Shani Sade Sati Dhaiya And Mahadasha: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि को सबसे पावरफुल ग्रहों में से एक माना जाता है। शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता कहा जाता है। वह जातकों को उनके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि वह आपके द्वारा किए गए कर्मों के कारण आपसे किसी भी प्रकार से बदला लेते हैं। शनि को अनुशासन और मेहनत का भी कारक माना जाता है। ऐसे में वह जातक को सही रास्ते में चलना सिखाते हैं, जिससे वह अपने कर्मों को सही रखकर उसका अच्छा फल भोग सके।
शनि इकलौता ऐसा ग्रह है जिसके पास साढ़ेसाती और ढैया का हक दिया गया है। वह व्यक्ति को उनके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। आमतौर पर शनि का नाम आते ही व्यक्ति डर जाते हैं। लेकिन वास्तव में इनसे आपको डरने की जरूरत नहीं है। अगर आपने अच्छे कर्म किए हैं, तो शनि से किसी भी प्रकार से डरने की जरूरत नहीं है। अगर व्यक्ति सही कर्म करता है, तो शनि किसी भी प्रकार के बुरे परिणाम नहीं देते हैं।
शनि ग्रह की होती है चार अवस्थाएं
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की चार अवस्थाएं होती है – शनि की महादशा, अंतर्दशा, साढ़ेसाती और ढैया। इन्हीं के आधार पर वह व्यक्ति को फल देते हैं।
किन लोगों पर शनि का प्रभाव होता है अधिक
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ जातकों पर शनि का अधिक प्रभाव अधिक देखने को मिलता है।
- जिनका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ हो, क्योंकि मूलांक 8 के स्वामी स्वयं शनिदेव है।
- जिनका जन्म शनि के नक्षत्रों (पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद) में हुआ हो
- जिन लोगों का जन्म शनि की महादशा या अंतर्दशा में हुआ हो
- जिनकी कुंडली में शनि और चंद्रमा साथ हों
- जिन पर शनि की दृष्टि चंद्रमा पर पड़ती हो
- अगर शनि किसी शत्रु राशि पर बैठा, तो भी उसका परिणाम काफी कठिन होता है। जैसे अगर शनि मंगल की राशि मेष या फिर वृश्चिक में बैठें है, तो इसका परिणाम कठिन होगा। हालांकि वर्तमान में शनि अच्छी राशि में भी बैठें हो और आपके कर्म अच्छे नहीं है, तो भी शनि कष्ट दे सकते हैं।
- अगर किसी जातक को कोई गंभीर बीमारी हो और उसी समय शनि की दशा चल रही हो, तो उसमें शनि का प्रभाव अधिक दिखाई देता है।
शनि और केतु देते हैं कर्मों के फल
शनि के अलावा केतु भी जातकों को उनके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। जहां शनि जातक को धीरे-धीरे कर्मों का फल देते हैं, तो वहीं केतु अचानक से फल देते हैं। केतु की दशा होने से अचानक दुर्घटना, व्यापार बंद होना या अचानक बीमारी जैसी समस्याएं हो सकती है। वहीं शनि की बात करें तो वह पुरानी और धीरे-धीरे बढ़ने वाली समस्याएं दिखाते हैं। शनि को आलस्य और टालमटोल का भी कारक माना जाता है।
कब लगती है शनि की साढ़ेसाती और ढैया? (Shani Sade Sati And Dhaiya)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की ढैय्या तब होती है जब शनि जन्म कुंडली के चंद्रमा से चौथे या आठवें स्थान पर गोचर करते हैं। इसकी अवधि करीब ढाई वर्ष तक रहते हैं। इस दौरान जातकों को मानसिक तनाव, परिवार में परेशानियां और माता-पिता के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती तब होती है जब शनि चंद्रमा से पहले, दूसरे और बारहवें स्थान से गोचर कर रहे हो। शनि एक राशि करीब ढाई साल रहते हैं। ऐसे में शनि की साढ़े साती लगभग सात साल की होती है।
शनि साढ़ेसाती के होते हैं तीन चरण
बता दें कि शनि साढ़ेसाती के 3 चरण होते हैं। साढ़ेसाती के पहले चरण में मानसिक तनाव, खर्च बढ़ना और आय में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। दूसरे चरण की बात करें, तो पारिवारिक, वैवाहिक और व्यावसायिक जीवन में उथल-पुथल देखने को मिल सकता है और तीसरे चरण की बात करें, तो जातकों के जीवन में धीरे-धीरे स्थिति सुधरने लगती है और अच्छे परिणाम भी मिलने लगते हैं।
जीवनकाल में जातक को इतनी बार करना पड़ता है साढ़ेसाती का सामना
बता दें कि शनि साढ़ेसाती से जातकों को एक बार नहीं बल्कि तीन बार कम से कम सामना करना पड़ता है। पहली बचपन में, दूसरी युवावस्था या मध्य आयु में और तीसरी वृद्धावस्था में। पहली साढ़ेसाती व्यक्ति के स्वभाव और चरित्र के निर्माण पर प्रभाव डालती है। दूसरी साढ़ेसाती जीवन, करियर और आजीविका में बड़े परिवर्तन ला सकती है। इसके साथ ही तीसरी साढ़ेसाती को ज्ञान देने वाली साढ़ेसाती कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति जीवन के गहरे सत्य को समझने लगता है।
