Rajyog In Kundli: वैदिक ज्योतिष में कुछ ऐसे योग बताए गए हैं, जो जन्म कुंडली में होने से व्यक्ति के स्वभाव, व्यक्तित्व से लेकर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक स्थिति पर असर देखने को मिल सकता है। इस योगों में जन्मे जातकों को धन, प्रतिष्ठा, पारिवारिक जीवन और सामाजिक सम्मान पर गहरा प्रभाव डालते हैं। फलदीपिका के छठे अध्याय योग में कुछ योगों के बारे में विस्तार से दिया गया है। शुभमाला (सुमाला) योग, मालिका योग, लक्ष्मी योग और गौरी योग ये चार योग काफी महत्वपूर्ण माने जाते है। इन योगों के बनने पर व्यक्ति का जीवन शुभ या अशुभ दिशा में प्रभावित हो सकता है। जहां शुभमाला, लक्ष्मी और गौरी योग धन, वैभव, नेतृत्व, सम्मान और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं, वहीं अशुभमाला योग जीवन में संघर्ष, विवाद और कष्टों का कारण बन सकता है। आइए आज ‘कुंडली रहस्य’ श्रृंखला के इस लेख में जानिए इन चारों योगों का कैसे होता है निर्माण और इन योगों में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के जीवन में कैसा असर होता है…

कैसे बनते हैं शुभमाला, मालिका, लक्ष्मी और गौरी योग?

श्लोक

सर्वे पञ्चसु षट्सु सप्तसु शुभा मालाश्च पङ्क्त्या स्थिता
यद्येवं मृतिषड्व्ययादिषु गृहेष्वत्राशुभाख्याः स्मृताः ।
स्वर्क्षोच्चे यदि कोणकण्टकयुतौ भाग्येशशुक्रावुभौ
लक्ष्म्‍याख्‍योऽथ तथाविधे हिमकरे गौरीति जीवेक्षिते ॥२१॥

इस श्लोक में चार योग बताये हैं । शुभ माला, अशुभ माला, लक्ष्मी और गौरी । इन चारों योगों को क्रमशः बताते हैं।

शुभ माला योग- यदि सब ग्रह पंक्ति से पांचवें, छठे, सातवें घरों में हों तो शुभ माला योग होता है।

अशुभ माला योग- यदि समस्त ग्रह छठे, आठवें, बारहवें इन स्थानों में क्रम से हों तो अशुभ माला योग होता है।

लक्ष्मी योग- यदि नवें स्थान का स्वामी और शुक्र दोनों अपने घर में या उच्चराशि में स्थित होकर लग्न से केन्द्र या त्रिकोण में हों तो लक्ष्मी योग होता है।

गौरी योग- यदि चन्द्रमा स्वराशि या उच्चराशि का होकर लग्न से केन्द्र या त्रिकोण में हो और बृहस्पति उसे देखता हो तो गौरी योग होता है।

सुमाला योग में जन्मा व्यक्ति

जनाधिकारी क्षितिपालशस्तो भोगी प्रदाता परकार्यकर्ता ।
बन्धुप्रियः सत्सुतदारयुक्तो धीरः सुमालाइ्वययोगजातः ॥२२॥

जो व्यक्ति सुमाला या शुभमाला योग में उत्पन्न होता है वह अनेक व्यक्तियों पर अधिकार रखने वाला भोगी, दाता, बन्धुप्रिय, उत्तम स्त्री पुत्रों से युक्त और धीर हो । और राजा द्वारा प्रशंसित या सम्मानित हो । ऐसा व्यक्ति ‘परकार्यकर्ता’ हो। ‘परकार्यकर्ता’ शब्द के दो अर्थ हैं। दूसरे का कार्य करने वाला अर्थात् नौकरी पेशा हो । इस शब्द का दूसरा अर्थ हो सकते है दूसरे का उपकार करने वाला।

