ताज़ा खबर
 

इस वजह से शिव जी ने धरा था अर्द्धनारीश्‍वर रूप

बता दें कि शिव जी ने अर्द्धनारीश्वर रूप के जरिए स्त्री और पुरुष में समानता का संदेश दिया है। शिव ने स्त्री और पुरुष को एक-दूसरे के बराबर बताया है।

Author नई दिल्ली | May 28, 2018 20:21 pm
प्रतीकात्मक तस्वीर।

भगवान शिव से जुड़े हुए कई प्रसंग बड़े ही प्रसिद्ध हैं। आज हम आपको उनसे जुड़ा एक बड़ा ही रोचक प्रसंग बताने जा रहे हैं। आपने शिव जी के अर्द्धनारीश्‍वर रूप के बारे में सुना होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्होंने यह रूप क्यों धारण किया था। और इसके लिए किसने उनसे आग्रह किया था। यदि नहीं, तो हम आपको इस बारे में बताने जा रहे हैं। सीधे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि इस सृष्टि की संरचना के लिए शिव जी ने अर्द्धनारीश्‍वर रूप धारण किया था। दरअसल सृष्टि की संरचना के बाद ब्रम्हा जी ने केवल पुरुष बनाए थे। ऐसे में उन्हें आभास हुआ कि नारी के बिना तो यह सृष्टि आगे नहीं बढ़ पाएगी। इस समस्या के समाधान के लिए वह शिव जी के पास पहुंचे। इसके बाद उन्होंने शिव जी की आराधना करनी शुरू कर दी।

कहते हैं कि ब्रम्हा जी का आराधना से शिव बड़े प्रसन्न हुए। उन्होंने बड़ी ही शालीनता के साथ ब्रम्हा जी की समस्या को सुना। इसके बाद समस्या के समाधान के लिए उन्होंने अर्द्धनारीश्‍वर रूप धारण किया। इस रूप में वह आधे शिव और आधे शिवा कहे गए। इसके साथ ही उन्होंने मानव जाति को प्रजनन शील बनने की प्रेरणा भी दी। इस प्रकार से इस सृष्टि की रचना का ब्रम्हा जी का काम पूरा हुआ।

बता दें कि शिव जी ने अर्द्धनारीश्वर रूप के जरिए स्त्री और पुरुष में समानता का संदेश दिया है। शिव ने स्त्री और पुरुष को एक-दूसरे के बराबर बताया है। उनके मुताबिक स्त्री और पुरुष दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। किसी एक के अभाव में भी इस सृष्टि का अंत हो सकता है। इसके साथ ही शिव को पुरुष और शक्ति को स्त्री का प्रतीक माना गया है। ऐसे में शिव के बिना शक्ति और शक्ति के बिना शिव का कोई अस्तित्व नहीं है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App