पीएम नरेंद्र मोदी आज 14 अप्रैल को उत्तराखंड के दौरे पर थे। इस मौके पर देहरादून और सहारनपुर बॉर्डर पर बने मां डाट काली मंदिर के दर्शन करने पहुंचे। आपको बता दें कि यह मंदिर देहरादून- सहारनपुर राजमार्ग पर, शहर के आईएसबीटी से लगभग 7-8 किमी की दूरी पर स्थित एक प्राचीन सिद्धपीठ है। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है। यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं, खासकर नवरात्रि और शनिवार के दिन भारी भीड़ देखने को मिलती है। डाट काली मंदिर को अत्यंत शक्तिशाली सिद्धपीठ माना जाता है।
वहीं कई मान्यताओं के अनुसार यह माता सती के शक्तिपीठों में से एक है, जहां देवी की दिव्य शक्ति विराजमान है। साथ ही मुख्य गर्भगृह में देवी काली की काले पत्थर की मूर्ति स्थापित है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है। साथ ही यह मंदिर “वाहन की देवी” के रूप में भी प्रसिद्ध है। लोग नई गाड़ी खरीदने के बाद यहां पूजा करवाते हैं ताकि यात्रा सुरक्षित रहे।
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डाट काली मंदिर का इतिहास
डाट काली मंदिर का इतिहास लगभग 1804 ईस्वी से जुड़ा हुआ माना जाता है। यह मंदिर उस समय स्थापित हुआ जब देहरादून-सहारनपुर मार्ग पर सुरंग का निर्माण किया जा रहा था। मान्यता के अनुसार, निर्माण कार्य बार-बार विफल हो रहा था और दिन में बनाई गई सुरंग रात में ढह जाती थी। तब एक इंजीनियर को मां काली ने सपने में दर्शन देकर उसी स्थान पर मंदिर बनाने का निर्देश दिया। इसके बाद वहां माता की मूर्ति स्थापित की गई, तब जाकर सुरंग का निर्माण सफल हुआ। एक अन्य मान्यता के अनुसार, यह मंदिर गोरखा काल में सैनिकों की रक्षा के लिए भी बनाया गया था और बाद में यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया।
डाट काली मंदिर का महत्व
श्रद्धालु मानते हैं कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है। साथ ही यहां वर्षों से अखंड ज्योति जल रही है, जो मंदिर की दिव्यता को दर्शाती है। वहीं नवरात्रि के दौरान यहां भव्य पूजा, भंडारे और विशेष अनुष्ठान होते हैं।
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