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वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने से मनोकामना पूरी होने की है मान्यता, जानें महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Sankashti Chaturthi Vrat Importance: कार्तिक मास में आने वाली संकष्टी चतुर्थी व्रत को करवा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं कि जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं उनके पति की लंबी उम्र होती है।

sankashti chaturthi november 2020, sankashti chaturthi, ganesh pujaवक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान श्री गणेश को समर्पित हैं।

Vakratunda Sankashti Chaturthi Vrat: हिंदू पंचांग के मुताबिक हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाता हैं। हर संकष्टी चतुर्थी का नाम होता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का व्रत वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता हैं।

इस बार संकष्टी चतुर्थी व्रत 4 नवंबर, बुधवार को रखा जाएगा। वैसे तो सभी संकष्टी चतुर्थी व्रतों का विशेष महत्व होता है। लेकिन कार्तिक मास में आने वाली संकष्टी चतुर्थी व्रत को करवा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं कि जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं उनके पति की लंबी उम्र होती है।

वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी का महत्व (Vakratunda Sankashti Chaturthi Importance)
वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान श्री गणेश को समर्पित हैं। यह व्रत गजानन की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं भगवान गणेश उनके घर-परिवार में शुभता लेकर आते हैं। बताया जाता है कि इस दिन व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहा जाता है कि जो लोग भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा भाव रखते हैं उन्हें इस दिन व्रत करना चाहिए और साथ ही विधि-विधान से भगवान गणेश की उपासना करनी चाहिए।

वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि (Vakratunda Sankashti Chaturthi Puja Vidhi)
चतुर्थी व्रत के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर पवित्र हो जाएं।
एक चौकी लें। उस पर गंगाजल की छींटें मारें।
इस पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
साथ ही धूप, दीप और अगरबत्ती भी जलाएं।
भगवान गणेश को पीले फूलों की माला अर्पित करें।

संभव हो तो दूर्वा घास की जरूर अर्पित करें। बताया जाता है कि भगवान गणेश को दूर्वा घास अति प्रिय हैं।
फिर गणेश चालीसा, गणेश स्तुति और गणेश स्तोत्र का पाठ करें। साथ ही गणेश मंत्रों का भी जाप करें।
इसके बाद गणेश आरती कर भगवान गणेश को भोग लगाएं। संभव हो तो पीले लड्डुओं का भोग जरूर लगाएं।
पूजा के बाद भगवान गणेश को दंडवत प्रणाम करें और आरती लें।
साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत संपूर्ण करें।

वक्रतुण्ड संकष्टी पूजा का शुभ मुहूर्त (Vakratunda Sankashti Chaturthi Puja Ka Shubh Muhurat)
पूजा का शुभ मुहूर्त – शाम 5 बजकर 34 मिनट से 6 बजकर 52 मिनट तक।

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