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Saraswati Puja Mantra, Muhurat and Aarti: सरस्वती पूजा के लिए ये है शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती

Saraswati Puja Mantra, Muhurat and Aarti: शास्त्रों में वर्णित एक अन्य कथा के अनुसार इस दिन माता सरस्वती ने संसार में सभी को वाणी का दान दिया था। जिससे खुश होकर भगवान कृष्ण ने मां सरस्वती को आशीर्वाद दिया था कि माघ माह की शुक्ल पक्ष पंचमी के दिन सरस्वती पूजा का विशेष विधान होगा।

माता सरस्वती।

Saraswati Puja Mantra, Muhurat and Aarti: सरस्वती पूजा का त्योहार हर साल माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल भी देशभर में सरस्वती पूजा 10 फरवरी 2019 को मनाई जाएगी। सरस्वती पूजा के बारे में मान्यता है कि इस दिन ज्ञान-विज्ञान, संगीत, कला और बुद्धि की देवी माता सरस्वती का जन्म हुआ था। इसलिए बसंत पंचमी के दिन विशेष तौर पर देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। शास्त्रों में वर्णित एक अन्य कथा के अनुसार इस दिन माता सरस्वती ने संसार में सभी को वाणी का दान दिया था। जिससे खुश होकर भगवान कृष्ण ने मां सरस्वती को आशीर्वाद दिया था कि माघ माह की शुक्ल पक्ष पंचमी के दिन सरस्वती पूजा का विशेष विधान होगा। साथ ही इस दिन पूजा करने वाले भक्त को आप बुद्धि और विद्या का वरदान देंगी।

सरस्वती पूजा शुभ मुहूर्त: बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त 9 फरवरी को आधी रात यानि 12 बजकर 25 मिनट से शुरू हो जाएगा। जो 10 फरवरी को दोपहर 2 बजकर आठ मिनट तक रहेगा। साथ ही 10 फरवरी को सरस्वती पूजा के लिए संकल्प का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। यानि संकल्प के लिए कुल नौ मिनट का समय रहेगा।

सरस्वती पूजा मंत्र
1. सरस्वती नमस्तुभ्यं वर्दे कामरूपिणी
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा।

2.या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥

3.शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥1॥
हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।
वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥

4. ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः। यह मां सरस्वती का बीज मंत्र है। पूरा सरस्वती मंत्र है: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।

5. श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा। ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।

आरती
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
जय सरस्वती माता॥
चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
जय सरस्वती माता॥
बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥
जय सरस्वती माता॥
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥
जय सरस्वती माता॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥
जय सरस्वती माता॥
धूप दीप फल मेवा, मां स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥
जय सरस्वती माता॥
मां सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारी ज्ञान भक्ति पावे॥
जय सरस्वती माता॥
जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
जय सरस्वती माता॥

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