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संकष्टी चतुर्थी 2017: जानिए इस वर्ष किस दिन है अंगारी संकष्टी चतुर्थी और क्या है इसका महत्व

Sankashti Chaturthi Puja 2018 Date: जिस माह संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन आती है उसे अंगारी संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।

Author Updated: January 5, 2018 9:43 AM
Sankashti Chaturthi 2018 Date: जानिए इस वर्ष कब है अंगारी संकष्टी चतुर्थी।

हिंदू धर्म के अनुसार भगवान गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय माना जाता है। माना जाता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा करने से सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं। इसलिए इन्हें संकटमोचन और विघ्महर्ता माना जाता है। मान्यता है कि चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा और उनका व्रत करना बहुत फलदायी होता है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर माह में दो बार चतुर्थी का व्रत आता है। जिसमें कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है और शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी माना जाता है। इस चतुर्थी का अधिक महत्व दक्षिण भारते के राज्यों में है। जिस माह संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन आती है उसे अंगारकी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस चतुर्थी को संकट हारा चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा से विशेष लाभ प्राप्त होता है।

संकष्टी का विच्छेद किया जाए तो उसका अर्थ होता है कि संकटो से पार करने वाला और वहीं चतुर्थी का अर्थ होता है चार दिनों तक भगवान गणेश का पूजन। हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी के दिन चांद को देखकर पूजा करने का महत्व होता है। भगवान गणेश की इस दिन पूजा करने से सभी तरह की इच्छाएं पूरी होती हैं। इस दिन का महत्व तब और बढ़ जाता है जब ये मंगलवार के दिन होती है और इसे अंगारकी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस चतुर्थी का महत्व भगवान कृष्ण ने पांडवों के सबसे बड़े भाई युद्धिष्ठिर को इसका ज्ञान दिया था। अंगारकी चतुर्थी एक वर्ष में दो बार आती है और भादो के माह में आने वाली चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है।

संकष्टी चतुर्थी जिसे अंगारी संकष्टी कहा जा रहा है क्योंकि वो मंगलवार के दिन होती है। इस बार अंगारी संकष्टी चतुर्थी 7 नवंबर 2017 मंगलवार के दिन है। इस दिन कई लोग भगवान गणेश की पूजा करते हैं और उनका व्रत करते हैं। इस व्रत को रात में चांद देखने के बाद ही खोला जाता है। इस दिन के लिए मान्यता है कि ऋषि भारद्वाज और माता पार्वती का पुत्र अंगारक एक महान ऋषि और भगवान गणेश के भक्त थे। उन्होनें भगवान गणेश की पूजा करके उनसे आशीर्वाद मांगा। माघ कृष्ण चतुर्थी के दिन भगवान गणेश ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उनसे वरदान मांगने के लिए कहा। उन्होनें अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि उनका नाम हमेशा के लिए भगवान गणेश से जुड़ जाए। इसके बाद से हर मंगलवार को होने वाली चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी के नाम जाना जाने लगा और जो भी इस दिन भगवान गणेश की पूजा करता है और उनका व्रत करता है उसके सभी संकट खत्म हो जाते हैं।

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