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Saraswati Puja (Basant Panchami) 2020 Puja Vidhi, Muhurat, Timings, Mantra: ब्रह्मा जी ने की थी सरस्वती की रचना, जानिए क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि

Saraswati Puja (Basant Panchami) 2020 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra: मां सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी माना गया है। संगीत की इनसे उत्पत्ति होने के कारण इन्हें संगीत की देवी के रूप में भी पूजा जाता है।

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Saraswati Puja (Basant Panchami) 2020 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra: सरस्वती पूजा माघ शुक्ल पंचमी तिथि को मनाई जाती है। मां सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी माना गया है। संगीत की इनसे उत्पत्ति होने के कारण इन्हें संगीत की देवी के रूप में भी पूजा जाता है। बसंत पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाता है। ऋग्वेद में देवी सरस्वती के स्वरूप का वर्णन करते हुआ कहा गया है कि ये परम चेतना हैं। देवी सरस्वती के रूप में ये मनुष्य की बुद्धि, ज्ञान और चेतना का विकास करती हैं। इस बार सरस्वती पूजा 29 जनवरी को मनाई जाएगी।

Saraswati Puja (Basant Panchami) 2020 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Timings, Samagri, Mantra:

सरस्वती पूजा शुभ मुहूर्त: इस बार सरस्वती पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 29 जनवरी को सुबह 10 बजकर 47 मिनट से शुरू हो रहा है। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 12 बजकर 34 मिनट तक है। यानि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 1 घंटे 46 मिनट हैं।

विधि: मां सरस्वती की पूजा करने के लिए सबसे पहले सरस्वती की चित्र या प्रतिमा की विधिवत स्थापना करें। इसके बाद कलश की स्थापना कर गणेश जी का आवाहन कर विधिवत पूजा करें। सरस्वती पूजा के समय सबसे पहले देवी को आचमन और स्नान करवाएं। फिर देवी सरस्वती को पीले या सफेद रंग का फूल अर्पित करें। इसके बाद मौसमी फल सहित पीले रंग के बूंदी चढ़ाएं। संभव हो तो मालपुए और खीर का भी भोग लगाएं। सरस्वती-पूजन के समय पुस्तकें या वाद्य यंत्र की भी पूजा करें। अंत में हवन कर पूजा का समापन करें।

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Highlights

    00:06 (IST)30 Jan 2020
    वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा से होते हैं ये लाभ

    इस दिन पूजा के समय सरस्वती वंदना, सरस्वती मंत्र और सरस्वती माता की आरती करनी जरूरी है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करके माता की आराधना की जाती है। पूजा के समय सरस्वती वंदना, मंत्र और आरती करने से उसका विशेष फल प्राप्त होता है। माता सरस्वती के आशीर्वाद से व्यक्ति को कला और शिक्षा के क्षेत्र में अपार सफलताएं प्राप्त होती हैं।

    23:11 (IST)29 Jan 2020
    बसंत पंचमी पर ग्रह मजबूत करने के उपाय

    1. बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण करें

    2. सफेद फूलों से मां की उपासना करना लाभदायक होता है

    3. पीले पुष्प और पीले फलों से मां की उपासना करें

    4. बृहस्पति के कमजोर होने पर विद्या प्राप्त करने में बाधा आती है

    5. कुंडली में अगर बुध कमजोर हो तो बुद्धि कमजोर हो जाती है

    6. करियर का चुनाव भी नहीं हो पाता है

    7. अगर शुक्र कमजोर हो तो मन की चंचलता भी होती है

    8. मां को हरे फल अर्पित करें तो लाभदायक होगा

    22:16 (IST)29 Jan 2020
    संगीत की उत्पत्ति करने की वदह से कहते हैं संगीत की देवी

    देवी सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और विद्या-बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी मानी गईं हैं।

    21:38 (IST)29 Jan 2020
    मूर्ति विसर्जन की विधि

    पंचमी के दिन मूर्ति स्थापना होती है और षष्ठी के दिन मूर्ति विसर्जन होता है। इस बार वसंत पंचमी का प्रारंभ 29 जनवरी को हो रहा है और माघ शुक्ल षष्ठी दोपहर 01:19 बजे के बाद प्रारंभ हो रही है। ऐसे में आप दोपहर के बाद संध्या काल में विधिपूर्वक मूर्ति का विसर्जन करें।