मालिका योग में जन्मा व्यक्ति

कुमार्गयुक्तोऽशुभमालिकारख्ये दुःखी परेषां वधकृत् कृतघ्नः ।
स्यात्कातरो भूसुरभक्तिहीनो लोकाभिशप्तः कलहप्रियः स्यात् ॥२३॥

जो अशुभ मालिका योग में उत्पन्न होते हैं वे दूसरों का वध करने वाले, कृतघ्न, कलहप्रिय (झगड़ालू) और कुमार्गगामी होते हैं। ऐसे लोग कायर होते हैं और लोग उनकी निन्दा करते हैं । ऐसे व्यक्ति ब्राह्मणों का (या बड़ों का) सम्मान नहीं करते और दुःख उठाते हैं।

लक्ष्मी योग में जन्मा व्यक्ति

नित्यं मङ्गलशीलया वनितया क्रीडत्यरोगी धनी
तेजस्वी स्वजनान् सुरक्षति महालक्ष्मीप्रसादालायः ।
श्रेष्ठान्दोलिकाया प्रयाति तुरगस्तम्बेरमध्यासितो
लोकानन्दकरो महीपतिवरो दाता च लक्ष्मीभवः ॥२४॥

जो लक्ष्मी योग में उत्पन्न होता है वह अच्छे स्वभाव वाली स्त्री के साथ नित्य क्रीड़ा करता है। ऐसा व्यक्ति तेजस्वी होता है। अपने आदमियों की अच्छी प्रकार रक्षा करने में समर्थ होता है और लक्ष्मी का कृपा पात्र बनता है। लक्ष्मी की कृपा पात्र होने का अर्थ है धनी होना। ऐसा व्यक्ति नीरोग रहे। घोड़ा, हाथी, पालकी की सवारी उसे प्राप्त हो। सब लोगों के लिये आनन्द कारक हो। उसकी दानवीरता की प्रशंसा हो और पृथ्वी का श्रेष्ठ स्वामी हो। संक्षेप में लक्ष्मी योग उत्तम राज योग माना गया है।

गौरी योग में जन्मा व्यक्ति

सुन्दरगात्रः श्लाघितगोत्रः पार्थिवमित्रः सद्गुणपुत्रः ।
पङ्कजवक्त्रः संस्तुतजन्त्रो राजति गौरीयोगसमुत्थः ।। २५ ।।

जो गौरी योग में उत्पन्न हो वह सुन्दर शरीर वाला, राजा का मित्र, सद्गुणों और पुत्रों से युक्त, शत्रुओं को जीतने वाला, प्रशंसित हो। उसकी वंश की सब लोग प्रशंसा करें और उसका मुख कमल के समान हो। संक्षेप में, इसे भी बहुत शुभ योग माना गया है।

मेष राशिफल जून से दिसंबर 2026वृषभ राशिफल जून से दिसंबर 2026
मिथुन राशिफल जून से दिसंबर 2026कर्क राशिफल जून से दिसंबर 2026
सिहं राशिफल जून से दिसंबर 2026कन्या राशिफल जून से दिसंबर 2026
तुला राशिफल जून से दिसंबर 2026वृश्चिक राशिफल जून से दिसंबर 2026
धनु राशिफल जून से दिसंबर 2026मकर राशिफल जून से दिसंबर 2026
कुंभ राशिफल जून से दिसंबर 2026मीन राशिफल जून से दिसंबर 2026

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई ज्योतिषीय जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित है। ज्योतिष एक विश्वास और अध्ययन की परंपरा है, इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी की विधि नहीं माना जाता। राशिफल और ज्योतिषीय विश्लेषण को मार्गदर्शन या मनोरंजन के रूप में लें। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय (जैसे स्वास्थ्य, करियर, वित्त या अन्य जीवन संबंधी मामलों) के लिए अपने विवेक और विशेषज्ञ सलाह को प्राथमिकता दें।