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शरद पू्र्णिमा पूजा विधि 2017: जानिए क्या है पूजा का शुभ मुहुर्त, मां लक्ष्मी इस विधि से पूजा करने वालों पर बरसाएंगी धन

Sharad Purnima 2017 Puja Vidhi: शरद पूर्णिमा की रात को श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। मान्यता है इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता है।

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शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं; हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को कहते हैं। ज्‍योतिष के अनुसार, पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिन्दी धर्म में इस दिन कोजागर व्रत माना गया है। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। इसी दिन श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। मान्यता है इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता है। तभी इस दिन उत्तर भारत में खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखने का विधान है। रात 8 बजकर 50 मिनट से शुरु होकर दूसरे दिन की रात 12 बजे तक रहेगा। वहीं शुभ योग सुबह 5 बजकर 55 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। इस दिन चंद्रमा प्रथ्वी के सबसे निकट होता है।

इस दिन मनुष्य विधिपूर्वक स्नान करके उपवास रखे और जितेन्द्रिय भाव से रहे। धनवान व्यक्ति तांबे अथवा मिट्टी के कलश पर वस्त्र से ढंकी हुई स्वर्णमयी लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करके भिन्न-भिन्न उपचारों से उनकी पूजा करें, तदनंतर सायंकाल में चन्द्रोदय होने पर सोने, चांदी अथवा मिट्टी के घी से भरे हुए 100 दीपक जलाएं। इसके बाद घी मिश्रित खीर तैयार करे और बहुत-से पात्रों में डालकर उसे चन्द्रमा की चांदनी में रखें। जब एक प्रहर (6 घंटे) बीत जाएं, तब लक्ष्मीजी को सारी खीर अर्पण करें। तत्पश्चात भक्तिपूर्वक सात्विक ब्राह्मणों को इस प्रसाद रूपी खीर का भोजन कराएं और उनके साथ ही मांगलिक गीत गाकर तथा मंगलमय कार्य करते हुए रात्रि जागरण करें। तदनंतर अरुणोदय काल में स्नान करके लक्ष्मीजी की वह स्वर्णमयी प्रतिमा आचार्य को अर्पित करें। इस रात्रि की मध्यरात्रि में देवी महालक्ष्मी अपने कर-कमलों में वर और अभय लिए संसार में विचरती हैं और मन ही मन संकल्प करती हैं कि इस समय भूतल पर कौन जाग रहा है? जागकर मेरी पूजा में लगे हुए उस मनुष्य को मैं आज धन दूंगी।

मान्यता है कि लक्ष्मी पूजा के दिन देवी लक्ष्मी यह देखने निकलती हैं कि उनके लिए कौन भक्‍त जाग रहा है। इसलिए कोजागरा की पूरी रात लोग जागरण करते हैं। वक्‍त काटने के लिए कौड़ी से पचीसी खेली जाती है। जुआ भी खेलने की परंपरा है ताकि नवविवाहितों को जीवन में हार-जीत का महत्व का पता चले। इसके साथ ही ये प्रसाद घर के सभी सदस्यों में वितरीत करना चाहिए।

लक्ष्मी पूजा का मुहुर्त:
सिद्धि मुहुर्त: रात 5 बजकर 57 मिनट से रात 7 बजकर 49 मिनट तक।
अमृत मुहुर्त: रात 7 बजकर 50 मिनट से रात 9 बजकर 17 मिनट तक।

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