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Shradh 2019 Start Date: पितृ पक्ष कल से हो रहा शुरु, जानें श्राद्ध की तिथियां और पिंडदान करने के स्थान

Shradh Dates 2019: 14 सितंबर से यूपी, बिहार, दिल्ली समेत पूरे देश में पितृ पक्ष श्राद्ध (Pitru Paksha 2019) आरंभ हो जाएंगे जो 28 सितंबर तक रहेंगे। पितृपक्ष में पितरों के लिए पिण्डदान (Pind Daan) और श्राद्ध किया जाता है। कई पुराणों और ग्रंथों में गया में पिंडदान और श्राद्ध का महत्व बताया गया है।

pitru paksha 2019 date, shradh 2019 date, when is shradh, what is pind daan, pind daan places in india, pind daan kaise karenश्राद्ध पक्ष 14 सितंबर से हो रहा है शुरु, जानें गया के अलावा कहां किया जा सकता है पिंडदान।

पितृ पक्ष 14 सितंबर से शुरु हो रहा है। इस वर्ष 13 सितंबर पूर्णिमा को ऋषि तर्पण और श्राद्ध होगा इसके बाद 14 सितंबर से यूपी, बिहार, दिल्ली समेत पूरे देश में पितृ पक्ष श्राद्ध आरंभ हो जाएंगे जो 28 सितंबर तक रहेंगे। पितृपक्ष में पितरों के लिए पिण्डदान और श्राद्ध किया जाता है। कई पुराणों और ग्रंथों में गया में पिंडदान और श्राद्ध का महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि यहां पितरों का कर्म करने से उन्हें मुक्ति मिल जाती है। इसलिए पितृपक्ष में बड़ी संख्या में लोग गया जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पिंडदान के लिए केवल गया ही एक मात्र जगह नहीं है बल्कि इसके अलावा भी कुछ ऐसी जगह हैं जहां पिंडदान किया जा सकता है…

पितृ पक्ष का महत्व और तिथि अनुसार श्राद्ध करने का पुण्य फल

भारत में श्राद्ध के लिए हरिद्वार, गंगासागर, जगन्नाथपुरी, कुरुक्षेत्र, चित्रकूट, पुष्कर, बद्रीनाथ सहित 55 स्थानों को महत्वपूर्ण माना गया है जहां पिंडदान किया जा सकता है। लेकिन शास्त्रों में पिंडदान के लिए इनमें से तीन जगहों को सबसे विशेष माना गया है। जिसमें बद्रीनाथ भी शामिल है। बद्रीनाथ के पास ब्रह्मकपाल सिद्ध क्षेत्र में पितृदोष मुक्ति के लिए तर्पण का विधान है। दूसरा हरिद्वार में नारायणी शिला के पास लोग अपने पूर्वजों का पिंडदान करते हैं। तो तीसरा जिसे सबसे मुख्य माना गया है वो है गया। बिहार की राजधानी पटना से 100 किलोमीटर दूर गया में साल में एक बार 17 दिन के लिए मेला लगता है। जिसे पितृ-पक्ष मेला कहा जाता है। पितृ पक्ष में फल्गु नदी के तट पर विष्णुपद मंदिर के पास और अक्षयवट के पास पिंडदान करने से पूर्वजों को मुक्ति मिलती है।

पितृ पक्ष में क्या दान करने से खुश होते हैं पितर

क्या होता है पिंडदान? विद्वानों के मुताबिक, किसी वस्तु का गोलाकर रूप पिंड कहा जाता है। इसी तरह प्रतीकात्मक रूप में शरीर को भी पिंड कहा गया है। पिंडदान के समय मृतक के निमित्त अर्पित किए जाने वाले पदार्थ, जिसमें जौ या चावल के आंटे को गूंथकर बनाया गया जाता है वह गोलाकृति पिंड कहलाता है। दक्षिणाभिमुख होकर, आचमन कर जनेऊ को दाएं कंधे पर रखकर चावल, गाय के दूध, घी, शक्कर और शहद को मिलाकर बनाए गए पिंडों को श्रद्धा भाव के साथ अपने पितरों को अर्पित करना ही पिंडदान कहलाता है। पिंडदान के समय जल में काले तिल, जौ, कुशा और सफेद फूल मिलकार उस जल से विधिपूर्वक तर्पण करने से पितर तृप्त होते हैं। श्राद्ध के बाद ब्राह्मण को भोजन कराया जाता है।

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