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Chanakya Niti: इन गलतियों की वजह से बर्बाद हो सकते हैं पति-पत्नी के रिश्ते; जानिए क्या कहती है चाणक्य नीति

Chanakya Niti in Hindi: पति और पत्‍नी के रिश्तों को लेकर आचार्य चाणक्य ने कुछ बातें बताई हैं, यदि अपने रिश्‍ते को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं तो इन बातों का हमेशा पालन करना चाहिए। जानें-

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प्रतीकात्मक तस्वीर

Chanakya Niti For relationship: अर्थशास्‍त्र, राजनीति, कूटनीति के अलावा आचार्य चाणक्‍य ने व्‍यवहारिक जीवन की भी कई बातें बताई हैं. आचार्य ने अपनी पुस्तक चाणक्य नीति में पति-पत्‍नी के रिश्‍ते को बेहतर बनाने के लिए कुछ बातें बताई हैं। आचार्य चाणक्‍य द्वारा लिखे गए नीति शास्‍त्र में कहा गया है कि पति-पत्‍नी को कुछ बातों से हमेशा बचना चाहिए, वरना उनका रिश्‍ता बर्बाद हो सकता है। आइए जानते हैं-

सा भार्या या शुचिर्दक्षा सा भार्या या पतिव्रता।
सा भार्या या पतिप्रीता सा भार्या सत्यवादिनी।।

पति के लिए वही पत्नी उपयुक्त होती है, जो मन, वचन और कर्म से एक जैसी हो और अपने कार्यों में निपुण हो, इसके साथ ही वह अपने पति से प्रेम रखने वाली तथा सत्य बोलने वाली होनी चाहिए। ऐसी स्त्री को ही श्रेष्ठ पत्नी माना जा सकता है। ||13||

तृतीय अध्याय के तेरहवें श्लोक में आचार्य चाणक्य ने आदर्श पत्नी के गुणों की चर्चा करते हुए यह भी संकेत किया है कि पति को कैसा होना चाहिए। हम यह तो चाहते हैं कि पत्नी पति से कुछ न छिपाए, लेकिन पत्नी से रहस्यों को छिपाना अपना अधिकार मानते हैं। घर को संभालने का कार्य पत्नी कुशलता से करे और पति? पत्नी पति से प्रेम करती है और पति? आज बदलते परिवेश में आचार्य के कथन को व्यावहारिक रूप से देखने-परखने की आवश्यकता है। ये बातें दोनों के लिए एक समान हैं।

कोकिलानां स्वरो रूपं स्त्रीणां रूपं पतिव्रतम्।
विद्या रूपं कुरूपाणां क्षमा रूपं तपस्विनाम्।।

कोयल का सौंदर्य उसके स्वर में है, उसकी मीठी आवाज में है, स्त्रियों का सौंदर्य उनका पतिव्रता होना है, कुरूप लोगों का सौंदर्य उनके विद्यावान होने में और तपस्वियों की सुंदरता उनके क्षमावान होने में है। ।।9।।

द्वितीय अध्याय के नौवें श्लोक में लिखा है कि व्यक्ति का सौंदर्य उसके गुणों में छिपा रहता है। जिस प्रकार कोयल और कौआ दोनों काले होते हैं, परंतु कोयल की मीठी कूक सभी को पसंद होती है, यही मीठा स्वर उसका सौंदर्य है, इसी प्रकार स्त्रियां वे ही सुंदर मानी जाती हैं, जो पतिव्रता होती हैं अर्थात स्त्री का सौंदर्य उसका पातिव्रत धर्म है।

समाज में भी पति-परायणा स्त्री को ही सम्मान प्राप्त है, उसी की लोगों द्वारा सराहना की जाती है। शरीर से कुरूप व्यक्ति भी विद्या के कारण आदर का पात्र बन जाता है जैसे सत्यवती पुत्र व्यास। तप करने वाले व्यक्ति की शोभा उसकी क्षमाशीलता के कारण होती है। महर्षि भृगु ने ‘क्षमा’ करने की विशेषता के कारण ही श्रीविष्णु को देवताओं में श्रेष्ठ घोषित किया था।

इसके अलावा चाणक्‍य नीति में आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि पति-पत्‍नी के रिश्‍ते को हमेशा मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है कि वे कुछ चीजों से हमेशा बचें, जैसे की पति-पत्‍नी का रिश्‍ता ईमानदारी, सच्‍चाई और भरोसे पर टिका होता है, इसलिए उन्हें कभी आपस में झूठ नहीं बोलना चाहिए। पति-पत्‍नी को एक-दूसरे पर क्रोध करने से बचना चाहिए। साथ ही पति-पत्‍नी की निजी बातें केवल उन्हीं के बीच रहना ही ठीक होता है। गलती से भी एक-दूसरे का अपमान नहीं करना चाहिए।

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