ेगा। जैसे की ज्योतिषियों का मानना है कि मेष राशि के लोगों को उनकी मेहनत का फल मिलेगा। मेष राशि के लोगों को भाग-दौड़ करनी पड़ सकती है।

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