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Ramadan 2019 Helpline: जानें रमज़ान का मतलब और जकात के सही मायने, Jansatta हेल्पलाइन करेगी हर शंका का समाधान

Ramadan Mubarak 2019 Sixth Roza, Ramzan Mubarak: रमज़ान के पाक माह के दौरान शंका रहती है कि भूल से भी कोई गलती न हो जाए। ऐसी शंकाओं का समाधान करने के लिए Jansatta.com लाया है खास हेल्पलाइन। इसमें हम अब तक पूछे गए सवालों के जवाब इस्लामिक जानकारों की मार्फत दे रहे हैं।

Ramadan Mubarak 2019: जनसत्ता हेल्पलाइन करेगी हर शंका का समाधान।

आजाद खान

Ramadan 2019 Sixth Roza: माह-ए-मुकद्दस रमज़ान शुरू हो चुका है। मुस्लिम भाई रोजे रखकर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। इस पाक महीने में सवाब कमाना हर किसी की दिली ख्वाहिश है। ऐसे में शंका रहती है कि भूल से भी कोई गलती न हो जाए। ऐसी शंकाओं का समाधान करने के लिए Jansatta.com लाया है खास हेल्पलाइन। इसमें हम अब तक पूछे गए सवालों के जवाब इस्लामिक जानकारों की मार्फत दे रहे हैं। अगर रमज़ान या रोजे को लेकर आपकी कोई शंका है तो हमें ramadan.jansatta@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं। साथ ही, 9450393303 पर वॉट्सऐप कर सकते हैं।

सवाल: रमज़ान का क्या मतलब है और रमज़ान क्यों मनाया जाता है? – शाहिद सामी, दरभंगा
जवाब: रमज़ान या रमादान मुस्लिमों का पाक त्योहार है। एक महीने के रोजे रखने को रमज़ान कहते हैं। रोजे महीने के 30 दिन रखे जाते हैं। मुस्लिम समुदाय के नियमों के अनुसार, चांद देखकर रोजा रखा जाता है। वहीं, 30 दिन के रोजे के बाद भी चांद का दीदार होने ईद मनाई जाती है। इस्लाम में रमज़ान के पाक माह में 30 दिन के रोजे रखने का हुक्म अल्लाह ने कुरान में दिया है।

सवाल: अगर पूरे दिन कुछ भी न खाया हो, लेकिन रोज़े की नीयत भी न की हो तो क्या रोज़ा मान्य होगा? – शफीक आलम, देवबंद
जवाब: शरीयत के मुताबिक, रोजे के लिए नियम शर्तें तय की गई हैं। अगर किसी ने रोजे़ का इरादा नहीं किया है। चाहे पूरे दिन कुछ भी खाया-पिया न हो, रोज़ा नहीं माना जाएगा।

सवाल: आमाले शबे कद्र में क्या सौ रकअत नमाज़ को जमात में पढ़ सकते हैं? – फहीना, अलीगढ़
जवाब: अगर मुस्तहब्बी नमाज पढ़ी जाएगी, तो जमात से नहीं हो सकती।

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सवाल: जकात कितने सोने पर अनिवार्य है? – मोहम्मद खालिद, कोलकाता
जवाब: जकात लगभग सत्तर ग्राम सोने पर अनिवार्य है।

सवाल: क्या शबे कद्र में जागना जरूरी है और सवाब कितना है? – यूसुफ आलम, नई दिल्ली
जवाब: शबे कद्र की रातों में जागना का बेहद सवाब है। इबादत के जरिए गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।

सवाल: कोई व्यक्ति 10 दिनों के मकसद से यात्रा पर जाए और रोज़ा रखे। फिर जल्द ही वापस आ जाए तो क्या उसके रोजे़ सही होंगे? – दानिश खान, फरीदाबाद
जवाब: जो रोज़े 10 दिनों के इरादे के अनुसार रख गए हैं, वे सही होंगे।

सवाल: क्या हज पर रखी गई राशि पर खुम्स का भुगतान करना भी जरूरी है? – आजाद खान, आजमगढ़
जवाब: अगर उस राशि पर खुम्स का भुगतान नहीं किया गया है तो उस राशि पर भी खुम्स का भुगतान होगा।

सवाल: शबे कद्र में कौन-सी इबादत करनी चाहिए? – मोहम्मद नदीम, लखनऊ
जवाब: नफल पढ़ें और तिलावत करें। बेहतर है कि कजा-ए-उमरी (जो नमाज जिंदगी में छूट गई हो) अदा करें और दुआ मांगे।

सवाल: क्या जकात कपड़े इत्यादि की शक्ल में दी जा सकती है? – माजिद अली, भोपाल
जवाब: जी हां, दी जा सकती है।

सवाल: सोने और चांदी के जेवर की जकात किस रेट से निकाली जाएगी? – मोहम्मद सैफ, कानपुर
जवाब: सोने और चांदी के जेवर की जकात बाजार में इस जेवर की कीमत के हिसाब से निकाली जाएगी।

आप भी ऐसे पूछ सकते हैं अपने सवाल : अगर रोज़े से संबंधित कोई शंका है या इस्लाम के नियमों को लेकर कोई सवाल तो Jansatta.com की इस हेल्पलाइन पर मिलेगा हर समाधान। आप हमें Ramadan.jansatta@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं। साथ ही, 9450393309 नंबर पर वॉट्सऐप करके भी सवाल पूछ सकते हैं। आप तुरंत ही जवाब दिया जाएगा। साथ ही, हेल्पलाइन की खबर में आपका व आपके शहर का नाम भी शामिल किया जाएगा।

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