ताज़ा खबर
 

ऐसी भगति करै रैदासा…

Raidasa doing such devotion

Author Published on: February 3, 2020 3:10 AM
sant ravidas jayanti 2020, ravidas jayanti 2020, 9th February 2020, guru ravidas jayanti, sant ravidas doha, sant ravidas doha in hindi, sant ravidas doha meaning, sant ravidas doha relevance in todays time, sant ravidas, sant ravidas quotes in hindi, sant ravidas quotes, guru ravidas quotes in hindi, sant ravidas suvichar, sant ravidas anmol vachan, ravidas jayanti kaise manaye, sant ravidas aur samaj, ravidas jayanti kab hai, guru ravidas jayanti in india, when is guru ravidas jayanti, guru ravidas jayanti in india calender, guru ravidas jayanti celebrationsसंत रविदास की साधना प्रेमा भगति है, जिसका मूलाधार अहंकार की निवृत्ति है।

संत रविदास ऐसे संत-कवि थे, जिनके भीतर पल-पल परमात्मा को पाने की भारी तड़प थी। बाहरी जीवन के बजाय भीतरी यात्रा में सतत सावधान महात्मा रविदास ने ‘प्रभुजी तुम चंदन हम पानी, जाके अंग-अंग बास समानी’ की रट लगा वैष्णव भक्ति धारा का अप्रतिम प्रसार किया। संसार में रहते हुए भी विराग को जीवन बनाकर संत रैदास ने भक्तिभाव की ऐसी अलख जगाई, जो सदियां बीत जाने के बाद आज भी असंख्य लोगों के लिए आकर्षण एवं प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।

सनातन नक्षत्र रविदास

सात शताब्दियों पहले संत रविदास ऐसे लोकसंवादी महात्मा हुए, जिन्होंने शास्त्रीय सिद्धांतों में बंधी भक्ति को अपने अलौकिक कृतित्व से समाज के प्रत्येक वर्ग लिए सुलभ कर दिया। काशी में जन्मे और पले-बढ़े रैदास ने स्वामी रामानंदाचार्य से राम नाम की दीक्षा पाकर सदाचार, सद्भाव और प्रेम से निर्गुण और सगुण भक्ति का ऐसा विस्तार किया, जिसने राजा-रंक के साथ ही लोक और शास्त्र के भेद को समाप्त कर दिया। संत साहित्य के विलानों के हिसाब से वे निर्गुण भक्ति धारा के साधक थे। महात्मा कबीर, धन्ना, सैन और पीपा उनकी गुरु परंपरा में उनके साथी थे। परमात्मा के सवर्सुलभ निर्गुण स्वरूप का उन्होंने भक्तिविभोर होकर व्यापक प्रसार किया। संत रविदास को ही आम बोलचाल में संत रैदास के नाम से पुकारा जाता है।

वाणी विमल रैदास की

सोलहवीं सदी में हुए भक्त चरित्र के अनुपम दृष्टा एवं गायक नाभादास ने भक्तमाल में महात्मा रैदास के लोकोत्तर व्यक्तित्व को प्रकट करते हुए सूत्रात्मक रूप से लिखा – संदेह ग्रंथी खंडन निपुण वाणी विमल रैदास की। नाभादास लिखते हैं, संतशिरोमणि रैदास की वाणी मानव मन में पसरे संदेह की गांठ को तोड़ती है। संशय की गुत्थियों को सुलझाने में सहायक है।

हाथ करम मुख राम

रैदास एक ओर भजन करते थे, दूसरी ओर सांसारिक कार्यों का निर्वहन पूरे मनोयोग से करते थे। कर्म और भक्ति के बीच ज्ञान का सेतु बनाकर जूते सीने के अपने औजारों से जीवन दर्शन को समग्र रूप में अभिव्यक्त करते थे। उनके हाथ में रांपी और कांटा थे पर मन में लौ राम नाम की लगी थी।

तो कठौती में गंगा

लोकदृष्टा रैदास ने लोक-जीवन में कार्य के मूल्य को साधना के तौर पर स्वीकारा। उन्हें अपनी जाति या वर्ण पर कोई अहंकार या दुत्कार नहीं है। वे परमात्मा के सामने आत्मदैन्य को प्रकट करते हैं। मन की शुद्धि को सबसे बड़ी शुद्धि मानते हैं। उनकी कहा वह वाक्यांश प्रसिद्ध है जिसका तात्पर्य है कि मन शुद्ध है तो जूते सीने वाली कठौती में भी गंगा विराजती है – मन चंगा तो कठौती में गंगा।
संत रैदास ने मनुष्य की पहचान भगवान के अंश के रूप में स्थापित की। उनका मानना था कि एक ही परमात्मा के अंश सारे जीव परमात्मा को समान रूप से प्राप्त कर सकते हैं। परमात्मा किसी जीव में कोई भेदभाव नहीं करते। अपने गुरु स्वामी रामानंद के भक्ति सिद्धांत को ही आगे बढ़ते हुए रैदास ने घोषणा की, भक्ति के क्षेत्र में कोई जात-पात नहीं होती। महात्मा रैदास ऐसी भक्ति का निषेध करते हैं, जिसमें आडंबर हो। हाथ में माला हो, गीता-भागवत रोज पढ़ता हो पर हृदय शुद्ध नहीं हो तो ये सब व्यर्थ है।

राम नाम का रसायन

संत रविदास की साधना प्रेमा भगति है, जिसका मूलाधार अहंकार की निवृत्ति है। भक्ति और अभिमान साथ-साथ नहीं रह सकते। संत रैदास का मानना है कि जैसे कोई सुहागिन स्त्री अपने प्रेमास्पद के समक्ष संपूर्ण समर्पण करके प्रेम तत्व को जान लेती है, ठीक वैसे ही भक्ति पंथ का सार वही जीव जान लेता है, जो अपना सर्वस्व परमात्मा को समर्पित कर देता है। वे कहते हैं कि यदि जीभ से कुछ चखना है तो राम नाम का रसायन चखें। समकालीन समाज को झकझोरने के लिए उन्होंने मानव मात्र में उस परम सत्ता का वास बताया, जो सबके भीतर बैठकर सभी को संचालित करता है। रैदास कहते हैं-वही बाभन जो ब्रह्म पहचाने। सब जीवों में एक ही माने।। सब का लहूं एक-जैसा है। वह परमेश्वर ही सबकी देह के अंदर बैठकर उन्हें चला रहा है।

शास्त्री कोसलेंद्रदास

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 सर्वग्राह्य साधना पद्धति ‘विपश्यना’
2 शंख, चक्र, गदा और पद्म का अर्थ व महत्व, भगवान विष्णु करते हैं धारण
3 Finance Horoscope Today, February 02, 2020: मेष, वृश्चिक और कुंभ वालों को आर्थिक लाभ, जानिए अपना वित्त राशिफल