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सूर्यदेव के पुत्र हैं शनिदेव, जानिए उनके जन्म के पीछे क्या है कहानी ?

पौराणिक कथा के अनुसार सूर्यदेवता का विवाह राजा दक्ष की कन्या संज्ञा के साथ हुआ था।

Shani Dev, Mantras in hindi, Mantras, Shani Dev Mantras, Shani Dev Mantras in hindi, Shani Dev effect, how to control Shani Dev, Shani Dev impact on business, religion news, jansattaशनि देव (सांकेतिक फोटो)

शास्त्रों में शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है तो वहीं ज्योतिषियों ने शनि देव को मारक ग्रह कहा है। शनि देव के जन्म के बारे में कई पौराणिक कथाएं सामने आती है। लेकिन शनिदेव के बारे में स्ंकंदपुराण के काशीखंड के मुताबिक शनि देव का जन्म सूर्यदेव और संवर्णा के मिलन से हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार सूर्यदेवता का विवाह राजा दक्ष की कन्या संज्ञा के साथ हुआ था। संज्ञा हमेशा सूर्य देव के तप से परेशान रहती थी। वो हमेशा यही सोचती थी कि सूर्य देव के तप को कैसे कम किया जाए। समय बीतने के साथ संज्ञा के गर्भ से यमराज, यमुना और वैवस्वत ने जन्म लिया। लेकिन संज्ञा अब भी सूर्य देव के तप से परेशान थी।

संज्ञा ने सूर्य देव के तप को कम करने के लिए तपस्या करने का फैसला किया। लेकिन बच्चों को छोड़कर जाना संभव नहीं था। इसके लिए उन्होंने एक तरीका निकाला। सूर्यदेव को भनक भी ना लगे और काम भी हो जाए इसके लिए उन्होंने अपने तप से छाया नाम की संवर्णा को पैदा किया। सूर्यदेव और अपने बच्चों की जिम्मेदारी संवर्णा को देकर वो अपने पिता के घर चली गईं।

जब संज्ञा ने अपनी परेशानी अपने पिता को बताई तो वो बहुत गुस्सा हुए और संज्ञा का डांटकर वापस भेज दिया। लेकिन अपने पति के घर वापस न आकर वो जंगल में चली गई। जंगल में जाकर घोड़ी का रूप धारण कर लिया और तपस्या करने लगी। इन सब बातों का सूर्य देव को आभास भी नहीं हुआ। सूर्य देव के साथ रहने वाली सुवर्णा का छाया रूप होने के कारण सूर्यदेव के तप से उसे कोई परेशानी नहीं हुई और कुछ समय बाद संवर्णा और सूर्यदेव के मिलन से शनिदेव, मनु और भद्रा नाम की तीन संतानों ने जन्म लिया।

वहीं शनि देव के बारे में एक अन्य कथा भी है जिसमें बताया गया है कि शनि देव का जन्म महर्षि कश्यप के अभिभावक्त में कश्यप के यज्ञ से हुआ था।

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