Shani Jayanti 2026, Shani Aarti Lyrics: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है। आज शनिश्चरी अमावस्या के साथ शनि जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन शनिदेव की पूजा करने के साथ-साथ व्रत रखने से विशेष फलों की प्राप्ति हो सकती है। इसके अलावा कुंडली में मौजूद शनि साढ़े साती, ढैया का दुष्प्रभाव भी काफी कम हो जाता है। शनि जन्मोत्सव पर कर्मफल दाता शनि की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ इस आरती को अवश्य पढ़ सकते हैं। इससे शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। आइए जानते हैं शनिदेव की आरती जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी के संपूर्ण लिरिक्स के साथ लाभ…
शुभ योग में वट सावित्री व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती
शनिदेव आरती लिरिक्स (Shani Dev Aarti Lyrics)
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।।
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।।
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।।
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।।
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी
शनिदेव की आरती करने के लाभ
- शनिदेव की आरती करने से शनिदेव अति प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा कुंडली में शनि साढ़ेसाती, ढैय्या और शनिदेष के दुष्प्रबाव कम हो सकते हैं।
- शनिदेव की आरती नियमित रूप से करने से जीवन में लंबे समय से चली आ रही समस्याएं, बाधाएं समाप्त हो सकती है।
- नौकरी, व्यापार में लाभ मिलने के साथ आर्थिक स्थिति अच्छी हो सकती है।
- न्याय से संबंधित मामलों में सफलता मिलने के साथ शत्रुओं पर विजय मिल सकती है।
- भय, नकारात्मकता ऊर्जा से मुक्ति मिल सकती है।
- परिवार में सुख-शांति बनी रह सकती है।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती करने से केवल ग्रह ही शांत नहीं होगा बल्कि व्यक्ति के अंदर धैर्य, विनम्रता और कर्म के प्रति जागरूकता भी बढ़ सकती है।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