    21:37 (IST)29 Jan 2020
    वसंत पंचमी पर मूर्ति स्थापना का मुहूर्त

    माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी मनाई जाती है। ऐसे में पंचमी तिथि का प्रारंभ 29 जनवरी बुधवार को दिन में 10:45 बजे से हो रहा है, जो 30 जनवरी गुरुवार को दोपहर 01:19 बजे तक है। ऐसे में आपको मां सरस्वती की मूर्ति की स्थापना बुधवार पंचमी ​तिथि में बुधवार को करें। लेकिन आपको मूर्ति की पूजा गुरुवार को सुबह ही करनी चाहिए क्योंकि उदया काल 30 जनवरी को प्राप्त हो रहा है।

    20:09 (IST)29 Jan 2020
    मूर्ति विसर्जन की विधि

    पंचमी के दिन मूर्ति स्थापना होती है और षष्ठी के दिन मूर्ति विसर्जन होता है। इस बार वसंत पंचमी का प्रारंभ 29 जनवरी को हो रहा है और माघ शुक्ल षष्ठी दोपहर 01:19 बजे के बाद प्रारंभ हो रही है। ऐसे में आप दोपहर के बाद संध्या काल में विधिपूर्वक मूर्ति का विसर्जन करें।

    19:35 (IST)29 Jan 2020
    वसंत पंचमी के दिन हुआ मां सरस्वती का जन्म

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वसंत पंचमी के दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती का जन्म ब्रह्माजी के मुख से हुआ था। वह वाणी की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की पूजा करते हैं।

    19:05 (IST)29 Jan 2020
    जानें किस लिए होती है काम देव और रती की पूजा

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी पर कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। कामदेव और रति को पुराणों में प्रेम के देवी-देवता के तौर पर बताया गया है। कहते हैं कि बसंत पचंमी के दिन कामदेव और रति ऋतुराज बसंत के साथ पृथ्वी पर आते हैं।

    18:23 (IST)29 Jan 2020
    ऋगवेद में ऐसा है बसंत पंचमी का इतिहास

    ऋग्वेद में देवी सरस्वती का उल्लेख एक ऋचा के द्वारा किया गया है। प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। यानि मां सरस्वती परम चेतना है और मां हमारी बुद्धि, प्रज्ञा, मनोवृत्तियों आदि की संरक्षिका हैं। हममें जो चेतना और ज्ञान है उसका आधार मां सरस्वती है इनकी स्वरूप और समृद्धि का वैभव अद्भुत है। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर मां सरस्वती को वरदान दिया था की बसंत पंचमी के दिन आपका प्रादुर्भाव हुआ है। अतः इस दिन समस्त ब्रह्माण्ड में आपकी पूजा की जाएगी। इसलिए भारत में बसंत पंचमी का उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

    17:38 (IST)29 Jan 2020
    जानिए किस लिए बसंत पंचमी पर है पीले रंग का महत्व

    बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व माना गया है। दरअसल पीला रंग इस बात को दर्शाता है कि वसंत ऋतु का आगमन हो गया है। फसलें पकने वाली है। पीले रंग को समृद्धि का सूचक भी कहा गया है। पीला रंग इस बात का भी सूचक है कि वसंत ऋतु के दौरान फूलों में बाहर आ गई है। खेतों में सरसों के पीले फूल चमकने लगे हैं।

    17:10 (IST)29 Jan 2020
    बसंत पंचमी पर इन तीन ग्रहों का बन रहा खास संयोग

    बसंत पंचमी पर इस बार ग्रह-नक्षत्रों का खास संयोग बन रहा है। दरअसल ज्योतिष के जानकार बता रहे हैं कि तीन ग्रह अपनी ही राशि में रहने वाले हैं। मंगल वृश्चिक राशि में, बृहस्पति धनु राशि में और शनि मकर राशि में रहेंगे। ग्रहों का ऐसा संयोग शुभ कार्यों के लिए खास माना गया है।

    16:33 (IST)29 Jan 2020
    लव कुश प्रहलाद बने हम..

