पुखराज पहनने से धन-दौलत में बढ़ोतरी होने की है मान्यता, जानिए किन राशियों को नहीं धारण करना चाहिए

Pukhraj kaise pehne: जानकारों की मानें तो पुखराज पहनने से बीमारियों का खतरा भी कम होता है

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जो लोग पुखराज रत्न को धारण करते हैं उन्हें बिजनेस, संपत्ति, धन और रोजगार में फायदा हो सकता है

Pukhraj dharan karne ke Fayde: ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि रत्न लोगों के जीवन पर काफी अधिक प्रभाव छोड़ते हैं। कोई सफलता पाने के लिए तो आर्थिक रूप से संपन्न होने के लिए रत्न धारण करते हैं। लोगों के स्वभाव पर भी रत्नों का असर होता है। इन्हीं रत्नों में से एक पुखराज जो बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है।

जानकार बताते हैं कि इस रत्न को धारण करने से शिक्षा जगत, धन संपत्ति और मान-सम्मान में वृद्धि होती है। पुखराज पीले रंग का दिखता है जिसे बेहद कीमती रत्न का दर्जा दिया जाता है।

क्या हैं इस रत्न को धारण करने के लाभ: ज्योतिषशास्त्र में इस बात का जिक्र मिलता है कि जो लोग पुखराज रत्न को धारण करते हैं उन्हें बिजनेस, संपत्ति, धन और रोजगार में फायदा हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों की शादी में अड़चनें आ रही हैं, यदि वो इस रत्न को पहनते हैं तो परेशानी दूर हो सकती है।

ये रत्न साहस में वृद्धि, चैतन्य व आकलन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। जानकारों की मानें तो पुखराज पहनने से बीमारियों का खतरा भी कम होता है। बृहस्पति दोष को ठीक करने, धन-वैभव की प्राप्ति, सुख-शांति और सही फैसले लेने में मददगार साबित होता है।

किन्हें पहनना चाहिए पुखराज: रत्न शास्त्र के विशेषज्ञों के मुताबिक जिनकी कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो, पीड़ित होकर लोगों के जीवन में अशुभ फल दे रहा हो उन्हें पुखराज पहनना चाहिए। माना जाता है कि यदि मेष राशि के लोग इस रत्न को पहनते हैं तो भाग्योदय और धन प्राप्ति के योग बनते हैं। इसके अलावा, कन्या और वृषभ राशियों के जातकों के लिए भी ये रत्न शुभ साबित होता है।

इन लोगों को पुखराज धारण करने से बचना चाहिए: ज्योतिष अनुसार पुखराज धारण करने से वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर व कुंभ राशि के लोगों को बचना चाहिए। इसके अलावा, इस रत्न के साथ लोगों को पन्ना, नीलम, हीरा, गोमेद व लहसुनिया जैसे रत्न नहीं धारण करना चाहिए। वहीं, जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति ग्रह छठे, आठवें व 12वें भाव का स्वामी हो तो पुखराज पहनने से बचना चाहिए।

कैसे धारण करें: बुधवार की सुबह नहाने के बाद गंगाजल में दूध मिलाकर पुखराज रख दें। अगले दिन यानी गुरुवार को कम से कम एक माला ‘ऊं बृं बृहस्पते नमः’ का जाप करें। फिर हाथ की तर्जनी अंगुली में पुखराज धारण करें। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि इस रत्न को सूर्योदय से लेकर सबुह 10 बजे तक पहनने से बचना चाहिए।

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