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पति-पत्नी के रिश्ते को मधुर बनाने के लिए करें श्रीरामचरितमानस की इस चौपाई का पाठ

रामचरितमानस में ऐसी चौपाईयां वर्णित हैं जिनका विपत्तियों और संकटों से बचने और सुख-समृद्धि पाने के लिए पाठ किया जाता है।

केरल में माकपा मनाएगी रामायण महीना। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हिंदू धर्म में पवित्र माने जाने वाले ग्रंथों में से एक रामचरित मानस माना जाता है। ये हिंदू संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है। इस ग्रंथ में सतयुग से जुड़े सभी घटनाक्रमों का सुंदरता से वर्णन किया गया है। इस ग्रंथ में रामायण के माध्यम को चौपाइयों के माध्यम से बताया गया है। राम के जन्म से लेकर उनके महापुरुष बनने तक का सफर और राम-सीता का विवाह आदि घटनाओं को लिखा गया है। माना जाता है कि जीवन में जब समस्याएं घेर लेती हैं तो किस तरह से उन समस्याओं से लड़ा जाए। उन समस्याओं का समाधान रामाचरितमानस की इन चौपाइयों में छुपा हुआ है। माना जाता है कि रामायण की ये चौपाइ मंत्र रामायण में वर्णित कामधेनु की तरह मनोवांछित फल देती है।

रामचरित मानस में ऐसी चौपाईयां वर्णित हैं जिनका विपत्तियों और संकटों से बचने और सुख-समृद्धि पाने के लिए पाठ किया जाता है। इन चौपाईयों को विधि के साथ एक सौ आठ बार पढ़ा जाता है। कई लोग हवन के साथ इन चौपाइयों का मंत्र के रुप में प्रयोग करते हैं। इसके लिए सामाग्री के साथ विधिपूर्वक इन मंत्रों का पाठ किया जाता है। चंदन के बुरादे, जौं, चावल, केसर, घी, तिल, शक्कर, कपूर, मोथा, पंचमेवा आदि के साथ निष्ठापूर्वक पाठ किया जाता है। यदि पति-पत्नी के रिश्तें में तकलीफें आ रही हैं और संबंध बिगड़ रहे हैं तो इन चौपाईयों का पाठ करने से पति-पत्नी के संबंध सुधर सकते हैं और उनमें प्रेम बढ़ता है।

प्रेम वृद्धि के लिए-
– सब नर करहिं परस्पर प्रीती।
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीती।।

– सुनहि विमुक्त बिरत अरू विबई।
लहहि भगति गति संपति नई।।

– प्रेम मगन कौशल्या निसिदिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान।।
खोई हुई वस्तु पानें के लिए
गई बहारे गरीब नेवाजू।

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