    लव-कुश, ध्रुव प्रहलाद बने हम, मानवता का त्राश हरे हम। सीता सावित्री दुर्गा मां फिर घर-घर भर दे…हे हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी, अम्ब विमल मति दे, अम्ब विमल मति दे…

    16:04 (IST)29 Jan 2020
    सरस्वती पूजा से जुड़ी कुछ खास जानकराी

    दरअसल, 30 जनवरी यानी गुरुवार को पंचमी तिथि में सूर्योदय हो रहा है। ऐसे में 30 जनवरी को सरस्वती पूजा मनाना उत्तम होगा। लोक मान्यता के अनुसार, 30 जनवरी को पंचमी तिथि में सूर्योदय हो रहा है, अर्थात उदया तिथि मानकर 30 जनवरी को पूरे दिन सरस्वती पूजा की जा सकती है।

    15:32 (IST)29 Jan 2020
    बसंत पंचमी के दिन प्राणियों में बोलने की क्षमता का विकास हुआ

    बसंत पंचमी के बारे में पौराणिक मान्यता है कि इस दिन ब्रह्मा जी ने सरस्वती की रचना की थी। क्योंकि ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ काल में प्राणियों में स्वर (बोलने की क्षमता) नहीं था। सृष्टि की शांत वातावरण को देखते हुए ब्रह्मा जी के मन में आया कि क्यों न एक ऐसी शक्ति की उत्पत्ति की जाए जिसके द्वारा सृष्टि की सभी प्राणियों में बोलने की क्षमता का विकास हो जाए।

    14:31 (IST)29 Jan 2020
    संगीत की उत्पत्ति करने के कारण हैं संगीत की देवी

    देवी सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और विद्या-बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी मानी गईं हैं।

    13:10 (IST)29 Jan 2020
    देवी सरस्वती चेतना और बुद्धि का करती हैं विकास

    बसंत पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाता है। ऋग्वेद में देवी सरस्वती के स्वरूप का वर्णन करते हुआ कहा गया है कि ये परम चेतना हैं। देवी सरस्वती के रूप में ये मनुष्य की बुद्धि, ज्ञान और चेतना का विकास करती हैं।

    12:05 (IST)29 Jan 2020
    वर दे वीणा वादिनी वर दे...

    वर दे, वीणावादिनि वर दे !प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नवभारत में भर दे !

    11:23 (IST)29 Jan 2020
    लव-कुश, ध्रुव प्रहलाद बने हम...

    लव-कुश, ध्रुव प्रहलाद बने हम, मानवता का त्राश हरे हम। सीता सावित्री दुर्गा मां फिर घर-घर भर दे…हे हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी, अम्ब विमल मति दे, अम्ब विमल मति दे…

    10:58 (IST)29 Jan 2020
    साहस शील ह्रदय में भर दे...

    साहस शील ह्रदय में भर दे, जीवन त्याग तपोमय कर दे,संयम सत्य स्नेह का वर दे, स्वाभिमान भर दे… हे हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी...

    10:52 (IST)29 Jan 2020
    इसलिए बसंत पंचमी पर पीले रंग का है खास महत्व

    बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व माना गया है। दरअसल पीला रंग इस बात को दर्शाता है कि वसंत ऋतु का आगमन हो गया है। फसलें पकने वाली है। पीले रंग को समृद्धि का सूचक भी कहा गया है। पीला रंग इस बात का भी सूचक है कि वसंत ऋतु के दौरान फूलों में बाहर आ गई है। खेतों में सरसों के पीले फूल चमकने लगे हैं।

    10:42 (IST)29 Jan 2020
    इस वंदना से करें देवी सरस्वती की उपासना

    हे हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी, अम्ब विमल मति दे, अम्ब विमल मति दे…जग सिर मौर बनाएं भारत, वह बल विक्रम दे, अम्ब विमल मति दे…

    10:30 (IST)29 Jan 2020
    कामदेव और रति की पूजा के लिए भी आज का दिन खास

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी पर कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। कामदेव और रति को पुराणों में प्रेम के देवी-देवता के तौर पर बताया गया है। कहते हैं कि बसंत पचंमी के दिन कामदेव और रति ऋतुराज बसंत के साथ पृथ्वी पर आते हैं।

