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Saturn Transit Effects: आन्दोलन और मंदी का साक्षी रहा है शनि का गोचर 

Shani Gochar Effects: आज के हालात 30 साल पहले की याद दिलाते हैं जब वी पी सिंह के राज में पूरे देश में मंडल कमीशन के कारण छात्र आंदोलन बारूद की तरह भभक उठा था। उस समय भी आज की मानिंद शनि धनु राशि के अंतिम पायदान पर थे।

पिछली बार धनु के शनि में सिर्फ मंडल कमीशन की ही नहीं, राम मन्दिर की भी तपिश देश की जनता को स्पष्ट महसूस हुई थी।

नागरिक संशोधन बिल के खिलाफ देश में अचानक ही बवाल शुरू हो गया है। पर सितारों की चाल की पड़ताल में यह स्थिति नई नहीं है। आज के हालात 30 साल पहले की याद दिलाते हैं जब वी पी सिंह के राज में पूरे देश में मंडल कमीशन के कारण छात्र आंदोलन बारूद की तरह भभक उठा था। उस समय भी आज की मानिंद शनि धनु राशि के अंतिम पायदान पर थे।  इतिहास साक्षी है कि जहां धनु राशि के उत्तरार्ध का शनि आंदोलन, विरोध, हिंसा और आगज़नी के लिए जाना जाता है। वहीं धनु के बाद मकर का शनि अर्थव्यवस्था में मंदी का गवाह रहा है।

पिछली बार धनु के शनि में सिर्फ़ मंडल कमीशन की ही नहीं, राम मन्दिर की भी तपिश देश की जनता को स्पष्ट महसूस हुई थी। और तब राम मंदिर आंदोलन और बाबरी मस्जिद के विध्वंस के पहले कई लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी। बेहद रोचक तथ्य है कि तब धनु के शनि में राम मंदिर आंदोलन परवान चढ़ा और अब 2019 में धनु के ही शनि में सुप्रीम कोर्ट  ने मंदिर बनाने का फ़रमान भी सुनाया है।

पिछली बार जब अर्थव्यवस्था की गति मंद हुई थी और चन्द्रशेखर सरकार को सोना गिरवी रखना पड़ा था तब शनि गोचर में मकर राशि में थे। इतिहास के चश्मे को साफ़ करके देखें तो 10 नवम्बर 1990 को जब चन्द्रशेखर भारत के प्रधानमंत्री बने थे, शनि धनु राशि में था। 15 दिसंबर 1990 को अलस्सुबह 3 बजकर 4 मिनट पर शनि का गोचर मकर में हुआ और बस इसी गोचर ने तब भारतीय अर्थव्यवस्था की चूलें हिला कर रख दी थीं। और एक वक़्त ऐसा आया था कि भारत में विदेशी मुद्रा का भंडार गिर कर सिर्फ़ 1.1 अरब डॉलर रह गया।

कहते हैं कि वो तब के तीन हफ़्ते के आयात के लिए भी  पूरा नहीं था। इस स्थिति का सामना करने के लिए तब की भारत सरकार को 47 टन सोना गिरवी रखना पड़ा था। इसके भी तीस साल पहले 1959-60 में पुलिस फ़ायरिंग में 105 लोगों की आहुति के पश्चात 1 मई 1960 को जब बॉम्बे प्रान्त के विभाजन के पश्चात महाराष्ट्र और गुजरात दो प्रदेश अस्तित्व में आए थे तब भी शनि धनु राशि में थे। 2 फरवरी 1961 रात्रि 1.52 पर शनि का मकर में गोचर हुआ था। मकर के शनि में ही 20 अक्टूबर 1962 को चीन ने भारत पर आक्रमण किया जिसका बेहद नकारात्मक असर तब की भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा था। 28 फरवरी 1963 को जब राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का निधन हुआ था, तब शनि मकर राशि में चलायमान था।

अब एक बार पुनः शनिदेव मकर राशि की तरफ अग्रसर हैं। 24 जनवरी 2020 की दोपहर 12 बजकर 4 मिनट पर जब शनि अपनी ही राशि मकर में जायेंगे, तब क्या इतिहास को पुनः दोहरायेंगे, ये देखने की बात होगी।

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