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प्रदोष व्रत: जानिए क्या है इस व्रत का महत्व, किस समय पूजा करना रहेगा शुभ

प्रदोष व्रत की महत्वता सप्ताह के दिनों के अनुसार भी होती है। गुरु प्रदोष व्रत शत्रुओं के विनाश के लिए किया जाता है। शुक्रवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य के लिए किया जाता है।

शुक्रवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य और पति-पत्नी के रिश्ते में सुख-शान्ति के लिए किया जाता है।

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि प्रदोष व्रत रखने से दो गायों के दान करने जितना पुण्य मिलता है। इस दिन व्रत करने से व्रत करने वाले और उसके परिवार पर हमेशा भगवान की कृपा बनी रहती है। जिससे व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से परिवार हमेशा आरोग्य रहता है। साथ ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। प्रदोष व्रत की महत्वता सप्ताह के दिनों के अनुसार भी होती है। गुरु प्रदोष व्रत शत्रुओं के विनाश के लिए किया जाता है। शुक्रवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य और पति-पत्नी के रिश्ते में सुख-शान्ति के लिए किया जाता है। जिन दंपतियों को संतान की इच्छा होती है उनके लिए शनिवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत लाभकारी होता है। इससे उनकी इच्छापूर्ति होती है और संतान सुख के संकेत बनते हैं।

प्रदोष व्रत भगवान शिव के लिए किया जाता है। इस व्रत को बहुत ही फलदायक माना जाता है। इस व्रत को करने वाली स्त्री अपनी हर मनोकामना को पूरा कर सकती है। इस व्रत का महत्व तभी है जब इसे प्रदोष काल में किया जाए। सूरज डूबने के बाद और रात के होने से पहले के पहर को सांयकाल कहा जाता है। इस पहर को ही प्रदोष काल कहा जाता है। इस व्रत को करने वाली महिलाओं की इच्छाएं भगवान शिव पूरी करते हैं। प्रदोष व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को किया जाता है। आज यानि 15 नवंबर को मार्गशीष माह की त्रयोदशी है और इस दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है।

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प्रदोष व्रत का समय सूरज के डूबने के बाद 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है। इसी काल को प्रदोष काल कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस अवधि के बीच भगवान शिव कैला। पर्वत में प्रसन्न होकर नृत्य करते हैं। इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शिव की अराधना करके उन्हें प्रसन्न करना बहुत सरल होता है। आज के दिन शाम 5 बजकर 27 मिनट पर सूर्यास्त होगा। यानि शाम 8 बजे तक प्रदोष व्रत का पूजन किया जा सकता है।

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