    10:24 (IST)29 Jan 2020
    बसंत पंचमी पर बन रहा है ये शुभ संयोग, विद्या आरंभ और शादी के लिए है खास

    इस साल की बसंत पंचमी पर खास योग बन रहे हैं। दरअसल सरस्वती पूजा के दिन सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि जैसे दो योग बन रहे हैं। बसंत पंचमी के दिन बनने वाले इन दोनों योगों को विद्या आरंभ, यज्ञोपवीत संस्कार और विवाह के लिए शुभ माना गया है।

    09:51 (IST)29 Jan 2020
    बसंत पंचमी पर बन रहा है अमलकीर्ति और अनफा योग

    ज्योतिषाचार्य धनंजय पांडेय के मुताबिक बुधवार 29 जनवरी को सुबह 10 बजकर 45 बजे से 30 जनवरी को दोपहर 1 बजकर 29 बजे तक पंचमी तिथि है। सरस्वती पूजा पर बृहस्पतिवार को अमलकीर्ति और अनफा योग बन रहा है।

    09:25 (IST)29 Jan 2020
    इस मंत्र से करें विद्या की देवी की आराधना

    सरस्वती नमस्तुभ्यं, वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि, सिद्धिर्भवतु मे सदा।

    09:23 (IST)29 Jan 2020
    बसंत पंचमी पर तीन ग्रहों का बन रहा है खास संयोग

    बसंत पंचमी पर इस बार ग्रह-नक्षत्रों का खास संयोग बन रहा है। दरअसल ज्योतिष के जानकार बता रहे हैं कि तीन ग्रह अपनी ही राशि में रहने वाले हैं। मंगल वृश्चिक राशि में, बृहस्पति धनु राशि में और शनि मकर राशि में रहेंगे। ग्रहों का ऐसा संयोग शुभ कार्यों के लिए खास माना गया है।

    08:40 (IST)29 Jan 2020
    बसंत पंचमी पर इसलिए होती है कामदेव और रती की पूजा

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी पर कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। कामदेव और रति को पुराणों में प्रेम के देवी-देवता के तौर पर बताया गया है। कहते हैं कि बसंत पचंमी के दिन कामदेव और रति ऋतुराज बसंत के साथ पृथ्वी पर आते हैं।

    08:01 (IST)29 Jan 2020
    सभी छह ऋतुओं में राजा है वसंत

    भारतीय काल गणना के अनुसार साल भर में पड़ने वाली छह ऋतुओं (वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) में वसंत को ऋतुराज यानि सभी ऋतुओं में राजा कहा गया है। साल भर में पड़ने वाली छह ऋतुओं (वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) में वसंत को ऋतुराज यानि सभी ऋतुओं में राजा कहा गया है।

    07:17 (IST)29 Jan 2020
    बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए ये है शुभ मुहूर्त

    इस साल बसंत पंचमी (Basant Panchmi) के मुहूर्त के बारे में मतभेद है। कुछ स्थानों पर 29 जनवरी तो कहीं 30 जनवरी को मनाया जाएगा। कुछ पंडितों का मानना है कि उदय तिथि ही श्रेष्ठ मानी जाती है। पंचमी तिथि 29 जनवरी को यानि आज 10 बजकर 46 मिनट से शुरू हो रही है जो 30 जनवरी (गुरुवार) दोपहर 1 बजकर 20 मिनट तक रहने वाली है।

    07:07 (IST)29 Jan 2020
    बसंत के आगमन के साथ खिल उठता है प्रकृति का कण-कण

    बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही प्रकृति का कण-कण खिल जाता है। पेड़-पौधे पशु पक्षी में भी उल्लास भर जाते हैं। हर दिन नई उमंग से सूर्योदय होता है।

    05:32 (IST)29 Jan 2020
    ऋग्वेद में कुछ ऐसा ही बसंत पंचमी का इतिहास

    ऋग्वेद में देवी सरस्वती का उल्लेख एक ऋचा के द्वारा किया गया है। प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। यानि मां सरस्वती परम चेतना है और मां हमारी बुद्धि, प्रज्ञा, मनोवृत्तियों आदि की संरक्षिका हैं। हममें जो चेतना और ज्ञान है उसका आधार मां सरस्वती है इनकी स्वरूप और समृद्धि का वैभव अद्भुत है। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर मां सरस्वती को वरदान दिया था की बसंत पंचमी के दिन आपका प्रादुर्भाव हुआ है। अतः इस दिन समस्त ब्रह्माण्ड में आपकी पूजा की जाएगी। इसलिए भारत में बसंत पंचमी का उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

