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Sant Ravidas Jayanti 2020: ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’… जानिए रविदास पर उनके कुछ प्रसिद्ध दोहे

sant ravidas jayanti 2020, Sant Ravidas Doha, Sant Ravidas Doha in Hindi: सामाजिक जीवन में जाति व्यवस्था के अनुसार, नीची जाति में जन्मे रविदास जी के विचारों के वजह से पूरे भारत में उनके अनुयायी हैं

9 फरवरी को है रविदास जयंती, जानिए उनके द्वारा लिखे गए दोहे

Guru Ravidas Jayanti 2020, Sant Ravidas Doha, Sant Ravidas Doha in Hindi: आज माघ पूर्णिमा है और इसी दिन संत रविदास जयंती भी मनाई जाती है। संत रविदास लोगों के लिए जूते-चप्पल बनाने का काम किया करते थे। पर जातीय ऊंच-नीच, भेदभाव और असमानता पर लोगों को सावधान करते थे और आपस में मिलजुल कर प्रेम से रहने की शिक्षा देते थे। उनके द्वारा कही गई बातें आज की परिस्थिति में भी सार्थक साबित होती हैं। उनके अनुसार ईश्वर की पूजा करने की बाध्यता नहीं होनी चाहिए, साथ ही दिखावे से भी लोगों को दूर रहना चाहिए। आइए जानते हैं रविदास जी के कुछ दोहे जिनकी सार्थकता आज भी बनी हुई है।

मन चंगा तो कठौती में गंगा: संत रविदास जी द्वारा लिखा हुआ ये दोहा सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हुआ। इस दोहे का अर्थ यह है कि जिस व्यक्ति का मन पवित्र होता है, उसके बुलाने पर मां गंगा भी एक कठौती (बर्तन) में आ जाती हैं। आज के समय में भी लोगों को ये बात समझना चाहिए भक्ति का दिखावा और अलग-अलग आडंबर करने से कुछ प्राप्त नहीं होता। जरूरत तो बस इस चीज की है कि आपका मन पवित्र हो और आप में दूसरों के प्रति दया भावना हो।

ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन, पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीण: संत रविदास जी ने अपनी वाणी से हमेशा धर्म और जाति के नाम पर होने वाली असमानता को मिटाने की कोशिश की है। वैसे आज के समय में दूसरी जाति के लोगों के साथ असमानता में कमी तो आई है लेकिन स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है। ऐसे में रविदास जी का ये दोहा लोगों को जरूर समझना चाहिए। इस दोहे में उन्होंने कहा है कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति से नहीं बल्कि उसके कर्म से होती है।

क्रोध करने से बनते काम भी बिगड़ जाते हैं: आज के समय में गुस्सा लोगों के नाक पर ही बैठा रहता है। ऐसे में रविदास जी का ये दोहा आपको बहुत कुछ सिखा सकता है। रैदास कहै जाकै हदै, रहे रैन दिन राम, सो भगता भगवंत सम, क्रोध न व्यापै काम। इस दोहे में संत रविदास भक्ति की शक्ति का वर्णन करते हैं। उनके अनुसार जिस हृदय में दिन-रात बस राम के नाम का ही वास रहता है, ऐसा भक्त स्वयं राम के समान हो ता है। राम नाम की ऐसी माया है कि इसे दिन-रात जपने वाले लोगों को न तो स्वयं गुस्सा आता है और न ही दूसरों के गुस्से से वो विचलित होते हैं।

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