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कब है अगला प्रदोष व्रत, जानें महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Pradosh Vrat Puja Vidhi: हिंदू पंचांग के मुताबिक हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है। इस व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं।

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Pradosh Vrat November 2020: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है। इस व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं।

कई बार अलग-अलग बार होने की वजह से इस व्रत का नाम बदल भी जाता है जैसे कि मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत हो तो इस व्रत को भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक अगला प्रदोष व्रत 13 नवंबर, शुक्रवार के दिन किया जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी होने की वजह से इस दिन धनतेरस भी मनाई जाती है।

प्रदोष व्रत का महत्व (Pradosh Vrat Importance)
प्रदोष व्रत को अत्यंत पावन माना जाता है। कहते हैं कि भगवान शिव को मानने वाले सच्चे मन से प्रदोष व्रत रखते हैं तो भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि अपने ऐसे भोले भक्तों के साथ भगवान शिव हमेशा रहते हैं। इस बार प्रदोष व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में है। इस दिन धनतेरस भी मनाई जाती है।

तिथियों की मानें तो इस बार नरक चतुर्दशी भी 13 नवंबर को ही मनाई जाएगी। इसलिए इस बार इन सभी शुभ संयोगों की वजह से इस प्रदोष व्रत तो और भी ज्यादा खास माना जा रहा है। विद्वानों का मानना है कि इस दिन व्रत रखने से ना केवल भगवान शिव बल्कि भगवान विष्णु, माता महालक्ष्मी और भगवान कुबेर की भी कृपा प्राप्त हो सकती हैं। इसलिए यह कहा जा रहा है कि इस बार प्रदोष व्रत जरूर किया जाना चाहिए।

प्रदोष व्रत पूजा विधि (Pradosh Vrat Puja Vidhi)
प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान आदि कर साफ वस्त्र पहनें।
एक चौकी लें। उस पर गंगाजल के छींटें मारकर सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं।
अब इस चौकी पर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।
उन्हें सफेद चंदन का तिलक लगाकर सफेद फूलों की माला अर्पित करें।

फिर तेल का दीपक, धूप और अगरबत्ती जलाएं।
स्वयं भी सफेद रंग के आसन पर बैठकर भगवान शिव के रूप का ध्यान करें।
इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा, शिव स्तुति और शिव स्तोत्र का पाठ करें।
भगवान शिव का ध्यान लगाते हुए शिव मंत्रों का जाप करें।

अब सच्चे मन से शिव जी की आरती कर उनके जयकारे लगाएं।
आरती के बाद भगवान शिव को खीर का भोग लगाएं। अगर आप खीर का भोग ना लगा पाएं तो अपनी श्रद्धा से किसी भी सात्त्विक खाद्य पदार्थ का भोग लगा सकते हैं।
इसके बाद भगवान शिव को दंडवत प्रणाम कर पूजा संपन्न करें।

प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat Puja Ka Shubh Muhurat)
सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त – सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 6 बजकर 42 मिनट तक।
शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त – शाम 5 बजकर 28 मिनट से शाम 6 बजकर 48 मिनट तक।

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