    05:00 (IST)29 Jan 2020
    कृष्ण ने खुश होकर सरस्वती को दिया था वरदान

    बसंत पंचमी को विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। पुराणों में वर्णित एक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने देवी सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन तुम्हारी आराधना की जाएगी और तभी उसे मां सरस्वती को इस दिन पूजा जाता है। 

    04:21 (IST)29 Jan 2020
    मां सरस्वती की उपासना कर कालिदास ने पाई थी ख्याति

    भगवती सरस्वती जी उपासना काली के रूप में करके ही कवि कुलगुरु कालिदास ने ख्याति पाई थी। महर्षि वाल्मीकि, व्यास, वशिष्ठ, विश्वामित्र आदि ऋषि भी मां सरस्वती की साधना करके ही पूजनीय और विशेष श्रद्धा के पात्र बने।

    21:57 (IST)28 Jan 2020
    इसलिए 30 जनवरी को सरस्वती पूजा

    हिंदू धर्म में शास्त्रीय मत यह है कि जिस दिन उदय तिथि हो यानी सूर्योदय जिस तिथि में हो पूरे दिन उसी तिथि का मान होता है। दूसरी बात कि पितरों की पूजा मध्य काल में होती है और देवी-देवताओं की प्रथम प्रहर में इसलिए जिस दिन सूर्योदय के समय तिथि का आंरभ हो उसी दिन देवी-देवताओं का पूजन किया जाना चाहिए। शास्त्रों का मत है कि सूर्योदय के समय अगर तिथि कुछ समय के लिए भी लग रही हो तो उसी तिथि का मान होता है और उसी तिथि में पूजन किया जाना चाहिए। इस नियम के अनुसार सरस्वती पूजन गुरुवार 30 जनवरी को किया जाना शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन गुरुवार भी है जिससे यह ज्ञान की देवी सरस्वती के पूजन के लिए सर्वथा उचित तिथि है।

    21:04 (IST)28 Jan 2020
    सरस्वती पूजा का मुहूर्त (Saraswati Puja Muhurat):

    बसंत पञ्चमी सरस्वती पूजा मुहूर्त - 10:45 ए एम से 12:34 पी एमअवधि - 01 घण्टा 49 मिनट्सबसंत पञ्चमी मध्याह्न का क्षण - 12:34 पी एमपञ्चमी तिथि प्रारम्भ - जनवरी 29, 2020 को 10:45 ए एम बजेपञ्चमी तिथि समाप्त - जनवरी 30, 2020 को 01:19 पी एम बजे

    20:17 (IST)28 Jan 2020
    सरस्वती पूजा की पूजा विधि:

    स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।

    20:12 (IST)28 Jan 2020
    बसंत पंचमी का महत्त्व -

    पंचमी बसंत का पौराणिक महत्त्व रामायण काल से जुड़ा हुआ है| जब मां सीता को रावण हर कर लंका ले जाता है तो भगवान श्री राम उन्हें खोजते हुए जिन स्थानों पर गए थे उनमें दंडकारण्य भी था| यहीं शबरी नामक भीलनी रहती थी| जब राम उसकी कुटिया में पधारे, तो वह सुध बुध खो बैठी और प्रेम वश चख चखकर मीठे बेर राम जी को खिलाने लगी| कहते हैं कि गुजरात के डांग जिले में वह स्थान आज भी है जहां शबरी मां का आश्रम था|  बसंत पंचमी के दिन ही रामचंद्र जी वहां पधारे थे| आज भी उस क्षेत्र के वनवासी एक शिला को पूजते हैं, जिसमें उनकी श्रध्दा है कि भगवान श्रीराम आकर यहीं बैठे थे| यहाँ शबरी माता का मंदिर भी है|

