सनातन धर्म में पूजा घर को घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घर में पूजा स्थल सही दिशा और सही नियमों के अनुसार बनाया जाए, तो घर में सुख- समृद्धि का वास रहता है। मान्यता है कि इससे परिवार में और खुशहाली बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं पूजा घर से जुड़े कुछ आसान वास्तु नियम, जिन्हें अपनाने से घर का वातावरण सकारात्मक बना रह सकता है।
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पूजा घर की सही दिशा कौन-सी मानी जाती है?
वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर का ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा पूजा घर के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। कहा जाता है कि इस दिशा में देवी-देवताओं की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा घर में बनी रहती है।
पूजा घर में रखें साफ-सफाई का विशेष ध्यान
पूजा स्थल को हमेशा साफ रखना चाहिए। मान्यता है कि गंदगी या बिखराव होने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। रोजाना पूजा घर की सफाई करने और दीपक जलाने से वातावरण पवित्र बना रहता है।
टूटे हुए भगवान की मूर्तियां न रखें
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर में खंडित या टूटी हुई मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। ऐसी मूर्तियों को शुभ नहीं माना जाता। अगर घर में कोई टूटी मूर्ति हो, तो उसे किसी पवित्र नदी या जल में विसर्जित कर देना बेहतर माना जाता है।
पूजा करते समय किस दिशा में बैठें?
पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे मन एकाग्र रहता है और पूजा का सकारात्मक प्रभाव बना रहता है। वहीं दक्षिण दिशा में मुंह करके पूजा नहीं करनी चाहिए।
पूजा घर के पास न रखें ये चीजें
वास्तु के अनुसार पूजा घर के पास जूते-चप्पल, झाड़ू या बेकार सामान नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा पूजा स्थल के ऊपर या नीचे शौचालय होना भी शुभ नहीं माना जाता।
रोज जलाएं दीपक और धूप
मान्यता है कि सुबह-शाम पूजा घर में दीपक और धूप जलाने से घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है। इससे मानसिक तनाव कम होने और परिवार में सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है।
लकड़ी का मंदिर माना जाता है शुभ
वास्तु शास्त्र में लकड़ी के बने मंदिर को शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इससे घर में पॉजिटिव ऊर्जा बनी रहती है। वहीं पूजा घर में हल्के पीले, सफेद या क्रीम रंग का उपयोग शुभ माना जाता है।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से वास्तु शास्त्र की गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
