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आज शनि अमावस्या, जाानिए कैसे करें पूजा और पितृ दोष निवारण

शनिवार को शनि अमावस्या है और शनिवार पड जानें के कारण इसका विशेष महत्व बन गया है। जिसे शनिश्चरी अमावस्या के नाम से जानते है।

Author Updated: November 18, 2017 8:49 AM
हर माह की अमावस्या श्राद्ध की अमावस्या कही जाती है। इस दिन पितरों के लिए अर्पण किया गया दान अगर ब्राह्मण को दिया जाए तो यह बहुत शुभ होता है।

शनिवार को शनि अमावस्या है और शनिवार पड जानें के कारण इसका विशेष महत्व बन गया है। जिसे शनिश्चरी अमावस्या के नाम से जानते है। हर माह की अमावस्या श्राद्ध की अमावस्या कही जाती है। इस दिन पितरों के लिए अर्पण किया गया दान अगर ब्राह्मण को दिया जाए तो यह बहुत शुभ होता है। आझ शनिवार पड जाने के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है। अमावस्या के दिन पितरों की पूजन का दिन है और शनिवार शनि ग्रह शांत करनें का दिन है। इस तरह आज शनि- अमावस्या का पूजन आप साथ-साथ कर सकते है। इस दिन शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाते हुए शनि देव का ध्यान करते है। इशू तरह पितरों को भी दूध और कालें तिल आदि से पूजन करते है।

जानिए इसका महत्व, कथा और यह पूजा कैसे करनी चाहिए-  पितरों की पूजा पीपल के पेड़ के ही नीचे करनें का कारण हमारें दिमाग में हमेशा एक बाद आती रहती है कि क्यों पितरों की पूजा पीपल के वृक्ष के नीचें की जाती है। किसी ओर जगह क्यों नही। इस बारें में विस्तार से हरवंश पुराण में बताया गया है। इस पुराण के अनुसार पितृ देवता जो देवताओं के भी देव है और पितृ स्वर्ग में रहते है। इनका पूजा सभी करते है यानि कि इंसान, देवता, साप. किन्नर, गंधर्व किन्नर आदि करते है। ब्रह्मा जी नें पितृ देव को आज्ञा दी कि लोगों के श्राद्ध से तृप्त होकर इन लोगों की कामनाओं को हूरा करों, क्योंकि ब्रह्मा की पूजा पीपल के पेड़ में की जाती है। इसीलिए शनि और पितृदेव की पूजा भी पीपल के पेड़ के नीचें की जाती है। शनि अमावस्या के दिन शाम के समय सात दीपक, कालें तिल, सरसों का तेल, लोहें की कील रखकर पीपल के पेड़ के नीचें जलाएं। इसके बाद ऊं शं शनैश्चराय नम: मंत्र का उच्चारण करे।

अगर आपकी कुंडली में शनि का दोष, साढ़े साती, या शनि ढैय्या है, तो शनिवार के दिन एक स्टील या लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भर अस पीपल के हेड़ के नीचें रखकर अपनी चेहरा उसमें देखें और उसे पेड़ की जड़ के नीचे दबा दे। इससे आपका शनि ठीक हो जाएगा और आपको विशेष लाभ भी मिलेगा।

पितृ दोष वालें व्यक्ति ये करें उपाय

जिस व्यक्ति के पितृ दोष लगे है वो आज पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाए और एक कास्य के पात्र में दूध, गंगा जल. कालें तिल लें कर पीपल की सात परिक्रमा करतें हुए ऊं ब्रह्म देवाय नम: का जाप करते रहें। परिक्रमा पूरी होनें के बाद पीपड़ में एस जनेऊ चढ़ाए। इस दिन प्रसाद में काली या सफेद चीज चढ़ाएं और प्रार्थना करें कि हे ब्रह्म देव, हे शनिदेव, हे पितृ देव हमसें कोई भूल हो गई हो तो माफ करिएगा। हम पर प्रसन्न हो जाइए और हमें आर्शीवाद दीजिए। इसके बाद इस श्लोक का ध्यान करें।

कोणस्य: पिंगलों व्रभ्रु: कृष्णों रौद्रान्तकरे यम:।
सौरि: श्नेश्चरों मन्द पिप्पलादेल संस्तुत:।।
एताति दशं नाभानि प्रातरूक्थाय य पठोत्।
शनैश्चरे कृता पीडा न मदाचिद् भविष्यति।।

इन दस नामों का सुबह के समय स्मरण करनें से कभी आपको शनि ग्रह का कष्ट नहीं सताएगा।

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