ताज़ा खबर
 

Ramadan 2019: जानिए, अजमेर शरीफ की दरगाह पर क्यों चढ़ाते हैं चादर, ये है इसका महत्व

Ramadan 2019: इस दरगाह के अंदर एक स्मारक है, जिसे जलाहारा कहा जाता है। कहते हैं कि यह हजरत मोइनुद्दीन चिश्ती के समय से यहां पानी का मुख्य स्रोत था।

Ramadan, Ramadan 2019, ajmer sharif, jmer sharif dargh, Khawaja Gharib Nawaz, Ajmer Dargah, Ajmer Sharif, Dargah Sharif, sufi saint, Moinuddin Chishti, Ajmer, Rajasthan, islam, muslims, religion newsRamadan 2019: जानिए, अजमेर शरीफ की दरगाह पर क्यों चढ़ते हैं चादर, ये है इसका महत्व

रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है। इस महीने में प्रत्येक मुसलमान रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं। रमजान के महीने में मुसलमान बिना खाए-पीये पूरे 29-30 दिनों तक रोजे रखते हैं। इस्लाम धर्म में रोजे रखना बेहद खास माना जाता है। क्योंकि ऐसी मान्यता है कि रमजान के दौरान अल्लाह अपने बंदों के लिए जहन्नुम के दरवाजे खोले रखते हैं। इसलिए हर मुसलमान रमजान को पूरी शिद्दत के साथ मनाता है। इसके अलावा इस्लाम में यह दरगाह पर चादर चढ़ाने की भी मान्यता है। आगे हम आपको बता रहे हैं कि अजमेर शरीफ की दरगाह पर चादर क्यों चढ़ाया जाता है और इस्लाम में इसकी क्या अहमियत है?

राजस्थान के अजमेर शरीफ की दरगाह एक देखने लायक जगह है। इस दरगाह में हजरत मोइन्नुद्दीन चिस्ती की मजार है। माना जाता है कि यह भारत के सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है, जहां न केवल मुस्लिम बल्कि दुनियाभर से हर धर्म के लोग यहां चादर चढ़ाने आते हैं। यहां का मुख्य त्योहार उर्स है जो कि इस्लामिक कैलेंडर के रजा माह की पहली से छठवीं तारीख तक मनाया जाता है। कहते हैं कि यहां कई बड़े-बड़े नेताओं के अलावा फिल्म जगत के कई बड़ी हस्तियां चादर चढ़ाने पहुंचते हैं। कहते हैं कि हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में आने वाला पहला व्यक्ति था। जिसने 1332 ई. में यहां की यात्रा की।

इस दरगाह के अंदर एक स्मारक है, जिसे जलाहारा कहा जाता है। कहते हैं कि यह हजरत मोइनुद्दीन चिश्ती के समय से यहां पानी का मुख्य स्रोत था। मान्यता है कि आज भी जलाहारा के पानी का इस्तेमाल दरगाह के सभी प्रमुख कामों में किया जाता है। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि ख्वाजा साहब ने लोगों के बीच रहकर उनके दुख-दर्द बांटे। साथ ही उन्हें खुदा की दर का रास्ता दिखाया। कहते हैं जब ख्वाजा साहब मक्का-मदीना गए तब उन्हे सपने में अल्लाह के तहाफ से हुकूम हुआ कि वो अजमेर जाएं और वहां की दरगाह पर चादर चढ़ाएं। मान्यता है कि तब से लेकर आजतक अजमेर शरीफ में चादर चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 Akshaya Tritiya 2019 Puja Vidhi, Vrat Katha: ये है अक्षय तृतीया की पूजा-विधि, जानिए व्रत-कथा
2 Akshaya Tritiya 2019 Puja Aarti: अक्षय तृतीया पर सुख-समृद्धि के लिए ऐसे करें भगवान विष्णु की यह आरती
3 Happy Akshaya Tritiya 2019 Wishes Images, Quotes, Status, Wallpaper: इन शानदार शुभकामना संदेशों के जरिए अक्षय तृतीया पर दोस्तों और रिश्तेदारों को करें विश