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Coronavirus संकट के समय पंडित न मिलने पर घर पर कैसे करें पूजन, जानिए

Sawan 2020: सावन का महीना चल रहा है। इन दिनों भगवान शिव की पूजा की जाती है। सावन शिवरात्रि (Sawan Shivratri 2020) इस बार 19 जुलाई को मनाई जाएगी। कोरोना महामारी के इस दौर में आप घर बैठे कैसे कर सकते हैं शिव पूजन, जानिए पूरी विधि विस्तार से यहां...

sawan 2020, sawan shivratri 2020, sawan puja vidhi, shivling puja vidhi, shiv puja vidhi, lord shiva puja vidhi,सावन का महीना 3 अगस्त को खत्म होगा।

Sawan Shiv Puja Vidhi: सावन के महीने में कई लोग अपने घर में या फिर मंदिर में जाकर पंडित से विशेष पूजा अर्चना कराते हैं। लेकिन कोरोना महामारी के इस दौर में अगर पंडित नहीं मिल पा रहे हैं या फिर किसी कारण आप घर पर ही खुद विशेष अर्चना करना चाहते हैं तो इसकी विधि यहां हम आपको बताएंगे। जिससे आप बिना किसी की सहायता के शिव पूजन बड़े ही सरलता के साथ कर सकते हैं।

शिव पूजन सामग्री: देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, दूध, अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, चावल, अष्टगंध, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, चंदन, धतूरा, आक के फूल, बिल्वपत्र जनेऊ, फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद व शक्कर), सूखे मेवे, पान, दक्षिणा में से जो भी हो।

शिव पूजा विधि: शिव पूजन के लिए स्नान आदि कार्यों से निवृत्त होकर साफ सुथरे वस्त्र धारण कर लें और पूजन आसन पर पूर्व या फिर उत्तर दिशा की तरफ मुख करके बैठ जाएं। पूजन की सभी सामग्री पहले से ही अपने पास रख लें। ताकि बार-बार आपको उठना न पड़े। अपने पास एक साफ मिट्टी भी रख लें। भगवान शिव का ध्यान करें। पवित्री धारण कर आचमन, प्राणायाम करें। ॐ केशवाय नम:। ॐ नारायणाय नम:। ॐ माधवाय नम: मंत्र का तीन बार जाप करें। आचमन के पश्चात दाहिने हाथ के अंगूठे के मूल भाग से ॐ ऋषिकेशाय नम:, ॐ गोविन्दाय नम: कहकर होठों को पोंछ लें और फिर अपने हाथ धो लें। इसके बाद बाएं हाथ से जल लेकर दाहिने हाथ से अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर जल छिड़क लें और ऐसा करते हुए ये बोलें…

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां- गतोऽपि वा।
– य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि:।।
ॐ पुण्डरीकाक्षं पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्षं पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्षं पुनातु,
हाथ में अक्षत एवं पुष्प लेकर गण‍पति स्मरण करें।
– गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्यजम्बूफलं चारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्।।

इसके बाद भगवती गौरी का ध्यान करें-
– नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:
नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्मताम्।।
श्री गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, ध्यानं समर्पयामि।

दाहिने हाथ में अर्घ्य पात्र लेकर उसमें कुश, पुष्प, अक्षत, जल और द्रव्य रखकर संकल्प करें –

– ॐ विष्णुर्विष्णु: अध ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे
श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे-

सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें।

इसके बाद भूमि की प्रार्थना करें –

ॐ ह्राँ पृथ्विये नम:।

– मिट्टी ग्रहण- उद्धल्तासि वराहेण कृष्णेन शतबाहुना।
मृत्तिके त्वां गृह्रामि प्रजया च धनेन च।।

या- ॐ हराय नम: बोलकर मिट्टी धारण करें।

मिट्टी के लिंग बनाकर या शिवलिंग को घर में रखकर पूजन करें।

* ॐ शूलपाणये नम:, हे शिव इह प्रतिष्ठितो भव:, यह कहकर लिंग की प्रतिष्ठा करें।

फिर शिवजी का ध्यान करें।

ध्यान- ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुभृगबराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पधासीनं समन्तात स्तुतममरगणैर्व्याध्रकृत्तिं वसानं
विश्वाधं विश्ववीजं निखिलभयहरं पववत्रंत्रिनेत्रम्
आवाहन- ॐ पिनाकघृषे नम: श्री साम्बसदाशिव पार्थिवेश्वर इहागच्छ, इह प्रतिष्ठ, भव।

