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सही नहीं है ग्रहयोग, आ सकती है बड़ी आपत्ति, छोटे व्यापारियों को हो सकता है नुकसान

वक्री शनि की वृश्चिक में मौजूदगी जहां आगज़नी, विरोध, आंदोलन, दंगे-फ़साद, ख़ून-ख़राबा और वैमनस्य के साथ हवाई दुर्घटना, रेल दुर्घटना व सड़क दुर्घटनाओं से जान माल की क्षति का संकेत दे रही है।
सांकेतिक फोटो

21 जून की अलस्सुबह जब वक्री शनि 4 महीने 25 दिन बाद अपने कट्टर शत्रु मंगल की राशि वृश्चिक में पुनः लौटे तो आकाश मण्डल के ग्रहों की सरगोशी से नज़ूमियों यानि भविष्य पढ़ने वालों की सिर्फ आंखें ही नहीं सिकुड़ी, बल्कि उनकी पेशानियों पर भी बल पड़ गए। इस समय मंगल अपने परम मित्र सूर्य के साथ अपने परम शत्रु बुध की राशि मिथुन में, शुक्र स्वयं की राशि वृष में, केतु शनि की राशि कुम्भ में, चंद्रमा मित्र वृहस्पति की राशि धनु में, शनि महा शत्रु मंगल की राशि वृश्चिक में, वृहस्पति शत्रु बुध की राशि कन्या में, राहू धुरविरोधी सूर्य की राशि सिंह में और बुध अपने दुश्मन चंद्रमा की राशि कर्क में गतिशील हैं।

जैसा कि पहले से अनुमान था, ग्रहों की यह स्थिति एक गंभीर चेतावनी की तरह नज़र आती है। वक्री शनि की वृश्चिक में मौजूदगी जहां आगज़नी, विरोध, आंदोलन, दंगे-फ़साद, ख़ून-ख़राबा और वैमनस्य के साथ हवाई दुर्घटना, रेल दुर्घटना व सड़क दुर्घटनाओं से जान माल की क्षति का संकेत दे रही है, वहीं बुध के घर में शत्रु मंगल की उपस्थिति ख़स्ता व्यापार, बेरौनक़ बाज़ार और किसी बड़े षड्यंत्र की कथा भी कह रही है। वृहस्पति की शत्रु बुध की राशि कन्या में बैठक ज्ञान और व्यवहारिकता के टकराव, और राजा और विचारकों के दुराव की द्योतक है। इस दरमियान पड़ोसियों और सरहद पर तनाव के इशारे तो साल के आग़ाज़ से सरगोशी कर रहे हैं पर शुक्र की स्वघर में मौजूदगी कुछ झड़पों के अलावा किसी भीषण युद्ध का संकेत फ़िलहाल तो नहीं दे रही हैं, पर योजनाओं और कूटनीतिक स्तर पर विफलताओं का आभास ज़रूर करा रही है।

राजा के ईमानदार प्रयास नाकाफ़ी सिद्ध होंगे। राजनैतिक दृष्टि से ये काल किसी साज़िश के साथ बड़ी भूल की ओर स्पष्ट इशारा कर रहा है। यह ग्रहयोग राजनैतिक दुस्साहस और जनता की बेचैनी की चुग़ली कर रहा है। छोटे व्यापारी जहां उलझन में नज़र आयेंगे, वहीं बड़े कारोबारी मोटा माल कमायेंगे। व्यापारी क़ानूनी पचड़े में उलझा महसूस करेगा। बहुतों की नौकरियां जाती हुए दृष्टिगोचर हो रही है। ग्रहों की चाल कारोबार में जहां सुस्ती की तस्वीर उकेर रही है, वहीं आश्चर्य जनक रूप से शेयर बाज़ार में तेज़ी मंदी की उठापटक के दौरान चुपचाप किसी तेज़ क़दम के संकेत साफ़ दिखाई दे रहे हैं।

18 नवम्बर तक शेयरों की शतरंजी चाल शायद कभी ऊपर, कभी नीचे की नूरा कुश्ती की तरह प्रतीत हो, पर आने वाला साल निश्चित रूप से स्टॉक मार्केट के लिये कोई बड़ा महाउछाल दर्ज करायेगा। सोने के भाव में नवम्बर तक नरमी बनी रहेगी। रीयल स्टेट चरमरा जायेगा और दिवालिये पन की कगार पर पहुंच रहे बिल्डरों को क़ानून का ख़ौफ़ सतायेगा। 18 नवम्बर, 2017 तक बाढ़, भूकंप, प्रकृतिक और सूनामी जैसी प्रकृति प्रदत्त आपदाओं का ख़तरा लगातार बना हुआ है। राहू जब सूर्य की राशि से विदा लेकर अपने महा शत्रु चंद्रमा की राशि कर्क में जायेगा, तब मानसिक पीड़ा प्रदान करने के साथ जल से जुड़ी आपदा या महामारी की पृष्ठभूमि तैयार करेगा। वृहस्पति जब कन्या से निकल कर अपने वैचारिक विरोधी दैत्यगुरु शुक्र के घर तुला में जायेंगे, लग्ज़री के व्यापार के साथ व्यक्तिगत व राष्ट्रों के संबंधों पर प्रहार करेंगे।

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