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रक्षाबंधन 2017: भारत के राज्यों में इस तरह अनेक नामों से जाना जाता है रक्षाबंधन का पर्व, आप भी जानिए

Raksha Bandhan 2017 Date: उत्तरी भारत में रक्षाबंधन को श्रावण पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। श्रावण पूर्णिमा को भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक नामों से जाना जाता है। उत्तर भारत में इसे रक्षा बंधन पर्व के रूप में मनाया जाता है तो दक्षिण भारत रक्षाबंधन को नारियल पूर्णिमा और अवनी अवित्तम के रूप में मनाया जाता है।

Raksha Bandhan 2017: इस बार रक्षाबंधन 7 अगस्त यानी आने वाले सोमवार को मनाया जाएगा।(फोटो सोर्स- यूट्यूब)

हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस बार रक्षाबंधन 7 अगस्त यानी आने वाले सोमवार को मनाया जाएगा। इसे आमतौर पर भाई-बहनों का पर्व मानते हैं लेकिन, अलग-अलग स्थानों एवं लोक परम्परा के अनुसार अलग-अलग रूप में रक्षाबंधन का पर्व मानते हैं।

वैसे इस पर्व का संबंध रक्षा से है। जो भी आपकी रक्षा करने वाला है उसके प्रति आभार दर्शाने के लिए आप उसे रक्षासूत्र बांध सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने रक्षा सूत्र के विषय में युधिष्ठिर से कहा था कि रक्षाबंधन का त्योहार अपनी सेना के साथ मनाओ इससे पाण्डवों एवं उनकी सेना की रक्षा होगी। श्रीकृष्ण ने यह भी कहा था कि रक्षा सूत्र में अद्भुत शक्ति होती है।

उत्तरी भारत में रक्षाबंधन को श्रावण पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। श्रावण पूर्णिमा को भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक नामों से जाना जाता है। उत्तर भारत में इसे रक्षा बंधन पर्व के रूप में मनाया जाता है, दक्षिण भारत में इस पर्व के कई नाम हैं। दक्षिण भारत रक्षाबंधन को नारियल पूर्णिमा और अवनी अवित्तम के रूप में मनाया जाता है तो मध्य भारत में कजरी पूनम और गुजरात में पवित्रोपना के रूप में मनाया जाता है।

वहीं महाराष्ट्र में रक्षाबंधन को नारियल पूर्णिमा कहते हैं, इस दिन सभी समुद्र के किनारे इकट्ठा होकर समुद्र में नारियल चढ़ाते हैं की समुद्र उनके ऊपर आपदा नहीं लायेगे। तमिलनाडु, केरल महारास्ट्र,ओडिशा के दक्षिण भारतीय ब्राह्मण इसे ‘अवनि अवित्तम’ कहते हैं। राजस्थान में ‘राम राखी लूम्बा’ बांधने का प्रचलन है। राम राखी में लाल डोरे पर एक पीली चोटी वाला फुदना लगा होता जिसे केवल भगवान को बांधते हैं। कुछ प्रान्तों में भाई के कानों के ऊपर भुजरिया लगाने की प्रथा है।

पड़ोसी देश नेपाल के तरेाई वाले क्षेत्र में यह पर्व ‘भाई टीका’ के नाम से प्रसिद्ध है। तराई क्षेत्र में रहने वाले भाइयों को फल-फूल और मिठाई लेकर अपनी शादीशुदा बहन के घर जाने का रिवाज है। जहां बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांध कर माथे पर टीका लगाती हैं और अपने भाई के लिए मंगलकामना करती हैं।

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