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Shani Jayanti कब मनाई जायेगी? जानिए इस दिन किन कार्यों को करने से बचना चाहिए

शनि जयंती (Shani Jayanti) ज्येष्ठ माह की अमावस्या और कृतिका नक्षत्र में मनाई जायेगी। इस दिन वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) भी रखा जायेगा। जो महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं। शनि जयंती पर तेल का दान करना काफी फलदायी माना जाता है।

Shani Jayanti 2020: हिंदू पंचांग अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है। जो इस बार 22 मई को है। ज्योतिष अनुसार इस दिन का काफी महत्व माना जाता है। शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए इस दिन विशेष पूजा अर्चना की जाती है। 11 मई को शनि वक्री हो गये हैं जो शनि साढ़े साती और ढैय्या से पीड़ित जातकों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। ऐसे में शनि जयंती पर आप शनिदेव को प्रसन्न कर सकते हैं। जानिए इस दिन क्या करें और क्या न करें…

क्या करें: शनि जयंती ज्येष्ठ माह की अमावस्या और कृतिका नक्षत्र में मनाई जायेगी। इस दिन वट सावित्री व्रत भी रखा जायेगा। जो महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं। शनि जयंती पर तेल का दान करना काफी फलदायी माना जाता है। सिंदूर, कुमकुम, काजल, अबीर, गुलाल आदि के साथ-साथ नीले या काले फूल शनिदेव को अर्पित करें। श्री फल के साथ-साथ अन्य फल भी अर्पित कर सकते हैं। शनि मंत्रों का जाप करें। शनि चालीसा पढ़ें। अखंड नारियल नदी में प्रवाहित करें। शनिदेव हनुमान जी पूजा से भी प्रसन्न होते हैं इसलिए इस दिन भगवान हनुमान की अराधना भी जरूर करें। गरीबों को दान करें। काले तिल, काली उड़द, लोहा, काले वस्त्र, काली कंबल, छाता, चमड़े के जूते, काली वस्तुएं आदि का दान करें। शनि जयंती पर शनिदेव के लिए व्रत रखना भी काफी फलदायी बताया गया है।

क्या न करें: शनि जयंती पर मांसाहार व मदिरापान नहीं करना चाहिए। शनि देव की पूजा करते समय उनकी आंखों में भूलकर भी न देखें। कहा जाता कि शनिदेव की जिन पर दृष्टि पड़ जाती है उनकी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। शनि देव की पूजा में लाल रंग का इस्तेमाल न करें। क्योंकि ये रंग मंगल का प्रतीक माना जाता है और मंगल के साथ शनि की शत्रुता है।

शनि जयंती पर नाखून न काटें। इस दिन तुलसी, दुर्वा, बिल्व पत्र, पीपल के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए। इस दिन बृह्मचर्य का पालन करें। कांच की वस्तुएं इस दिन नहीं खरीदनी चाहिए। द्वार पर आये गरीब व्यक्ति को इस दिन खाली हाथ न लौटाएं।

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