Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। हर साल श्रावण पूर्णिमा को राखी का पर्व मनाया जाता है। इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं। हालांकि, कई लोग इस दिन घर में विराजमान लड्डू गोपाल को भी राखी बांधते हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान को रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। अगर आप भी इस रक्षाबंधन पर लड्डू गोपाल को राखी बांधने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं सही विधि…
रक्षाबंधन पर राखी बांधने का समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, 28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा आप राहुकाल को छोड़कर किसी भी समय राखी बांध सकते हैं।
भविष्य पुराण में मिलता है रक्षा सूत्र का उल्लेख
(उत्तर पर्व) के अध्याय 137 में मिलता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर का संवाद है तथा श्रावण पूर्णिमा पर रक्षा बांधने का विधान और इंद्र-शची से जुड़ा प्रसंग बताया गया है
रक्षाबंधन से जुड़ी प्रमुख पौराणिक कथाओं में भविष्य पुराण के उत्तर पर्व के अध्याय 137 में मिलती है, जो भगवान कृष्ण और युधिष्ठिर के बीच हुए संवाद का है। इसमें उन्होंने श्रावण पूर्णिमा पर रक्षा सूत्र बांधने के साथ इंद्र-शची से जुड़ा प्रसंग सुनाया था। इस पौराणिक कथा के अनुसार, देवासुर संग्राम के समय इंद्राणी शची ने इंद्र की रक्षा के लिए रक्षा सूत्र तैयार किया था। बाद में देवगुरु बृहस्पति ने इंद्र की कलाई पर वह रक्षा सूत्र बांधा।
रक्षासूत्र बांधते समय इस मंत्र का उल्लेख मिलता है,
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
अर्थ- जिस रक्षा सूत्र से शक्तिशाली दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से तुम्हें बांधा जाता है। हे रक्षासूत्र, तुम अपने संकल्प से विचलित न होना।
क्या लड्डू गोपाल को राखी बांध सकते हैं?
लड्डू गोपाल को राखी या रक्षासूत्र बांधने के बारे में शास्त्रों में नहीं लिखा है। हालांकि लड्डू गोपाल को राखी बांधना धार्मिक भावना और प्रचलित परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। इसलिए आप धार्मिक परंपरा और श्रद्धा के रूप में लड्डू गोपाल को राखी बांध सकते हैं।
रक्षाबंधन पर लड्डू गोपाल को राखी बांधने की विधि
रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद पूजा की थाली तैयार करें, जिसमें राखी, रोली, अक्षत, पीला चंदन, नारियल, घी का दीपक और मिठाई रख लें।
अब लड्डू गोपाल को विधिवत दूध, दही, गंगाजल,शहद आदि से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें वस्त्र, आभूषण, बांसुरी अर्पित करने के साथ मोर का मुकुट लगाएं। फिर उन्हें आसन में विराजमान करें। इसके बाद चंदन से तिलक लगाने के साथ अक्षत लगाएं। इसके साथ फूल, माला, चढ़ाएं और उन्हें राखी बांध दें।
राखी बांधने के बाद लड्डू गोपाल को मिठाई का भोग लगाएं जिसमें तुलसी दल अवश्य रखें। इसके बाद घी की दीपक जलाकर उनकी आरती कर लें और अंत में उनसे अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करें।
श्री कृष्ण की आरती (Shri Krishna Aarti)
आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजन्तीमाला बजावैं मुरलि मधुर बाला॥
श्रवण में कुंडल झलकाता नंद के आनंद नन्दलाला की। आरती…।
गगन सम अंगकान्ति काली राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर-सी अलक कस्तूरी तिलक।
चंद्र-सी झलक ललित छबि श्यामा प्यारी की। आरती…।
कनकमय मोर मुकुट बिलसैं देवता दरसन को तरसैं।
गगन से सुमन राशि बरसैं बजै मुरचंग मधुर मृदंग।
ग्वालिनी संग-अतुल रति गोपकुमारी की। आरती…।
जहां से प्रगट भई गंगा कलुष कलिहारिणी गंगा।
स्मरण से होत मोहभंगा बसी शिव शीश जटा के बीच।
हरै अघ-कीच चरण छवि श्री बनवारी की। आरती…।
चमकती उज्ज्वल तट रेनू बज रही बृंदावन बेनू।
चहुं दिशि गोपी ग्वालधेनु हंसत मृदुमन्द चांदनी चंद।
कटत भवफन्द टेर सुनु दीन भिखारी की। आरती…।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और उपलब्ध शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित है। भविष्य पुराण के उत्तर पर्व, अध्याय 137 में रक्षासूत्र का उल्लेख मिलता है, जबकि लड्डू गोपाल को राखी बांधने की परंपरा का विशेष विधान स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे धार्मिक आस्था और प्रचलित परंपरा के रूप में समझें। अलग-अलग परंपराओं और मतों में पूजा-विधि भिन्न हो सकती है।
