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जानिए, क्यों भद्रा में राखी बांधना है अशुभ, इस बार कब तक रहेगा ये काल

इस बार राखी बांधने के लिए कुछ ही घंटे शुभ बताए जा रहे हैं।
अपने भाई को राखी बांधती एक छोटी बच्ची।

रक्षा बंधन के दिन भद्रा है, इस दौरान बहन द्वारा भाई को राखी नहीं बांधी जाती। माना जाता है कि भद्रा में राखी बांधना अशुभ होता है। इस बार भद्रा काल के साथ ही खंडग्रास चंद्र ग्रहण भी है। चंद्र ग्रहण के सूतक में भी राखी नहीं बांधी जाती, ऐसे में राखी बांधने का शुभ समय काफी कम है। बताया जा रहा है कि 7 अगस्त को सुबह 11.07 बजे तक भद्रा काल रहेगा और 1.52 मिनट पर चंद्र ग्रहण के सूतक लग जाएंगे। ज्योतिष विद्वानों के मुताबिक सूतक और भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती।

एक लोक कथा के मुताबिक रावण की बहन शूर्पणखा ने उन्हें भद्रा काल में राखी बांधी थी, जिसकी वजह से रावण का विनाश हुआ था। अन्यथा रावण का विनाश नहीं होता। ऐसी ही कई कथाएं हिंदू समाज में प्रचलित हैं। ऐसे में भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। इसके अलावा एक मान्यता है कि जब तक प्रमुख तीन देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश साथ में मौजूद नहीं होते हैं तो कोई भी पूजा संपन्न नहीं मानी जाती। हर पूजा में तीनों देवों का ध्यान किया जाता है। बताया जाता है कि भद्रा काल में भगवान शंकर तांडव कर रहे होते हैं। इस वजह से वे गायब रहते हैं और इसिलिए कोई भी शुभ काम भद्रा काल में नहीं किया जाता।

भद्रा काल के दौरान अगर आपको शुभ काम की शुरुआत करना जरूरी है तो इसके लिए आप उस दिन व्रत रखकर ऐसा कर सकते हैं। वैसे भी भद्रा के दिन व्रत करने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने वाले लोगों पर नकारात्मक ऊर्जा हावी नहीं होती।

इस बार भद्रा काल के साथ ही रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण पड़ने से और ज्यादा सावधानियां बरतनी पड़ेंगी। चंद्र ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक लग जाएंगे। सूतक में भी राखी नहीं बांधी जाती और ना ही कोई शुभ कार्य किया जाता है। चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को भी काफी सावधानियां बरतनी होती है। गर्भवती महिलाओं को इस दौरान घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है।

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