    20:12 (IST)28 Jan 2020
    बसंत पंचमी कथा -

    सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे|  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है| विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था| अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया| जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई| जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ| पवन चलने से सरसराहट होने लगी|  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा| सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है।

    20:11 (IST)28 Jan 2020
    पीले वस्त्र धारण करें पूजा:

    बसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठ जाएं और नहा-धोकर पीले वस्त्र धारण करें. इसके बाद बसंत पंचमी की पूजा के लिए पीले रंग के फूल और मालाएं चुनें. पूजाघर की साफ सफाई के बाद पीले रंग का कपड़ा भगवान की चौकी पर बिछाएं इसपर माता सरस्वती की मूर्ति स्थापित करें. पीले रंग के फूल और मालाओं से मां का श्रृंगार करें और बाकी भगवान की मूर्तियों के सम्मुख भी पीले रंग के फूल अर्पित करें. इसके बाद सरस्वती वंदना करते हुए मां की आराधना करें. इसके बाद आंखें बंद कर हाथ जोड़ें और मां से प्रार्थना करें कि वो आपको बुद्धि और विवेक दें ताकि आप जीवन में सफल हों, सही निर्णय कर सकें और गलत और सही में अंतर कर सकें।

    20:11 (IST)28 Jan 2020
    बसंत पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त:

    बसंत पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त ज्योतिष के हिसाब से 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक है. लेकिन बसंत पंचमी अगले दिन यानी कि 30 जनवरी तक रहेगी।

    20:10 (IST)28 Jan 2020
    सरस्वती पूजा से जुड़ी जानकारी...

    दरअसल, 30 जनवरी यानी गुरुवार को पंचमी तिथि में सूर्योदय हो रहा है। ऐसे में 30 जनवरी को सरस्वती पूजा मनाना उत्तम होगा। लोक मान्यता के अनुसार, 30 जनवरी को पंचमी तिथि में सूर्योदय हो रहा है, अर्थात उदया तिथि मानकर 30 जनवरी को पूरे दिन सरस्वती पूजा की जा सकती है।

    20:09 (IST)28 Jan 2020
    अमलकीर्ति और अनफा योग में पूजन:

    ज्योतिषाचार्य पीके युग के मुताबिक बुधवार 29 जनवरी को सुबह 10.45 बजे से 30 जनवरी को दोपहर 1.29 बजे तक पंचमी तिथि है। सरस्वती पूजा पर बृहस्पतिवार को अमलकीर्ति और अनफा योग बन रहा है।

    20:09 (IST)28 Jan 2020
    30 को ही होगी सरस्वती पूजा, पूर्वाह्न पूजन अतिश्रेष्ठ:

    ज्योतिषाचार्य आचार्य मार्कण्डेय शारदेय के मुताबिक गुरुवार 30 जनवरी को सुबह 10.45 बजे तक माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। सूर्योदय से 10.45 बजे तक पूजन का बढ़िया मुहुर्त है। धर्मशास्त्रों में पूर्वाह्न पूजन को अतिश्रेष्ठ बताया गया है। उनके अनुसार वैदेही, महावीर, विश्वविद्यालय, आदित्य, मालवीय, शताब्दी पंचांगों में भी 30 जनवरी को ही सरस्वती पूजन की बात कही गयी है। धर्मशास्त्र के जानकार पं.भवनाथ झा के मुताबिक 30 जनवरी को पंचमी तिथि उदयातिथि में है। उदयातिथि में प्रात:काल में ही देवी पूजन करना चाहिए।

    20:07 (IST)28 Jan 2020
    मां सरस्वती के 12 नाम

    प्रथम भारती नाम, द्वितीय च सरस्वती, तृतीय शारदा देवी, चतुर्थ हंसवाहिनी, पंचमम् जगतीख्याता, षष्ठम् वागीश्वरी तथा सप्तमम् कुमुदीप्रोक्ता, अष्ठमम् ब्रह्मचारिणी, नवम् बुद्धिमाता च दशमम् वरदायिनी, एकादशम् चंद्रकांतिदाशां भुवनेशवरी, द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेनर: जिह्वाग्रे वसते नित्यमं ब्रह्मरूपा सरस्वती सरस्वती महाभागे विद्येकमललोचने विद्यारूपा विशालाक्षि विद्या देहि नमोस्तुते।।

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