आज दिव्य धाम की सीरीज में हम बात करने जा रहे हैं राजस्थान प्रदेश के सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर के, त्रिनेत्र गणेश मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और चमत्कारी गणेश मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर ऐतिहासिक रणथंभौर किले के भीतर स्थित है और मान्यता है कि यहां विराजमान भगवान गणेश अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। खास बात यह है कि यह भारत का एकमात्र ऐसा प्राचीन मंदिर माना जाता है जहां भगवान गणेश अपने पूरे परिवार, रिद्धि, सिद्धि और पुत्र शुभ-लाभ के साथ विराजमान हैं।

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क्या है त्रिनेत्र गणेश मंदिर का इतिहास

त्रिनेत्र गणेश मंदिर का इतिहास करीब 700 से अधिक वर्ष पुराना बताया जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार जब रणथंभौर किले पर राजा हम्मीर देव चौहान का शासन था, तब किले को दुश्मनों ने घेर लिया था। युद्ध के दौरान किले में खाद्य सामग्री खत्म होने लगी। तभी राजा हम्मीर देव को सपने में भगवान गणेश ने दर्शन दिए और सहायता का आश्वासन दिया। अगले ही दिन किले की दीवार पर भगवान गणेश की त्रिनेत्र वाली स्वयंभू प्रतिमा प्रकट हुई। इसके बाद युद्ध की स्थिति बदल गई और किले में अन्न-भंडार भी भर गए। तभी से यहां भगवान त्रिनेत्र गणेश की पूजा शुरू हुई और यह मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र बन गया।

मंदिर का धार्मिक महत्व

त्रिनेत्र गणेश मंदिर को अत्यंत सिद्ध और चमत्कारी माना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना जल्द पूरी होती है। देशभर से श्रद्धालु यहां विवाह का पहला निमंत्रण पत्र भेजते हैं। कहा जाता है कि भगवान गणेश को शादी का पहला कार्ड भेजने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। वहीं आपको बता दें कि भाद्रपद माह में गणेश चतुर्थी के दौरान यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर में सुबह और शाम की आरती का विशेष महत्व माना जाता है।

कैसे पहुंचे रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर

रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर पहुंचने के लिए सबसे पहले राजस्थान के सवाई माधोपुर शहर पहुंचना होता है। साथ ही मंदिर से सबसे पास जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 180 किलोमीटर दूर है। साथ ही सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन भी मंदिर से काफी पास है।

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डिस्क्लेमर- इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, लोक कथाओं और सामान्य स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक जानकारी प्रदान करना है। किसी भी मान्यता या परंपरा को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या जानकार की सलाह अवश्य लें। स्थान, यात्रा और दर्शन से जुड़ी जानकारी समय के अनुसार बदल सकती है, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी जरूर प्राप्त करें।