ताज़ा खबर
 

Pitru Paksha 2019 Date: लाखों टन अनाज इस्तेमाल होता है पिंडदान में, अब खाद बनाने की नई पहल

Pitru Paksha 2019 (Pitrapaksh 2019 Date): श्राद्ध पक्ष 14 सितंबर से शुरु हो रहे हैं। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए लोग उनका तर्पण करते हैं। इन दिनों में पिंडदान करने का खास महत्व माना जाता है। पिंडदान में प्रयोग होने वाली सामग्री स्थानीय लोगों द्वारा नदी में प्रवाह कर दी जाती है। जिससे प्रदूषण बढ़ जाता है। सामग्री का बेहतर इस्तेमाल हो इसके लिए पटना नगर निगम और नगर परिषद के अधिकारियों के साथ बैठक कर खाद बनाने का निर्णय लिया गया।

Author Published on: September 12, 2019 11:34 AM
अब पिंडदान में प्रयोग की जाने वाली सामग्रियों से बनाई जायेगी खाद।

श्राद्ध पक्ष 14 सितंबर से शुरु होकर 28 सितंबर तक चलेंगे। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए लोग उनका तर्पण करते हैं। इन दिनों में पिंडदान करने का खास महत्व माना जाता है। पिंडदान में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों को अक्सर जहां-तहां फेंक दिया जाता है या नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है, जिससे प्रदूषण होता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। क्योंकि इस बार इन सामग्रियों से विशेष तरह की खाद बनाने की तैयारी की जा रही है। जिसे कृषि के क्षेत्र में उपयोग किया जायेगा।

पुनपुन क्षेत्र में पिंडदान करने आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 16 पिंड बनाने के साथ एक मुख्य पिंड भी बनाना पड़ता है। पिंड बनाने के बाद उन्हें तर्पण के रूप में भोज्य पदार्थ देना होता है। जिस कारण पुनपुन क्षेत्र में प्रत्येक साल लगभग पांच लाख लोग पिंडदान के लिए पहुंचते हैं। नदी तक तट पर पिंड को बनाना होता है। बाद में यही सामग्री स्थानीय लोगों द्वारा नदी में प्रवाह कर दी जाती है। जिससे प्रदूषण बढ़ जाता है। सामग्री का बेहतर इस्तेमाल हो इसके लिए पटना नगर निगम और नगर परिषद के अधिकारियों के साथ बैठक कर खाद बनाने का निर्णय लिया गया। इसमें कृषि विभाग के वैज्ञानिकों से भी मदद ली जाएगी। प्रत्येक दिन पिंड की सामग्री को एक जगह एकत्रित कर उससे खाद बनायी जाएगी जो कृषि कार्य के लिए उपयोगी होगी।

कैसे बनेगी खाद? पटना जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. राकेश रंजन के अनुसार जैविक पदार्थों को एक स्थान पर इकट्ठा करने के बाद उसे जमीन में गड्ढा बनाकर डाला जाएगा। इन सामग्री के साथ बैक्टीरिया कल्चर बनाने वाला पैकेट भी मिला दिया जाएगा। इससे फूल माला, आटा आदि के सड़ने पर दुर्गंध नहीं आएगी। इस खाद के तैयार होने में 45 से 60 दिनों का समय लगेगा। नाइट्रोजन, पोटैशियम और कैल्शियम युक्त यह खाद पौधों के पोषण और विकास के लिए काफी उपयोगी साबित होगी।

गया में भी खाद बनाने की तैयारी: पितृ पक्ष के दौरान पितरों का तर्पण करने के लिए बड़ी संख्या में लोग गया जाते हैं। पितर तर्पण में प्रयोग किये जाने वाली सामग्रियों से फैलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए यहां भी खास इंतजाम किये गये हैं। गया में खाद बनाने के लिए विष्णुपद में तीन और अक्षयवट में दो ग्रीन कंपोस्टर चालू कर दिये गये है। इसकी क्षमता पांच सौ किलोग्राम की है। इसमें पांच क्विंटल कचरा व पिंड डालने पर एक क्विंटल जैविक खाद बनेगी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 Ganesh Visarjan 2019, Lalbaugcha Raja 2019 Darshan: लालबाग चा राजा हुए विदा, विसर्जन के साथ गूंजी आवाज..’गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’
2 Finance Horoscope Today, September 12, 2019: धनु राशि वालों के आर्थिक मामलों के लिए आज का दिन रहेगा अच्छा, जानें अपना वित्त राशिफल
3 Ganesh Visarjan/Anant Chaturdashi Songs: खेसारी लाल यादव का ‘ए गणेश बबुआ’ गाना हो रहा वायरल, सुनें ये Bhojpuri Bhakti Songs