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Posh Putrada (Vaikunta) Ekadasi 2020: पौष पुत्रदा एकादशी व्रत आज, जानिए इसकी पूजा विधि, संपूर्ण व्रत कथा और पारण का समय

Posh Putrada Ekadashi (Vaikuntha Ekadashi 2020) Vrat Katha, Pooja Vidhi: इस बार ये व्रत 6 जनवरी को रखा जा रहा है। साल में आने वाली सभी एकादशियों में से इस व्रत का खास महत्व माना गया है। मान्यता ये भी है कि इस व्रत को रखने से संतान सुख प्राप्त होता है। व्रत की महिमा को जानिए इस पौराणिक कथा से...

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Posh Putrada Ekadashi (Vaikunta Ekadashi 2020), Puja Vidhi, Katha, Muhurat, Parana Samay: हर साल पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जाता है। ये व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना के लिए रखती हैं। इस बार ये व्रत 6 जनवरी को रखा जा रहा है। साल में आने वाली सभी एकादशियों में से इस व्रत का खास महत्व माना गया है। मान्यता ये भी है कि इस व्रत को रखने से संतान सुख प्राप्त होता है। व्रत की महिमा को जानिए इस पौराणिक कथा से…

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा (Posh Putrada Ekadashi Vrat Katha):

भद्रावती नामक नगरी में सुकेतुमान नाम का एक राजा राज्य करता था। उसके कोई पुत्र नहीं था। उसकी स्त्री का नाम शैव्या था। वह निपुत्री होने के कारण सदैव चिंतित रहा करती थी। राजा के पितर भी रो-रोकर पिंड लिया करते थे और सोचा करते थे कि इसके बाद हमको कौन पिंड देगा। राजा को भाई, बाँधव, धन, हाथी, घोड़े, राज्य और मंत्री इन सबमें से किसी से भी संतोष नहीं होता था।

वह सदैव यही विचार करता था कि मेरे मरने के बाद मुझको कौन पिंडदान करेगा। बिना पुत्र के पितरों और देवताओं का ऋण मैं कैसे चुका सकूँगा। जिस घर में पुत्र न हो उस घर में सदैव अँधेरा ही रहता है। इसलिए पुत्र उत्पत्ति के लिए प्रयत्न करना चाहिए। जिस मनुष्य ने पुत्र का मुख देखा है, वह धन्य है। उसको इस लोक में यश और परलोक में शांति मिलती है अर्थात उनके दोनों लोक सुधर जाते हैं। पूर्व जन्म के कर्म से ही इस जन्म में पुत्र, धन आदि प्राप्त होते हैं। राजा इसी प्रकार रात-दिन चिंता में लगा रहता था।

राजा को देखकर मुनियों ने कहा- हे राजन! हम तुमसे अत्यंत प्रसन्न हैं। तुम्हारी क्या इच्छा है, सो कहो। राजा ने पूछा- महाराज आप कौन हैं, और किसलिए यहाँ आए हैं। कृपा करके बताइए। मुनि कहने लगे कि हे राजन! आज संतान देने वाली पुत्रदा एकादशी है, हम लोग विश्वदेव हैं और इस सरोवर में स्नान करने के लिए आए हैं। यह सुनकर राजा कहने लगा कि महाराज मेरे भी कोई संतान नहीं है, यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो एक पुत्र का वरदान दीजिए। मुनि बोले- हे राजन! आज पुत्रदा एकादशी है। आप अवश्य ही इसका व्रत करें, भगवान की कृपा से अवश्य ही आपके घर में पुत्र होगा।

मुनि के वचनों को सुनकर राजा ने उसी दिन एकादशी का ‍व्रत किया और द्वादशी को उसका पारण किया। इसके पश्चात मुनियों को प्रणाम करके महल में वापस आ गया। कुछ समय बीतने के बाद रानी ने गर्भ धारण किया और नौ महीने के पश्चात उनके एक पुत्र हुआ। वह राजकुमार अत्यंत शूरवीर, यशस्वी और प्रजापालक हुआ।

पूजा विधि: इस दिन व्रत रखने वालों को सुबह जल्दी उठ व्रत करने का संकल्प लेना होता है। भगवान विष्णु की पूजा में गंगा जल, तुलसी, तिल, फूल पंचामृत इत्यादि का प्रयोग जरूर करें। इस व्रत को निराहार या फलाहार दोनों ही तरीकों से रखा जा सकता है। व्रत रखने वाले शाम के समय भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद फल ग्रहण कर सकते हैं। लेकिन इस व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किया जाता है। व्रत के अगले दिन द्वादशी पर किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर कुछ दान-दक्षिणा जरूर दें।

पारण का समय:
7वाँ जनवरी को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 01:30 पी एम से 03:34 पी एम
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय – 10:05 ए एम
एकादशी तिथि प्रारम्भ – जनवरी 06, 2020 को 03:06 ए एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त – जनवरी 07, 2020 को 04:02 ए एम बजे

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