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रक्षाबंधन का ये है शुभ मूहर्त, राखी बांधने से पहले ध्यान रखें भाई-बहन

Raksha Bandhan Puja Shubh Muhurat: रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के प्रेम का त्योहार है, जब एक बहन अपने भाई की कलाई पर राखी का धागा बांधती है तो भाई उसके जीवन में आने वाली सारी परेशानी में उसका साथ निभाने का वचन देता है।

Raksha Bandhan Puja Shubh Muhurat: इस बार रक्षाबंधन 7 अगस्त यानी आने वाले सोमवार को मनाया जाएगा।(फोटो सोर्स- यूट्यूब)

रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के प्रेम का त्योहार है, जब एक बहन अपने भाई की कलाई पर राखी का धागा बांधती है तो भाई उसके जीवन में आने वाली सारी परेशानी में उसका साथ निभाने का वचन देता है। इस बार रक्षाबंधन 7 अगस्त (सोमवार) को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन को देखते हुए लोग भाई-बहन अपनी छुट्टियों के इंतजाम में भी जुट गए हैं। लेकिन इन सब तैयारियों के साथ इस त्योहार पर शुभ मूहर्त का भी खास ख्याल रखा जाता है, आइए जानते हैं भाई-बहन के प्यार और स्नेह के इस त्योहार से पहले रक्षाबंधन पर शुभ मुहूर्त कब होगा? और क्या है विधि विधान?

शुभ मूहर्त

हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण पूर्णिमा यानि रक्षाबंधन के लिए 7 अगस्त की सुबह 11.07 बजे से बाद दोपहर 1.50 बजे तक शुभ समय है। इसी दिन चंद्र ग्रहण भी होगा जो रात्रि 10.52 से शुरू होकर 12.22 तक रहेगा। चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक लग जाएगा। इससे पहले भद्रा का प्रभाव रहेगा। चंद्रग्रहण पूर्ण नहीं होगा बल्कि खंडग्रास होगा। पंडितों के अनुसार भद्रा योग और सूतक में राखी नहीं बांधनी चाहिए।

पंडितों के अनुसार चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक लग जाता है। सूतक लगने से कुछ देर पहले तक भद्रा प्रभावकारी रहेगी। भद्रा और सूतक के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। इसका मतलब है कि भद्रा समाप्त होने सूतक शुरू होने के बीच का कुछ समय ही आपके लिए राखी बांधने के लिए शुभ है।


 

राखी की थाली में क्या-क्या रखें

रक्षा बंधन का पावन पर्व हम सभी‍ बड़े ही उत्साह से मनाते हैं। इस पर्व को मनाते समय कोई भूल न हो, उसके लिए हमें कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। आइए जानते हैं रक्षा बंधन की पूजा की थाली में हम क्या-क्या सामग्री रखें।

– भाई को बांधने के लिए राखी।
– तिलक करने के लिए कुंकु व अक्षत।
– नारियल।
– मिठाई।
– सिर पर रखने के लिए छोटा रुमाल अथवा टोपी।
– इसके अलावा आप भाई को अपनी तरफ से कोई गिफ्ट या उपहार या नगदी देना चाहे तो वो रख सकते हैं।
– आरती उतारने के लिए दीपक।

वर्तमान में यह त्यौहार बहन-भाई के प्यार का पर्याय बन चुका है, कहा जा सकता है कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है। एक ओर जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन बहन को देता है, तो दूसरी ओर बहन भी भाई की लंबी उम्र के लिये उपवास रखती है।

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