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सावन के आखिरी सोमवार बन रहे हैं, मनोकामना पूर्ति के योग, जानिए कैसे करें पूजा

Sawan Last Somwar: कहा जाता है कि सावन में शिव चालीसा का पाठ करने से समस्त बाधाएं दूर होती हैं। सावन में चीनी से शिवलिंग का अभिषेक करने से सुख और वैभव की प्राप्ति होती है

Sawan somvar 2020, sawan fifth somwar, last sawan somwar, sawan somwar vrat vidhi, sawan somwar pooja vidhiधतूरा, बेलपत्र और सफेद फूल भगवान शिव को चढ़ाएं। धूप, दीप और चंदन की लकड़ी की अगरबत्ती से भगवान का पूजन करें

Sawan Somwar: सावन का आखिरी सोमवार 3 अगस्त को है। इस दिन पूर्णिमा तिथि भी है। सावन के सोमवार और पूर्णिमा एक ही दिन होने से इस बार सौम्या तिथि बन रही है। भगवान शिव की पूजा के लिए इसे बहुत अच्छा संयोग माना जाता है। इस साल रक्षाबंधन भी सावन के आखिरी सोमवार के दिन ही है। इस वजह से इस दिन को बहुत शुभ फल देने वाला माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस दिन भगवान शिव की आराधना काफी अधिक फलदायी साबित होगी। क्योकि इस दिन सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग लग रहा है। यह योग दोपहर 12 बजे से अगले दिन सुबह 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव की आराधना सभी मनोकामनाओं को सिद्ध करती है। सभी सिद्धियों को पूरा करने के लिए भगवान शिव की पूजा कैसे करें यह जानिए इस खास रिपोर्ट में –

क्या है सर्वार्थ सिद्धि योग: ज्योतिषशास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को बेहद शुभदायक माना जाता है। यह योग दिन और नक्षत्र के मिलन होने पर बनता है। सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग अनुराधा, पुष्य, रोहिणी, मृगशिरा अथवा श्रवण नक्षत्र के आगमन पर बनता है। बता दें कि 3 तारीख को सर्वार्थ सिद्धि योग श्रवण नक्षत्र के अंतर्गत बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग किसी भी नए तरह का करार करने का सबसे अच्छा समय होता है। इस योग के प्रभाव से नौकरी, परीक्षा, चुनाव, खरीदी-बिक्री से जुड़े कार्यों में कामयाबी मिलती है।

कैसे करें पूजा: आमतौर पर भगवान शिव के पूजन के लिए ब्रह्ममुहुर्त को सबसे अच्छा माना जाता है। लेकिन सर्वार्थ सिद्धि योग 12 बजे से लगेगा इसलिए आराधना तब से ही शुरू करनी चाहिए। शुरुआत भगवान शिव के जलाभिषेक से करें। दही, दूध, गंगाजल, शहद और पानी शिवलिंग पर अर्पित करें। भगवान शिव को चंदन बहुत प्रिय है। चंदन से शिवलिंग पर त्रिपुंड तिलक लगाएं। धतूरा, बेलपत्र और सफेद फूल भगवान शिव को चढ़ाएं। धूप, दीप और चंदन की लकड़ी की अगरबत्ती से भगवान का पूजन करें। इसके बाद शिव स्तुति, शिव चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।

इन मंत्रों के जाप से होगा फायदा: पूजन में भगवान के नाम जाप का महत्व बहुत अधिक होता है। इसलिए यह जरुरी है कि भगवान शिव का नाम जाप करें या ‘ॐ नम: शिवाय’ या रुद्र गायत्री मंत्र – ‘ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र प्रचोदयात्।।’ का जप करें। इसके बाद भगवान की शिव की आरती करें। आरती के बाद भगवान को कोई सफेद मिठाई या फल का भोग लगाएं।

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