रावण ने अपने आखिरी पलों में लक्ष्मण को दिया था यह ज्ञान, आपकी सक्सेस के लिए भी जरूरी हैं ये बातें

वरदान हासिल करने के लिए रावण ने शिवजी की पूजा की और उसकी पूजा से खुश होकर भगवान शिवजी ने रावण को कई वरदान दिए थे।

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रामलीला प्रदर्शन की तस्वीर ( Express photo by Vishal Srivatav)

धर्म ग्रंथ रामायण में राम और रावण के युद्ध के बारे में बताया गया है। रामायण के अनुसार लंकापति रावण का वध श्रीराम ने किया था। लेकिन ये बहुत ही कम लोग जानते हैं कि रावण एक महापंडित भी था। रावण के पिता एक ऋषि थे वहीं उसकी माता एक असुर थी। वरदान हासिल करने के लिए रावण ने शिवजी की पूजा की और उसकी पूजा से खुश होकर भगवान शिवजी ने रावण को कई वरदान दिए थे। भगवान शिवजी जानते थे कि रावण ये पूजा अपने सवार्थ के लिए कर रहा है। लेकिन इन सब बातों को दरकिनार करके शिवजी ने रावण को वरदान दिए। भगवान शिवजी से वरदान मिलने के बाद रावण बेहद शक्तिशाली हो गया। युद्ध के बाद जब रावण की हार हुई और रावण अपनी आखिरी सांसे ले रहा था तो रावण ने श्रीराम के भाई लक्ष्मण को सफल जीवन के लिए तीन मूल्यवान बातें बताई।

रावण जब अपनी अंतिम सांसे ले रहा था तो श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि, रावण के पास जाओ और उससे सफल जीवन के अनमोल मंत्र ले लो” अपने भाई राम की बात मानकर लक्ष्मण रावण के सिर के पास जाकर खड़ा हो गया लेकिन रावण कुछ नहीं बोला। लक्ष्मण वापस आकर श्रीराम के पास खड़ा हो गया। श्रीराम ने लक्ष्मण ने कहा कि जब हम किसी से कुछ सिखना चाहते हैं तो हम उसे सिर के पास नहीं उसके चरणों के पास खड़ा होना चाहिए।

लक्ष्मण वापस रावण के पास गया तो रावण ने लक्ष्मण को तीन बातें बताई। रावण ने लक्ष्मण को बताया कि जब भी कोई शुभ कार्य शुरु करना हो तो उसमें देर नहीं करनी चाहिए। शुभ काम जितना जल्दी हो उतना ही अच्छा होता है। रावण ने कहा कि जैसे मैंने श्रीराम की शरण में आने में देरी कर दी। यही कारण है कि मेरी ये हालत है।

रावण ने लक्ष्मण को दूसरी बात बताई कि अपने शत्रु को कभी भी छोटा नहीं समझना चाहिए। रावण ने कहा कि मैंने श्रीराम को हमेशा तुच्छ व्यक्ति समझा, जो मेरी सबसे बड़ी भूल थी। रावण ने आगे कहा कि जब मैंने भगवान ब्रह्माजी से अमर होने का वरदान मांगा तो उसमें कहा कि मुझे मनुष्य और वानकर को छोड़कर कोई भी ना मार सके। क्योंकि मैंने हमेशा मनुष्य और वानर को तुच्छ समझा, जोकि मेरी बड़ी गलती थी।

रावण ने अपनी आखिरी और तीसरी बात में लक्ष्मण को बताया कि अपनी जींदगी को कोई भी किसी को नहीं बताना चाहिए। मेरी मौत का राज विभीषण जानता था जो मेरी मौत का कारण बना।

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