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पढ़िए वो प्रसंग जब शिव जी की बहन से क्रोधित हो गई थीं माता पार्वती और फिर…

कहा जाता है कि शिव जी की लंबी साधनाओं की वजह से पार्वती जी कई बार खुद को अकेली महसूस करती थीं। ऐसे में उनको यह विचार आया कि यदि उनकी कोई ननद होती तो उससे बातें करके वह अपना मन बहला लेतीं।

Author नई दिल्ली | June 19, 2018 6:40 PM
भगवान शिव और माता पार्वती।

भगवान शिव और पार्वती जी से जुड़े कई प्रसंग बड़े ही प्रसिद्ध हैं। इन दिलचस्प प्रसंगों को अक्सर शिव भक्तों के बीच में साझा किया जाता रहता है। आज हम भी आपके लिए शिव जी से जुड़ा एक बेहद ही रोचक प्रसंग लेकर आए हैं। इसमें उस घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है जब माता पार्वती अपनी ननद यानी शिव जी की बहन से क्रोधित हो गई थीं। हम सब यह जानते हैं कि कार्तिकेय और गणेश शंकर जी को दो पुत्र थे। लेकिन कुछ जगहों में इस बात का उल्लेख मिलता है शिव जी ने पार्वती की इच्छा पर अपनी माया से एक स्त्री को उत्पन्न किया था जो कि पार्वती की ननद यानी शंकर की बहन कहलाईं। हालांकि इनके बारे में कुछ ही जगहों पर उल्लेख मिलता है।

यह प्रसंग उस समय से जुड़ा हुआ है जब शिव जी पार्वती को ब्याहकर कैलाश पर्वत पर लेकर आए थे। कहा जाता है कि शिव जी की लंबी साधनाओं की वजह से पार्वती जी कई बार खुद को अकेली महसूस करती थीं। ऐसे में उनको यह विचार आया कि यदि उनकी कोई ननद होती तो उससे बातें करके वह अपना मन बहला लेतीं। शिव जी को जब उनकी इस इच्छा के बारे में पता चला तो उन्होंने अपनी शक्तियों से एक स्त्री को उत्पन्न किया।

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शिव की बहन की नाम असावरी देवी बताया जाता है। कहते हैं कि एक बार असावरी ने शरारत करते हुए पार्वती को अपने पैरे की दरारों में छुपा लिया था। इससे पार्वती का दम घुटने लगा था और वह असावरी की इस हरकत से बहुत क्रोधित हुई थीं। इसके बाद पार्वती जी ने शिव से आग्रह किया कि आप अपनी बहन को उसके ससुराल भेज दें। शिव जी ने ऐसा ही किया। ऐसी मान्यता है कि ननद और भाभी के बीच नोक-झोंक उसी समय से आंरभ हुई।

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