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Pitru Paksh 2018: पितृ पक्ष आज से शुरू, जानिए श्राद्ध विधि और सही समय

Pitru Paksh 2018: ऐसा कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पितृ घर में विराजमान करते हैं। पितृ घर में विराजमान होकर अपने वंश का कल्याण करते हैं। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आने की बात भी कही गई है।

Author नई दिल्ली | September 24, 2018 12:05 PM
तस्वीर का प्रयोग प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Photo: ANI)

Pitru Paksh 2018, Shradh Vidhi: 24 सितंबर, दिन सोमवार यानी आज से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है। पितृ पक्ष कुल 16 दिनों तक रहेगा। ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान हमारे पितृ घर में विराजमान करते हैं। मान्यता है कि पितृ घर में विराजमान होकर अपने वंश का कल्याण करते हैं। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आने की बात भी कही गई है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है। कहा जाता है कि पितृ पक्ष में ऐसे लोगों को जरूर अर्पण-तर्पण करना चाहिए। इसके साथ ही हर किसी के लिए श्राद्ध करना लाभकारी माना गया है। माना जाता है कि श्राद्ध करने से हमारे पितृ तृप्त होते हैं। चलिए जानते हैं कि श्राद्ध करने की सही विधि क्या है।

श्राद्ध के दिन जल में काले तिल डालें, सफेद तिल का इस्तेमाल बिल्कुल भी ना करें। श्राद्ध वाले दिन सुबह स्नान करने के बाद जल में तिल के अलावा जौ, कुशा, अक्षत व श्वेत पुष्प, चंदन, कच्चा दूध डाले लें। इसके बाद पूजा स्थान पर पूर्वाभिमुख होकर बैठ जाएं। दो कुषा की पवित्री दाहिने हाथ की अनामिका में और तीन कुषा की पवित्री बाएं हाथ की अनामिका अंगुली में धारण करके पितृ तर्पण का संकल्प करें। देव ऋषि और अपने पितरों का आवाहन करें, उंगलियों के अग्र भाग से 29 बार देव तर्पण या देवताओं को जल दें। इसके लिए 29 अलग-अलग मंत्र हैं, अगर आपको याद नहीं है तो नहीं तो ‘ऊँ ब्रह्मा तृप्यताम्’ मंत्र का उच्चारण करके तर्पण करें। देव तर्पण के बाद नौ बार ऋषियों को जल दें, इसमें भी सबके नाम नहीं ले सकें तो ‘ऊँ नारदस्तृप्यताम्’ का उच्चारण करें।

इसके बाद उत्तराभिमुख होकर बैठ जाएं और दिव्य मनुष्यों का तर्पण करें, इसमें सात दिव्य मनुष्य हैं, प्रत्येक को दोनों हाथ की हथेलियों से जल दें। एक दिव्य पुरुष के लिए दो बार, इस प्रकार 14 बार तर्पण करें, सबके नाम नहीं ले सकें तो ‘ऊँ सनकस्तप्यताम’ का उच्चारण करें। दिव्य मनुष्य को जल देने के बाद दक्षिणाभिमुख होकर दिव्य पितृ तर्पण करें, इसमें सात नाम आते हैं, प्रत्येक तो तीन-तीन बार जल देने का विधान है। तर्जनी मूल से इक्कीस बार जल दें, इसमें 21 बार ‘ऊँ तस्मै स्वधा’ का उच्चारण करना होता है। दिव्य पितृ तर्पण के मुताबिक ही यम तर्पण करें। इसमें चौदह यम हैं, प्रत्येक यम के लिए 3-3 अंजुली जल दें। इस प्रकार 42 बार जल दें, इसमें 14 नाम लें तो ‘ऊँ यमाय नम:’ भी कह सकते हैं।

इसके बाद अपने पितरों के नाम से पितृ तर्पण करें, इसमें सबसे पहले आप अपने गौत्र का उच्चारण करें। अपने पूर्वजों के नाम का ध्यान करके ‘तस्यै स्वधा’ बोलकर एक-एक नाम से तीन-तीन बार जल पिता, दादा, परदादा को दें। माता, दादी, परदादी को जल देते समय ‘तस्यै स्वधा’ बोलें, फिर नाना, परनाना, नानी, परनानी को जल दें। इसके अलावा अन्य संबंधियों के नाम, गौत्र का उच्चारण करके जल दें। इसके बाद सूर्य को पुष्प, चंदन मिला जल से अर्घ्य देकर जल नेत्रों से लगाएं, अंत में ‘ऊँ विष्णवे नम:’ का 3 बार उच्चारण करके क्षमा-प्रार्थना करें। तर्पण में दिया गया जल किसी पवित्र पेड़ की जड़ों में डाल दें।

श्राद्ध करने का समय:

कुतुप मुहूर्त: 11:48 से 12:36 तक।

रौहिण मुहूर्त: 12:36 से 13:24 तक।

अफराह्न काल: 13:24 से 15:48 तक।

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