Sawan Som Pradosh Date 2026: सावन मास का सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना, व्रत और जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि सावन सोम प्रदोष व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
साथ ही सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए इस पावन अवसर पर शुभ मुहूर्त में पूजा कर शिव कृपा प्राप्त करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस साल सावन में प्रदोष व्रत आज 10 अगस्त को रखा जाएगा। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त…
11 या 12 अगस्त कब है सावन शिवरात्रि, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और पूजा- विधि
सावन का पहला प्रदोष व्रत 2026 तारीख
फ्यूचर पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त को सुबह में 08:00 ए एम से शुरू होगी। साथ ही इस तिथि का समापन 11 अगस्त को प्रात: 04 बजकर 55 मिनट पर होगा। ऐसे में सावन का पहला प्रदोष व्रत या सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त को है। इसके बाद सावन शिवरात्रि है।
सोम प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त
सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 07 बजकर 05 मिनट से है और यह रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस समय में पूजा करना शुभ फलदायी होता है। वहीं सोम प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:23 ए एम से 05:06 ए एम तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:00 पी एम से लेकर दोपहर 12:53 पी एम तक है।
सावन प्रदोष व्रत पूजा- विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
पूरे दिन उपवास रखें। फलाहार या केवल जल ग्रहण कर सकते हैं।
प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।
पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और चौकी पर शिव-पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें।
शिवलिंग का गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
इसके बाद पुनः स्वच्छ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें।
भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत और मौली अर्पित करें।
धूप, दीप प्रज्वलित करें और नैवेद्य में फल, मिष्ठान तथा पंचामृत अर्पित करें।
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
शिव चालीसा, रुद्राष्टक, शिव तांडव स्तोत्र या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
पूजा के अंत में अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें और सभी से सुख-समृद्धि की कामना करें।
अगले दिन सुबह दान-दक्षिणा देकर या सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें।
भगवान शिव के मंत्र
ॐ नमः शिवाय॥
(भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली पंचाक्षरी मंत्र)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
(महामृत्युंजय मंत्र)
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
(शिव गायत्री मंत्र)
ॐ हौं जूं सः॥
(भगवान शिव का बीज मंत्र)
भगवान शिव की आरती
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥
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