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उज्जैन की पंचकोसी यात्रा का ये है धार्मिक महत्व, जानिए वैशाख से इसका कनेक्‍शन

पंचकोसी यात्रा उज्जैन की प्रसिद्ध यात्रा है। इस यात्रा में आने वाले देव, पिंगलेश्वर, कायावरुनेश्वर, विलवेश्वर, धुद्धेश्वर और नीलकंठेश्वर हैं।

सांकेतिक तस्वीर।

हिन्दू धर्म शास्त्रों में पंचकोसी यात्रा का काफी धार्मिक महत्व बताया गया है। यह पंचकोसी यात्रा मुख्यरूप से महाकाल की नगरी उज्जैन से शुरु होती है। उज्जैन में यह यात्रा वैशाख मास में शुरु होता है। विद्वानों का ऐसा कहना है कि वैशाख माह जैसा शुभ कोई अन्य मास नहीं होता है। सतयुग के जैसा कोई और युग नहीं, वेद के जैसा कोई अन्य धर्म शास्त्र नहीं और गंगा के समान कोई दूसरा तीर्थ नहीं होता। माना जाता है कि वैशाख में पंचकोसी यात्रा और भगवान विष्णु की उपासना से अज्ञान दूर होता है। क्या आप जानते हैं कि उज्जैन की पंचकोसी यात्रा का क्या धार्मिक महत्व है? साथ ही इस यात्रा का वैशाख से क्या संबंध है? यदि नहीं तो आगे जानिए।

हिन्दू पंचांग के मुताबिक चैत्र पूर्णिमा से वैशाख मास शुरु हो जाता है। कहते हैं कि वैशाख मास का महत्व कार्तिक और माघ मास के समान है। इस मास में जल दान और कुंभ दान का विशेष महत्व है। वैशाख मास स्नान का महत्व पुराणों में भी मिलता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरे वैशाख स्नान का लाभ नहीं ले पाते वे अंतिम पांच दिनों में पूरे मास के स्नान का लाभ ले सकते हैं। इसके महत्व के चलते कुंभ भी इसी मास में आयोजित होता है।

पंचकोसी यात्रा में सभी ज्ञात-अज्ञात देवताओं की प्रदक्षिणा का पुण्य इस पवित्र मास में मिलता है। पंचकोसी यात्रा उज्जैन की प्रसिद्ध यात्रा है। इस यात्रा में आने वाले देव, पिंगलेश्वर, कायावरुनेश्वर, विलवेश्वर, धुद्धेश्वर और नीलकंठेश्वर हैं। वैशाख मास और ग्रीष्म ऋतु के आरंभ होते ही शिवालयों में गलंतिका वंदन होता है। इस समय पंचकोसी यात्रा शुरु होती है। पंचकोसी यात्री हमेशा निर्धारित तिथि और दिन से पहले यात्रा पर निकाल पड़ते हैं।

ज्योतिष के जानकार यह मानते हैं कि तय तिथि और दिन से यात्रा शुरु करने से ही पंचकोसी यात्रा का पुण्य लाभ मिलता है। साथ ही यात्रा का पुण्य मुहूर्त के अनुसार तीर्थ स्थलों पर की गई पूजा-अर्चना से मिलता है। इसके अलावा श्रद्धालु उज्जैन की नगनाथ की गली स्थित पटनी बाजार स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर से लेकर 118 किलोमीटर की यात्रा करते हैं।

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