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आत्म समीक्षा से जीवन का परिष्कार

आत्म समीक्षा अर्थात स्वयं का आकलन और मूल्यांकन करना।

आत्म समीक्षा से जीवन का परिष्कार
गौतम बुद्ध।

नरपतदान चारण

आत्म समीक्षा के द्वारा हमें अपनी गलतियों से सीखने और अच्छे किए गए कार्य को और बेहतर ढंग से करने का मौका मिलता है। महात्मा बुद्ध ने कहा है कि व्यक्ति को जितना कोई बाहरी सिखा सकता है, उससे कहीं अधिक वह अपने आत्म अवलोकन या आत्म समीक्षा से सीख सकता है। आत्म समीक्षा के द्वारा सीखने की प्रक्रिया ऐसी होती है कि हम उसमें शांत भाव से बैठ कर किसी समस्या या बिंदु के बारे में चिंतन कर सकते हैं।

शांति से चिंतन करने पर हमें समस्त गुण-दोष समझ में आ जाते हैं। आत्म समीक्षा के तीन लाभ है झ्रआत्म सुधार, आत्म निर्माण, आत्म विकास। यानी दुष्प्रवृत्तियों को छोड़ने के लिए, कुसंस्कारों को नष्ट करने के लिए और अपनी कमियों, दोषों को दूर करने के लिये आत्म समीक्षा को अपनाना पड़ता है। यह व्यक्ति को आत्म बोध कराने के साथझ्रसाथ उसका संकल्प बल जाग्रत करता है।

हमारे जीवन के अधिकांश मूल्यांकन दूसरों से करवाएं जाते हैं। जैसे परीक्षा आप देते हैं, लेकिन आपकी उत्तर पुस्तिका कोई और जांचता है। लेकिन जब बात अपने जीवन के उद्देश्य की आती है, तो हमें अपना सम्यक मूल्यांकन स्वयं करना चाहिए। आत्म समीक्षा यानी अपना मूल्यांकन करने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि हमें हमसे बेहतर कोई और नहीं जानता। बिना आत्म समीक्षा के आत्म परिष्कार नहीं और आत्म परिष्कार के बिना किसी भी साधना की सफलता संदिग्ध है।

इसलिए आत्म समीक्षा आध्यात्मिक जीवन का प्रथम चरण है। अक्सर आपने जीवन में अनुभव किया होगा कि श्रेष्ठ और अच्छे कार्य आत्म प्रसन्नता दायक और अनुकूल होते हैं। इसके विपरीत निंदा के कार्य अर्थात बुरे कार्य हमेशा आत्म आघात प्रदायक और प्रतिकूल होते हैं। तो आत्म समीक्षा इन्ही कार्यों और गुणों का मूल्यांकन करने का साधन है कि क्या आत्मा के अनुकूल है और क्या प्रतिकूल ?जब जीवन के अनुकूल और विपरीत कार्यों का आत्म अनुभव हो जाता है तब जीवन का उद्देश्य और लक्ष्य निर्धारित हो जाता है। हमारा मन मस्तिष्क सत्य का साक्षात्कार करता है।

अब इस आत्म समीक्षा को कैसे अमल में लाया जाए ? यह जिज्ञासा तो होना स्वाभाविक है। तो आत्म समीक्षा करने का सहज सरल तरीका यही है कि जब आप सुबह उठते हैं तो यह भावना प्रकट करें कि आपको अनमोल मनुष्य जीवन मिला, इसके लिए ईश्वर का धन्यवाद करें। यह एक दिन आपके लिए एक जीवन के समान है। इसलिए अपने दिनभर के कार्यों की रूपरेखा सुबह ही तैयार कर लें और यथासंभव दिनभर उसी के अनुसार चलने की कोशिश करें।

साथ ही यह भी निश्चय करें कि ईश्वर के दिए गए इस दिन रूपी जीवन का अच्छे से अच्छा उपयोग करेंगे। जब रात्रि को सोने जाएं तो अपने दिनभर के कार्यों का मूल्यांकन करें। जो अच्छे कार्य किए हैं, उनके लिए आत्म प्रशंसा करें। ईश्वर को धन्यवाद दें। जो गलत कार्य हुए हैं, उनके लिए ईश्वर से क्षमा याचना करें और अगले दिन नहीं दोहराने का निश्चय करें।

हर दिन कुछ समय एकांत में ध्यान मुद्रा में बैठकर आत्म समीक्षा के लिए चिंतन मनन करते अपने आप से कुछ सवाल पूछे और स्वयं ही जवाब जानने का प्रयास करें कि आपके जीवन का उद्देश्य क्या है? ईश्वर ने हमें क्यों बनाया है? अपने कर्म से किसी को क्षति तो नहीं पहुंची? क्या अपने दैनिक कार्यों से आत्मिक रूप से सुख मिल रहा हैं? आदि। ऐसे सवालों और जवाबों से हमारी आत्मिक चेतना जागृत होगी और हम सत्य, ईमान और ईश्वर के रास्ते की ओर अग्रसर होने लगेंगे। इस प्रकार आत्म समीक्षा के द्वारा हमारी समझने की भावनात्मक क्षमता और विश्लेषण करने की बौद्धिक क्षमता दोनों का विकास होता है। यही आत्म समीक्षा का लाभ है।

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First published on: 26-09-2022 at 05:04:25 am
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