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यहां जंजीरों में बांध लाए जाते हैं ‘भूत’ से पीड़ित, बालाजी के इस मंदिर में बहती रहती है लगातार पानी की धारा

बालाजी मंदिर के लिए माना जाता है कि मुगल शासनकाल के दौरान कुछ बादशाहों ने इस मूर्ति को नष्ट करने का प्रयास किया

माना जाता है कि बालाजी की इस मूर्ति को जितनी बार खोदा गया, ये उतनी बार गहरी होती चली गई।

राजस्थान के दौसा जिले में स्थित भगवान हनुमान जी का मंदिर है। इस मंदिर की मान्यता सिर्फ राम भक्त हनुमान के कारण नहीं है बल्कि यहां के चमत्कारी शक्तियों और उनकी प्रख्यातियों के कारण भी है। भगवान बालाजी राम भक्त हनुमान जी का दूसरा नाम है। भारत के कई हिस्सों में हनुमान जी को बालाजी कहकर पुकारा जाता है। इस मंदिर में भगवान बालाजी की मूर्ति के बराबर में एक छेद है जिसमें से पानी की एक धारा लगातार बहती रहती है और उसे बालाजी के चरणों में इकठ्ठा कर लिया जाता है और भक्तों में प्रसाद के रुप में व्यतीत किया जाता है।

इस मंदिर के लिए मान्यता है कि यहां सालों पहले हनुमान जी और प्रेत राजा अरावली पर्वत पर प्रकट हुए थे। इसी कारण से बुरी आत्माओं और काले जादू से पीड़ित लोग यहां छुटकारा पाने के लिए आते हैं। शनिवार और मंगलवार को यहां आने वाले भक्तों की संख्या लाखों में पहुंच जाती है। कई गंभीर रोगियों को जंजीर से बांध कर यहां लाया जाता है। माना जाता है कि यहां से बिना किसी दवा और तंत्र और मंत्र के बिल्कुल ठीक होकर लौटते हैं।

इस मंदिर के लिए माना जाता है कि मुगल शासनकाल के दौरान कुछ बादशाहों ने इस मूर्ति को नष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन हर बार उन्हें असफलता ही हाथ लगी। माना जाता है इस मूर्ति को जितनी बार खोदा गया, ये उतनी बार गहरी होती चली गई। माना जाता है कि ब्रिटिश काल में बालाजी ने अपना सैंकड़ों वर्ष पुराना चोला खुद ही त्याग दिया था। लोग इसे गंगा में प्रवाहित करने ले जा रहे थे तो ब्रिटिश अफसर ने शुल्क लेना चाहा तो ये चोला कभी भारी हो जाता तो कभी हल्का। जिसके कारण अफसर ने हार मान कर उन्हें जाने दिया।

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