Ramayan Chaupai: मनुष्य का जीवन केवल खुशियों से नहीं बना होता। इसमें कभी सुख आता है, कभी दुख और कभी ऐसा डर घर कर जाता है, जो इंसान को अंदर से तोड़ देता है। दुख कुछ समय बाद सहन हो जाता है, लेकिन डर ऐसा भाव है जो व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोक देता है। डर के कारण इंसान निर्णय नहीं ले पाता, आत्मविश्वास खो देता है और जीवन ठहर सा जाता है। ऐसे में जब इंसानी प्रयास कमजोर पड़ने लगते हैं, तब अधिकतर लोग ईश्वर की शरण लेते हैं। पूजा-पाठ, मंत्र-जाप और धार्मिक ग्रंथों का सहारा लिया जाता है, ताकि मन को शांति मिले और डर से मुक्ति मिल सके।
भारतीय सनातन परंपरा में श्रीरामचरितमानस को ऐसा ही एक अद्भुत ग्रंथ माना गया है, जिसमें जीवन की हर समस्या का समाधान छिपा है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह ग्रंथ केवल धार्मिक कथा नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला भी सिखाता है। कहा जाता है कि रामचरितमानस की चौपाइयों में इतनी शक्ति है कि इनके नियमित पाठ से भय, चिंता, मानसिक तनाव और बड़े से बड़े संकट भी दूर हो सकते हैं। आइए जानते हैं श्रीरामचरितमानस की इन चौपाइयों के बारे में।
जा पर कृपा राम की होई।
ता पर कृपा करहिं सब कोई॥
जिनके कपट, दम्भ नहिं माया।
तिनके हृदय बसहु रघुराया॥
इस चौपाई का भाव बहुत सरल और गहरा है। इसका अर्थ है कि जिस व्यक्ति पर भगवान श्रीराम की कृपा होती है, उसके जीवन में दुख ज्यादा देर टिक नहीं पाते। जिनके मन में छल, कपट, दिखावा और लालच नहीं होता, भगवान राम स्वयं उनके हृदय में वास करते हैं। ऐसे लोग न केवल ईश्वर की नजर में प्रिय होते हैं, बल्कि समाज में भी उन्हें सम्मान मिलता है। यह चौपाई हमें सिखाती है कि डर से मुक्ति का सबसे पहला रास्ता है मन की शुद्धता। जब मन साफ होता है, तो जीवन की राह अपने आप आसान होने लगती है।
कहु तात अस मोर प्रनामा ।
सब प्रकार प्रभु पूरनकामा ॥
दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी ॥
जीवन में कई बार ऐसे हालात आते हैं, जब इंसान चारों ओर से घिरा हुआ महसूस करता है। मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी या पारिवारिक संकट मन को कमजोर बना देते हैं। ऐसे समय के लिए रामचरितमानस की यह चौपाई बेहद प्रभावी मानी जाती है।
कहु तात अस मोर प्रनामा।
सब प्रकार प्रभु पूरनकामा॥
दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी॥
इस चौपाई का अर्थ है – हे प्रभु! मैं आपको प्रणाम करता हूं। आप सभी इच्छाओं को पूरा करने वाले हैं। दीन और दुखियों पर दया करना आपका स्वभाव है, इसलिए मेरे जीवन के सारे बड़े संकट दूर कर दीजिए। यह चौपाई हमें सिखाती है कि संकट के समय घबराने के बजाय, ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए। जब इंसान सच्चे मन से प्रार्थना करता है, तो उसका डर धीरे-धीरे कम होने लगता है और मन को शांति मिलने लगती है।
होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
अस कहि लगे जपन हरिनामा।
गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥
इसका अर्थ है कि इस संसार में वही होता है, जो भगवान राम ने पहले से तय कर रखा है। बेवजह तर्क-वितर्क और चिंता करने से केवल मन अशांत होता है। जब स्वयं भगवान शिव भी जीवन की उलझनों में पड़े, तो उन्होंने राम नाम का जप किया। यही संदेश हमें भी मिलता है कि परेशानियों में चिंता छोड़कर ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। इससे मन हल्का होता है और डर धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