शनि के होते हैं चार पाये (Shani Paya)
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब शनि राशि परिवर्तन करते हैं, तो वह सोने, चांदी, तांबे और लोहे के पाये के साथ विभिन्न भावों को प्रवेश करते हैं। हर एक पाये का अपना-अपना महत्व और प्रभाव होता है।
सोने का पाया – इस पाया को सबसे शुभ माना जाता है। जब शनि जन्म राशि से प्रथम, छठे या 11वें भाव में गोचर करते हैं, तो सोने के पाये के साथ प्रवेश करते हैं। इसे सबसे शुभ माना जाता है।
चांदी का पाया – शनि पाया को काफी शुभ माना जाता है। जब शनि जन्म राशि से दूसरे, पांचवें या नौवें भाव में गोचर करते हैं, तो चांदी के पाये का निर्माण होता है।
तांबे का पाया – शनि के तांबे के पाये के साथ प्रवेश करने से जातकों के जीवन में मिश्रित परिणाम देखने को मिलता है। जब जन्म के समय शनि चंद्रमा से तीसरे, सातवें या दसवें भाव में प्रवेश करता है, तब तांबे का पाया के साथ गोचर करते हैं।
लोहे का पाया – वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि के लोहे के पाया के साथ प्रवेश करना शुभ नहीं माना जाता है। इस अवधि को सबसे कठिन समय माना जाता है। जब शनि देव जन्म राशि में चंद्रमा से चौथे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होते हैं।
इन क्षेत्रों में होता है शनि का अधिक प्रभाव
बता दें कि लोहे, रियल एस्टेट, हार्डवेयर,, पेट्रोल, दवाइयों का व्यापार और नौकरी से जुड़े कार्य शनि से संबंधित होते हैं। आज के समय में अधिकतर लोग नौकरी करते हैं। इसी के कारण शनि का प्रभाव इन क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलता है।
शनि की महादशा (Shani Mahadasha)
कुंडली में शनि की महादशा को ज्यादा शुभ नहीं माना जाता है। ये महादशा करीब 19 साल की होती है। ये कर्म, कड़ी मेहनत, सीमा, महत्वाकांक्षा अनुशासन और दीघार्यु से संबंधित होता है। ऐसे में अगर किसी जातक को शनि की महादशा का सामना करना पड़ता है, तो उसके जीवन में कई तरह की बाधाएं उत्पन्न हो सकती है।
शुभ शनि के लिए करें ये खास उपाय
- शनिवार के दिन शनिदेव को सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करें।
- शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।
- रोजाना या फिर शनिवार के दिन शनि स्तोत्र का पाठ करें
- शनि के दुष्प्रभाव कम करने के लिए घोड़े की नाल से बना छल्ला पहनना लाभकारी हो सकता है।
- शनिवार के दिन शनि के मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। ॐ शं शनैश्चराय नमः या फिर ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1- कितने साल में शनि करते हैं राशि परिवर्तन?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि एक राशि में लगभग ढाई साल रहते हैं। ऐसे में पूरा राशि चक्र यानी 12 राशियों में प्रवेश करने में 30 साल का वक्त लग जाता है।
2- इस समय शनि किस राशि में विराजमान है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस समय शनि गुरु की राशि मीन राशि में विराजमान है। 3 जून 2027 को शनि मेष राशि में प्रवेश कर जाएंगे।
3- साल 2026-27 में किन राशियों पर चल रही है शनि की साढ़े साती और ढैया
शनि के मीन राशि में आने से मेष, कुंभ और मीन में शनि की साढ़ेसाती चल रही है। जबकि धनु और सिंह पर ढैया चल रही है।
4- शनि की महादशा कितने साल तक रहती है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि की महादशा लगभग 19 साल तक चलती है।
- 5-शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए क्या उपाय करें?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनिवार के दिन शनिदेव को सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करें। इसके अलावा हनुमान चालीसा और शनि स्तोत्र का पाठ करें।
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कर्मफल दाता शनि मार्च 2025 में गुरु की राशि मीन में प्रवेश कर गए थे। इस राशि में जून 2027 तक रहने वाले हैं। ऐसे में 12 राशियों के जीवन में सकारात्मक या फिर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलने वाले हैं। आइए जानते हैं शनि के मीन राशि में जाने से 12 राशियों के जीवन में क्या प्रभाव देखने को मिलने वाला है। जानें शनि गोचर का राशिफल
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी तरह के निर्णय पर पहुंचने से पहले संबंधित विषय के विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। एक राशि के नाम के करोड़ों जातक होते हैं। ऐसे में किसी भी तरह के परिणाम में पहुंचने से पहले अपनी कुंडली की जांच किसी शास्त्र के ज्ञाता, ज्योतिषी, पंडित को अवश्य दिखाएं।
