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Ramadan 2019: जानिए, समुद्र के बीच में स्थित हाजी अली की दरगाह क्यों नहीं डूबता

Ramadan 2019: दरअसल हम बात कर रहे हैं मुंबई की हाजी अली दरगाह की, जहां समुद्र की लहरें चाहे कितने ही उफान पर क्यों न हों, लेकिन ये दरगाह कभी नहीं डुबती।

Ramadan 2019: जानिए, समुद्र के बीच में स्थित हाजी अली की दरगाह क्यों नहीं डूबता

Ramadan 2019: भारत में एक ऐसा स्थान है जहां हिन्दू-मुस्लिम जाकर एक जगह सिर झुकाते हैं, जहां समुद्र की लहरें भी नतमस्तक हो जाती हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं मुंबई की हाजी अली दरगाह की, जहां समुद्र की लहरें चाहे कितने ही उफान पर क्यों न हों, लेकिन ये दरगाह कभी नहीं डुबती। इन सब के बीच क्या आप जानते हैं कि हाजी अली की दरगाह समुद्र में क्यों नहीं डूबता है? साथ ही इसके समुद्र के बीच में होने की वजह क्या है? यदि नहीं, तो आगे इसे जानते हैं।

हाजी अली के बारे में कहा जाता है कि ये एक समृद्ध परिवार से थे। एक बार जब हाजी अली उज्बेकिस्तान में नमाज पढ़ रहे थे। उसी समय वहां से एक महिला रोती हुई गुजरी। हाजी के पूछने पर महिला ने बताया कि वो तेल लेने निकली थी, लेकिन तेल से भरा बर्तन गिर गया और सारा तेल जमीन पर फैल गया। महिला ने कहा कि अब उसका पति उसे बहुत मारेगा। यह सब सुनने के बाद हाजी अली महिला को उस स्थान पर ले गए जहां तेल गिरा था। वहां जाकर उन्होंने अपना अंगूठा जमीन में गरा दिया। जिसके बाद जमीन से तेल का फव्वारा निकल पड़ा। फिर क्या था? महिला ने अपना बर्तन तेल से भर लिया और अपने घर चली गई।

कहते हैं कि इसके बाद महिला तो चली गई लेकिन हाजी अली मायूस हो गए। उन्हे बुरे-बारे सपने आने लगे कि उन्होंने ऐसा करके धरती को जख्मी कर दिया है। माना जाता है कि वे तभी से गुमसुम रहने लगे और बीमार भी पड़ गए। कहते हैं कि इन सब बातों से छुटकारा पाने और सुकून पान के लिए अपने भाई के साथ मुंबई की उस जगह पहुंच गए जहां आज दरगाह है। हाजी अली वहां रहकर धर्म का प्रचार-प्रसार करने लगे। मान्यता यह भी है कि उन्होंने मक्का की यात्रा के दौरान अपनी पूरी दौलत नेक काम के लिए दान कर दी थी। लेकिन मक्का की यात्रा के दौरान इनकी मौत हो गई।

कहा जाता है कि उनकी इच्छा थी कि मौत के बाद उनके शरीर को एक ताबूत में रखकर समुद्र में बहा दिया जाए। हैरन करने वाली बात तो ये है कि उनका ताबूत समुद्र में बिना डूबे मुंबई आ पहुंचा और उस ताबूत में एक बूंद भी पानी नहीं जा सका। इस चमत्कारी घटना के बाद ही हाजी अली की याद में मुंबई में दरगाह का निर्माण किया गया। कहते हैं कि आज भी समुद्र के बीचोंबीच बने होने के बावजूद भी दरगाह में पानी की एक बूंद जाने से भी कतराती है।

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