पुष्पांजलि अर्पित करें: श्री भगवते साम्बसदाशिव (पार्थिवेश्वराय) नम: आवाहनार्थे पुष्पं समर्पयामि। यह बोलते हुए पुष्प चढ़ाएं।

पाध- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, आसनार्थे अक्षतान समर्पयामि, ये बोलते हुए चावल चढ़ाएं।

अर्घ्य- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, आचमनीय जलं समर्पयामि। बोलते हुए जल चढ़ाएं।

मधुपर्क- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, मधुपर्क समर्पयामि। अब शहद निवेदित करें।

शुद्धोदक स्नान- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, स्नानीयं जलं समर्पयामि। ऐसा बोलते हुए जल चढ़ाएं।

पंचामृत स्नान- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, पंचामृत स्नान समर्पयामि। बोलते हुए पंचामृत चढ़ाएं।

शुद्धोदक स्नान- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, शुद्धोदक स्नान समर्पयामि। इस मंत्र का उच्चारण करते हुए शुद्ध जल चढ़ाएं।

आचमन- शुद्धोदक स्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि बोलते हुए जल चढ़ाएं।

अभिषेक- पार्थिव लिंग पर महिम्न स्तोत्र या वैदिक रुद्र सूक्त से या घर पर कर रहे हों तो नम: शिवाय की माला से अभिषेक करें।

गन्धोदक स्नान (गन्धोदक से स्नान कराएं)- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, गन्धोदक स्नान समर्पयामि।

शुद्ध स्नान (शुद्ध जल से स्नान एवं आचमन कराएं) –

गन्धोदकस्नानान्ते शुद्धस्नानं समर्पयामि।
शुद्धोदक स्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि।

वस्त्र (वस्त्र चढ़ाएं)- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, वस्त्रं समर्पयामि।

आचमन (जल चढ़ाएं)- वस्‍त्रांन्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि।

यज्ञोपवीत (जनेऊ चढ़ाएं)- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, यज्ञोपवीत समर्पयामि।

फिर एक अंचूनी (आचमनी) जल चढ़ाएं।

चन्दन चढ़ाएं- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, चन्दन समर्पयामि।

भस्म चढ़ाएं- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, भस्म समर्पयामि।

अक्षत अर्पित करें- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, अक्षतान समर्पयामि।

पुष्पमाला चढ़ाएं- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, पुष्पमालां समर्पयामि।

बिल्वपत्र चढ़ाएं- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, बिल्वपत्राणि समर्पयामि।

दूर्वा एवं धतूरे का फूल चढ़ाएं।

फिर धूप, धूप के बाद दीपक भगवान को दिखाएं, यह कहकर –

ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, धूप-माघ्रापयामि, दीपं दर्शयामि।

उसके बाद नैवेद्य लगाएं- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, नैवेद्यं समर्पयामि (निवेदयामि)। आचमनीयं जलं समर्पयामि। फिर ऋतुफलं समर्पयामि। फिर ऋतुफलं चढ़ाएं।

फिर- ताम्बुल फलं हिरण्यगर्भ दक्षिणां समर्पयामि।

इसके बाद शिवजी की आरती करें। आरती करके जल गिराएं।

फिर मंत्र पुष्पांजलि- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, मंत्र पुष्पांजलि समर्पयामि। (फूल चढ़ा दें)

इसके बाद प्रदक्षिणा करें, प्रदक्षिणा के बाद क्षमा-प्रार्थना करें।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां नैव हि जानामि क्षमस्त परमेश्वर।।
फिर विसर्जन, विसर्जन के बाद समर्पण जल छोड़ें।

अनेन शिवपूजकर्मणा श्री यज्ञस्वरूप: शिव: प्रीयताम् न मम कहकर पूजन समाप्त करें।

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