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Pitru Paksha 2019 Start Date: पितृ पक्ष पर तर्पण के लिए जान लीजिए सही तिथि, तारीख और दिन

Shradh 2019 Start Date, pitru paksha : पितृ पक्ष (Pitra Paksha) आश्विन माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होते हैं जो तिथि इस बार 14 सितंबर को है। 13 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध (Bhadrapada Purnima 2019 Date) है जिसे प्रोष्ठपदी पूर्णिमा भी कहा जाता है। शास्त्रानुसार जिनकी मृत्यु पूर्णिमा को हुई हो उनका महालय श्राद्ध भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा में किए जाने का प्रावधान है।

pitru paksha, pitru paksha 2019 date, pitru paksha kab hai, Pitra Paksha, when is star pitru paksha, shradh 2019 date, shradh tithi, pitru paksha, shradh significancepitru paksha: 14 सितंबर को साल 2019 का पहला श्राद्ध है।

Pitru Paksha : बहुत से लोगों का सोचना है कि पितृ पक्ष 13 सितंबर से शुरु हो रहा है। लेकिन ऐसा नहीं है श्राद्ध का प्रारंभ 14 सितंबर से होगा। 13 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध है जिसे प्रोष्ठपदी पूर्णिमा भी कहा जाता है। शास्त्रानुसार जिनकी मृत्यु पूर्णिमा को हुई हो उनका महालय श्राद्ध भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा में किए जाने का प्रावधान है। यह पार्वणी श्राद्ध कहलाता है। हालांकि उत्तर भारत में पूर्णिमा मृत्यु तिथि वालों का महालय श्राद्ध अश्विन अमावस्या के दिन करने की परंपरा है। पितृ पक्ष आश्विन माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होते हैं जो तिथि इस बार 14 सितंबर को है।

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किस तारीख को है कौन सा श्राद्ध:
13 सितंबर शुक्रवार प्रोष्ठपदी/पूर्णिमा श्राद्ध
14 सितंबर शनिवार प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध
15 सितंबर रविवार द्वितीया तिथि का श्राद्ध
17 सितंबर मंगलवार तृतीया तिथि का श्राद्ध
18 सितंबर बुधवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
19 सितंबर बृहस्पतिवार पंचमी तिथि का श्राद्ध
20 सितंबर शुक्रवार षष्ठी तिथि का श्राद्ध
21 सितंबर शनिवार सप्तमी तिथि का श्राद्ध
22 सितंबर रविवार अष्टमी तिथि का श्राद्ध
23 सितंबर सोमवार नवमी तिथि का श्राद्ध
24 सितंबर मंगलवार दशमी तिथि का श्राद्ध
25 सितंबर बुधवार एकादशी का श्राद्ध/द्वादशी तिथि/संन्यासियों का श्राद्ध
26 सितंबर बृहस्पतिवार त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
27 सितंबर शुक्रवार चतुर्दशी का श्राद्ध
28 सितंबर शनिवार अमावस्या व सर्वपितृ श्राद्ध
29 सितंबर रविवार नाना/नानी का श्राद्ध

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क्यों किया जाता है श्राद्ध? पितृ ऋण उतारने के लिए ही पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म किया जाता है। माना जाता है कि इस दौरान हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और हमारे द्वारा श्रद्धा के साथ दी गई सामग्री को स्वीकार करते हैं। इसलिए इन दिनों जो कुछ भी उन्हें श्रद्धा के साथ अर्पण किया जाता है उसे ही श्राद्ध कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं अनुसार जो व्यक्ति अपने पितरों का तर्पण या श्राद्ध नहीं करता उसे पितृदोष का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष में भी पितृदोष को सबसे अहम माना गया है। इस दोष के कारण व्यक्ति अपने जीवन में तरक्की नहीं कर पाता। लेकिन अगर पितर खुश हैं तो वे आपके जीवन में खुशहाली बने रहने का आशीर्वाद देते हैं। अत: जिन लोगों की कुंडली में पितृदोष लगा हुआ है उन्हें इस दौरान पूरी श्रद्धा भाव से पितरों की शांति के उपाय करने चाहिए।

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