Gemstone Astrology: वैदिक ज्योतिष में पुखराज को गुरु बृहस्पति का प्रमुख रत्न माना जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह शुभ स्थिति में हो या जिन्हें ज्योतिषीय सलाह के अनुसार गुरु को मजबूत करने की आवश्यकता हो, उनके लिए पुखराज धारण करना लाभकारी माना जाता है। यह रत्न ज्ञान, धन, वैवाहिक सुख, संतान सुख, करियर और सम्मान में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, किसी भी रत्न को धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषी से कुंडली का विश्लेषण कराना आवश्यक होता है। आइए जानते हैं पुखराज धारण करने की विधि और लाभ…
किन राशियों के लिए शुभ माना जाता है पुखराज?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार धनु और मीन राशि के स्वामी ग्रह गुरु हैं, इसलिए इन राशियों के जातकों के लिए पुखराज शुभ माना जाता है। इसके अलावा कुछ विशेष परिस्थितियों में कर्क, मेष और वृश्चिक राशि के जातकों को भी कुंडली के अनुसार इसे धारण करने की सलाह दी जा सकती है। यदि गुरु ग्रह शुभ भाव में हो और उसे ताकत देने की आवश्यकता हो, तब यह रत्न अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है।
पुखराज धारण करने के लाभ
- करियर और नौकरी में उन्नति के योग मजबूत हो सकते हैं।
- आर्थिक स्थिति में सुधार और धन संचय की संभावना बढ़ सकती है।
- विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है।
- शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और ज्ञान प्राप्ति में सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- पारिवारिक सुख, संतान सुख और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होने की मान्यता है।
- मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने वाला माना जाता है।
पुखराज धारण करने की सही विधि
पुखराज को गुरुवार के दिन सूर्योदय के बाद धारण करना शुभ माना जाता है। इसे सोने की अंगूठी या पेंडेंट में जड़वाकर पहनना बेहतर माना जाता है। धारण करने से पहले रत्न को कच्चे दूध, गंगाजल और शुद्ध जल से शुद्ध करें। इसके बाद पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का पूजन करें तथा “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके बाद अंगूठी को दाहिने हाथ की तर्जनी में धारण करें।
किन बातों का रखें ध्यान?
हर व्यक्ति के लिए पुखराज शुभ नहीं होता। यदि कुंडली में गुरु अशुभ स्थिति में हो या किसी विशेष योग के कारण यह रत्न अनुकूल न हो, तो इसे धारण करने से अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकते। इसलिए बिना कुंडली का विश्लेषण कराए केवल सामान्य जानकारी के आधार पर पुखराज धारण नहीं करना चाहिए।
