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Sathya Sai Baba: जानिए कौन थे श्री सत्य साईं बाबा, जिन्हें शिरडी साईं बाबा का माना जाता है अवतार

Sathya Sai Baba: इनका जन्म आन्ध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी गांव में 23 नवम्बर 1926 को हुआ था। श्री सत्य साईं बाबा के 94 जन्मदिवस पर साईं सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

Author नई दिल्ली | Updated: November 21, 2019 9:51 AM
सत्य साईं बाबा में आस्था रखने वाले लोग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मौजूद हैं।

Sathya Sai Baba Birthday 2019: श्री सत्य साईं बाबा एक ऐसा नाम जिनका पूरा जीवन रहस्यों से घिरा रहा। इन्होंने अपने जीवन काल में कई ऐसे चमत्कार किये जिससे लोग इन्हें अपना गुरु मानने लगे। इनका जन्म आन्ध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी गांव में 23 नवम्बर 1926 को हुआ था। श्री सत्य साईं बाबा के 94 जन्मदिवस पर साईं सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। सत्य साईं बाबा में आस्था रखने वाले लोग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मौजूद हैं। आज विश्व के 148 देशों में सत्य साईं केंद्र स्थापित हैं।

भारत में कई साईं संगठन हैं। जहाँ साईं भक्त श्री सत्य साईं बाबा के आध्यात्मिक नियमों का पालन करते हुए बाबा के आध्यात्मिक संदेशों का प्रसार कर रहे हैं। इनके अनुयायी इन्हें शिरडी के साईं बाबा का अवतार मानते हैं। सत्य साईं बाबा हमेशा अपने प्रवचनों के माध्यम से कहते रहे कि ‘मैं देह स्वरूप नहीं हूं, मैं आत्मा स्वरूप हूं, मुझे देह मानने की भूल न करो।’ उन्होंने इस बात की भी भविष्यवाणी कर दी थी कि उनके अगले अवतार प्रेमा साईं का जन्म 2024 में होगा।

सत्य साईं बाबा के ‘चमत्कार’: सत्य साईं बाबा के भक्त उन्हें चमत्कारिक पुरुष मानते थे। उनके कई ‘चमत्कार’ चर्चा में भी रहे हैं। हालांकि कुछ लोग इनके चमत्कारों को हाथ की सफाई मानते थे। इनके हवा से भभूति बरसाना, हाथों में सोने की चेन या अंगूठी का अचानक आ जाना, शिवरात्रि पर सोने का शिवलिंग अपने मुंह से निकालना आदि चमत्कार ऐसे थे जिनसे इनके भक्तों के मन में इनके प्रति श्रद्धा-विश्वास और गहराता चला गया। कहा जाता है कि सत्य साईं बाबा के जन्म के समय भी चमत्कार हुआ था जब घर में रखे वाद्ययंत्र अचानक से बजने लगे थे।

सत्य साईं बाबा से जुड़ी कहानियां: कहा जाता है बचपन में उन्हें एक बार एक बिच्छू ने काट लिया था जिससे वे कोमा में चले गए थे। जब उन्हें होश आया तब उनका आचरण बदल गया। उन्होंने खाना-पीना त्यागकर श्लोक और मंत्रों का उच्चारण करना शुरु कर दिया था। इसी तरह एक कहानी इनके स्कूल के समय से भी जुड़ी है। कहा जाता है कि एक दिन उनके टीचर ने उन्हें बिना किसी कारण बेंच पर खड़ा कर दिया था। वह टीचर की बात मानकर चुपचाप घंटों बेंच पर खड़े भी रहे और जब क्लास खत्म हुई तब उनके टीचर जैसे ही अपनी कुर्सी से उठने लगे तो वह नहीं खड़े हो पाए। माना जाता है कि ऐसा सत्य साईं बाबा के ‘चमत्कार’ के कारण हुआ।

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