आज दिव्य धाम की सीरीज में हम बात करने जा रहे हैं सांवरिया सेठ मंदिर के बारे में, जो राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है। यह मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आस्था केंद्र है। साथ ही यहां भगवान श्रीकृष्ण के सांवरे रूप की पूजा होती है और मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना यहां जरूर पूरी होती है। हर साल लाखों भक्त इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं।
मंदिर का इतिहास
सांवरिया सेठ मंदिर का इतिहास करीब 400 साल पुराना माना जाता है। लोक कथाओं के अनुसार, एक संत को स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण ने दर्शन दिए और जमीन में दबे अपने विग्रह को निकालने का संकेत दिया। बाद में खुदाई करने पर भगवान की मूर्ति प्राप्त हुई, जिसे वर्तमान मंदिर में स्थापित किया गया। आपको बता दें कि यह मंदिर धीरे-धीरे प्रसिद्ध होता गया और आज यह राजस्थान के सबसे समृद्ध मंदिरों में गिना जाता है। वहीं हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी, एकादशी व द्वादशी को 3 दिवसीय विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। साथ ही एकादशी के दिन भादसोड़ा व बागुंड स्थान से भगवान के बाल रूप की शोभा यात्रा निकली जाती है , इसमे हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते है।
सांवरिया सेठ धाम का धार्मिक महत्व
सांवरिया सेठ मंदिर को सेठ इसलिए कहा जाता है क्योंकि भक्त यहां भगवान को व्यापारी रूप में पूजते हैं। मान्यता है कि यहां धन, व्यापार और करियर से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं। वहीं यहां भक्त अपनी आय का एक हिस्सा भगवान को अर्पित करते हैं, जिससे यह मंदिर आर्थिक रूप से भी काफी समृद्ध है।
कैसे पहुंचे सांवरिया सेठ धाम
यह मंदिर राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर स्थित है, जिससे उदयपुर, कोटा और जयपुर से आसानी से पहुंचा जा सकता है। साथ ही सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 40 किमी दूर है। यहां से टैक्सी या बस द्वारा मंदिर तक पहुंच सकते हैं। साथ ही सबसे पास हवाई अड्डा महाराणा प्रताप एयरपोर्ट (उदयपुर) है, जो करीब 65 किमी दूर स्थित है।
डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
